चहुंओर उठ रहा पवित्र भावनाओं का ‘ज्वार’

Basti Updated Thu, 02 Aug 2012 12:00 PM IST
बस्ती। श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर गुरुवार को बहन और भाई के प्रेम का प्रतीक त्योहार मनाया जा रहा है। आज बहनें भाइयों की कलाई पर कच्चा धागा बांधकर उनकी दीर्घायु व प्रसन्नता के लिए प्रार्थना करेंगी ताकि संकट काल में वे अपनी बहन की रक्षा करने में रक्षम रहें। बदले में भाई अपनी बहनों की हर स्थिति में रक्षा के वचन स्वरूप उपहार देता है। प्रेम के इस त्योहार पर रिश्तों की भावनाएं हिलोरे ले रही हैं।
भाई-बहनों के इस त्योहार को लेकर बुधवार की शाम जमकर खरीदारी की गई। राखी से लेकर मिठाइयों और गिफ्ट आइटम की दुकानों पर जबरदस्त भीड़ देखी गई। बुधवार बंदी के बावजूद गांधीनगर गुलजार था। कमरतोड़ महंगाई के बावजूद रक्षाबंधन के त्योहार के उत्साह में कोई कमी नहीं है। एक ओर बहनें अपने भाइयों के लिए बेहतरीन राखी तलाशती दिखीं तो भाई बहनों के लिए शानदार गिफ्ट खोजते रहे। घर के बडे़ बुजुर्ग श्रावणी पूर्णिमा पर पूजा की तैयारी करते देखे गए। इस दिन बड़ी संख्या में लोग सत्य नारायण की कथा श्रवण करते हैं और हवन पूजन करते हैं। गांधीनगर के सबसे बडे़ राखी के बाजार में खरीदारी करने आई छात्रा स्नेहा ने बताया कि इसमें कोई दोराय नहीं कि निम्न व मध्यम वर्ग तेजी से बढ़ी महंगाई से त्रस्त है, फिर भी त्योहार में उसने पिछले साल से महंगी राखी खरीदी है। राखी विक्रेता सूरज ने बताया कि पटना, कोलकाता, बनारस से थोक राखी की मंडियों में दाम थोडे़ बढ़े हैं। मगर ग्राहकों के लिए इसका कोई मतलब नहीं है।

कई मान्यताओं ने बना दिया ‘कुंदन’
हिंदू पुराण कथाओं के मुताबिक, महाभारत में पांडवों की पत्नी द्रोपदी ने भगवान कृष्ण की कलाई से बहते खून को रोकने के लिए अपनी साड़ी का किनारा फाड़कर बांध दिया था। इस प्रकार वे दोनों भाई बहन के बंधन में बंध गए थे। श्रीकृष्ण ने तब उनकी रक्षा का वचन दिया था। रक्षा का अर्थ है बचाव। मध्य कालीन समय में महिलाएं असुरक्षित महसूस करती थीं। उस समय राखी बांध कर पुरुषों को भाई बनाने का प्रचलन बढ़ा। मुगल बादशाह हुमायूं को एक हिंदू रानी ने शांति प्रस्ताव के साथ उसे भाई मानते हुए राखी भेजा था। उसे बादशाह ने स्वीकार कर उस राज्य पर आक्रमण करने का इरादा त्याग दिया था। ऐसे न जाने कितने तथ्य इस त्योहार से जुड़ते चले गए और बढ़ती गई बंधन के इस त्योहार की महत्ता

ब्राह्मण बदलेंगे यज्ञोपवीत
भाई बहन के प्रेम को मजबूती प्रदान करने वाले पर्व पर सवर्णों खासकर ब्राह्मणों के पुरोहित अपने यजमानों को नया यज्ञोपवीत धारण कराते हैं। साथ ही उन्हें रक्षा का धागा बांधते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित जय प्रकाश द्विवेदी के मुताबिक, इस दिन जनेऊ बदलने से पूरे साल पवित्रता बनी रहती है।

कारागार में भाई-बहनों को मिलेगी ढील
भाई-बहन का महापर्व कारागार में भी मनाया जाएगा। जेल में बंद भाइयों व बहनाें को राखी बांधने-बंधवाने के लिए व्यवस्था बनाई गई है। जेलर बीके मिश्रा के मुताबिक, इस वर्ष भी भाई-बहनों को निराश नहीं किया जाएगा। अगर संख्या अधिक हो गई तो भी बारी-बारी से सभी को राखी बांधने या बंधवाने का मौका दिया जाएगा। मगर इसके लिए नियमित मुलाकात की प्रक्रिया पूरी करनी पडे़गी। उसमें कोई ढील नहीं दी जाएगी।

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