पांडे बाजार में नहीं होगा ओवर ब्रिज का निर्माण!

Basti Updated Thu, 26 Jul 2012 12:00 PM IST
बस्ती। पांडे बाजार में ओवर ब्रिज निर्माण अधर में लटक गया है। व्यापारी संगठनों के भारी विरोध के बावजूद रेलवे ने पुल बनाने की मंजूरी तो दे दी है मगर, अब तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए राज्य सेतु निगम ने ओवर ब्रिज बनाने से ही हाथ खड़े कर दिए हैं। यही नहीं, व्यवसायियों के ओर से विकल्प के रूप में दिए गए प्रस्ताव को भी निगम ने ठुकरा दिया है। निगम का तर्क है कि रेलवे क्रासिंग से पुल नहीं बना सकते।
बताते चलें कि एनईआर के बस्ती-गोविंदपुर के रेलवे क्रासिंग संख्या 199 ए पर रेल ओवर ब्रिज की मंजूरी मिली है। निर्माण कार्यक्रम योजना के तहत वर्ष 2009-10 में पूर्वोत्तर रेलवे ने इसे हरी झंडी दी थी। पुल के निर्माण की जिम्मेदारी राज्य सेतु निगम को सौंपी गई। निगम ने निर्माण से संबंधित जीएडी (सामान्य व्यवस्था आरेख) भी जारी कर दी। नई बाजार से पांडे बाजार मार्ग पर कुल 678.365 मीटर मुख्य पुल एवं पहुंच मार्ग का निर्माण होना है। ओवर ब्रिज निर्माण होने की जानकारी जब व्यापारी संगठनों को लगी तो उन्होंने निर्माण का विरोध किया। व्यापारियों का तर्क था कि पुल बन जाने से व्यवसाय बर्बाद हो जाएगा। बाद में पीएम, सीएम, रेल मंत्री, कमिश्नर और डीएम को पत्र लिखकर पुल निर्माण के एलाइनमेंट में परिवर्तन की मांग की गई। व्यापारियों ने तीन विकल्प भी दिया था। अब निगम ने पुल बनाने से हाथ खड़े कर दिए हैं। निगम के उप परियोजना प्रबंधक सुनील कुमार ने प्रशासन को खत लिखकर पुल बनाने हाथ खड़े कर दिए हैं।

जांच टीम ने खारिज किए थे वैकल्पिक सुझाव
बस्ती। तत्कालीन डीएम ने व्यापारियों के सुझाव गए विकल्प की सचाई जानने के लिए 30 सितंबर 2011 को एसडीएम सदर श्रीप्रकाश गुप्त, एक्सईएन पीडब्लूडी नशीम हैदर, उप परियोजना प्रबंधक सेतु निर्माण इकाई सुनील कुमार व सहायक अभियंता कैसर मसरूर अंसारी की टीम गठित की। टीम ने 31 अक्टूबर 2011 को स्थलीय निरीक्षण किया। पहले और दूसरे विकल्प को टीम ने अस्वाभाविक बता खारिज कर दिया। जो तीसरा विकल्प दिया गया। उसमें रेलवे यार्ड से होकर छह ट्रैक गुजरते हैं और दूसरी तरफ रेलवे कालोनी निर्मित है। इसे देखते हुए 90 डिग्री के कोण पर पुल को मोड़ना होगा। इसे भी टीम ने असंभव बताया। टीम ने अपनी रिपोर्ट में व्यापारी संगठनों के सुझाए गए विकल्प को ठुकरा दिया। कहा कि चूंकि एनएच-28 पर बाईपास बन गया है इसलिए भारी वाहनों का आवागमन रेलवे क्रासिंग संख्या-199 ए पर बहुत कम हो रहा है। ऐसे में यहां पर ओवर ब्रिज बनाने का कोई औचित्य नहीं है।

725 लाख की क्षति पूर्ति बनी रुकावट
ओवर ब्रिज का निर्माण करने में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी बाधा पुरानी दुकानों/मकानों को तोड़वाना है। भूमि अधिग्रहण/मकानों की क्षति पूर्ति के लिए 725 लाख रुपये से अधिक की आवश्यकता है। इतना ही नहीं, आवागमन के लिए कम से कम सड़क की चौड़ाई 18 मीटर होनी चाहिए, जो सिर्फ 12 से 16 मीटर है।

धर्म का हवाला दे ठुकराया अंडर ग्राउंड का प्रस्ताव
व्यापारी संगठनों और स्थानीय निवासियों के अनुरोध पर प्रशासन ने जब ओवर ब्रिज के स्थान पर अंडर ग्राउंड के निर्माण पर विचार-विमर्श किया तो कुछ लोगों ने धार्मिक जुलूस निकलने का हवाला देकर विरोध करना शुरू कर दिया था। इस नाते अंडर ग्राउंड निर्माण का मामला भी खटाई में पड़ गया।

व्यावसायिक हित में हो पुल का निर्माण
ओवर ब्रिज निर्माण का पांच सालों से विरोध करने वाले व्यापारी अमर मणि पांडेय, नंद किशोर गुप्ता, राजीव गंभीर, गौरव गुप्त, अनूप अरोरा, अंकुर कसौधन, भरत कुमार, गिरधारी लाल साहू सहित अन्य ने बताया कि जो विकल्प दिए गए हैं, अगर सेतु निगम, प्रशासन और रेलवे चाहे तो ओवर ब्रिज का निर्माण हो सकता है। व्यापारियों ने इस क्षेत्र में ओवर ब्रिज की आवश्यकता को ही सिरे से खारिज कर दिया है।कहा है कि ब्रिज का निर्माण हो जाने से व्यवसाय लगभग बंद हो जाएगा।

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