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सीएमआर को लेकर शासन सख्त

Basti Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
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बस्ती। सीएमआर की वसूली को लेकर शासन सख्त है। हर हाल में मिलों से बकाए की वसूली की जाएगी। चावल न देने वाले मिलरों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। चावल खराब होने की दशा में नीलामी कराई जाएगी और मिलरों से क्षति पूर्ति की वसूली होगी।
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आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश की राइस मिलों पर दो अरब रुपये का सीएमआर पिछले नौ साल का बकाया है। अकेले बस्ती मंडल में वर्ष 2011-12 का 28 करोड़ का बकाया है। अधिकतर चावल खराब होने या गबन कर लिए जाने की बात कही जा रही है। चूंकि सीएमआर में सारा धन सरकार का लगा रहता है। इसके चलते दुरुपयोग होने की संभावना अधिक रहती है। मिलों पर सीएमआर को लेवी में कनवर्ट कर दुरुपयोग करने का आरोप लगता आ रहा है। हालांकि मिलरों ने इससे इंकार किया है। पूरे प्रदेश में वर्ष 2011-12 का लगभग 20 लाख कुंतल सरकारी चावल बकाया है। इसमें अकेले बस्ती में 2.50 लाख कुंतल से अधिक मिलों पर बकाया चल रहा है। बकाए की वसूली के लिए फूड कमिश्नर अर्चना अग्रवाल ने प्रदेश के समस्त आरएफसी को पत्र लिखकर वसूली के लिए कड़े निर्देश दिए हैं। कहा कि क्रय नीति वर्ष 2011-12 में स्पष्ट है कि मिलों को एक माह में हरहाल में धान कूटकर सरकार को दे देना है।

सीएमआर को लेकर सख्त हुई फूड कमिश्नर
फूड कमिश्नर ने वर्ष 2009-10 व 2010-11 में अन डिलिवर्ड सीएमआर के निस्तारण के संबंध में भी आदेश जारी किए हैं। कहा है कि जिन मिलाें चावल बकाया है। पहले उसका सत्यापन आरएफसी और आरएमओ क्रय संस्था के जिलास्तरीय अधिकारी व क्रय केंद्र प्रभारी की समिति गठित करेंगे। टीम मिलों पर जाकर चावल की उपलब्धता व गुणवत्ता की जांच करेंगे। अगर मिलों पर चावल नहीं मिलता है तो टीम पहले मिल पर मुकदमा दर्ज कराएगी। उसके बाद आरसी के जरिए क्षति पूर्ति वसूलेगी। मगर अगर चावल खराब हो गया है तो नीलामी करा कर क्षति की भरपाई की जाए।

निस्तारण को दिए गए सुझाव : आरएफसी
आरएफसी एके सिंह कहते हैं कि बकाया चावल का निस्तारण के लिए अफसरों को सुझाव दिए गए हैं कि एफसीआई मिलों पर जो रखा हुआ है उसके गुणवत्ता की अपने गोदामों में रखे गए चावल से तुलना कर लें। अगर चावल ठीम मिले तो उसे मिलों से ही पीडीएस में उठान करा दिया जाए। जिस तरह एफसीआई ने बुक एडजस्टमेंट के जरिए पीडीएस में गेहूं दिया है। वही फार्मूला सीएमआर में भी लागू किया जाए। यह भी सुझाव दिया गया है कि चावल खाद्य विभाग और एसडब्लूसी के गोदाम में भंडारण कराया जाए। सत्यापन के बाद उसे पीडीएस में जारी कर दिया जाए। पीडीएस के लिए बाहर से चावल न मंगाने का भी सुझाव दिया गया है।

पांच महीने चावल हो रहा खराब
जनपद सिद्धार्थनगर के धनेरसा स्थित रामआधार राइस मिल के प्रोपराइटर रामआधार कहते हैं कि उनकी मिल पर पिछले पांच महीने में 1000 कुंतल सीएमआर भंडारण के अभाव में पड़ा हुआ है। स्थिति यह है कि बरसात में चावल खराब हो रहे हैं। बोरे सड़ चुके हैं। फर्श पर पानी आ जाने से चावल सड़ने लगा है। इसकी सूचना कई बार विभाग को दी जा चुकी है।

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