आ गया बरकत और अजमत का महीना

Basti Updated Fri, 20 Jul 2012 12:00 PM IST
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बस्ती। अगर चांद ने अपना दीदार कराने में नखरे नहीं दिखाया तो शुक्रवार की शाम से मस्जिदों में नमाज-ए-तरावीह शुरू हो जाएगी। शनिवार को बरकत और अजमत के महीने का पहला रोजा रखा जाएगा। मुस्लिम समुदाय मुकद्दस रमजान के खैरमकदम की तैयारी में जुटा है।
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माह-ए-रमजान की आमद चंद घंटों के बाद हो जाएगी। इसके साथ ही मस्जिदों और घरों में खुदा की इबादत शुरू हो जाएगी। मस्जिदें अकीदतमंदाें से गुलजार होंगी। उम्मीद है कि शुक्रवार की शाम मस्जिदाें में नमाज-ए-तरावीह पढ़ी जाएगी। शनिवार सेहरी करने के बाद पाबंदी से रोजे का एहतराम किया जाएगा। यह सिलसिला चांद रात तक चलेगा। घर-घर में कुरानेपाक की तिलावत और जिक्र खुदा की नेयमत होगी। मुस्लिम समुदाय खुदा की रहमत वाले इस महीने की तैयारी में जुटा है। बाजारों में सेहरी और इफ्तार के लिए जरूरी सामानाें की खरीदारी जोरशोर से चल रही है। मौलाना मोहम्मद वसीउल्लाह कहते हैं कि पैगंबरेइस्लाम ने फरमाया है कि जो बंदा रोजा रखकर भी गलत काम करे वह हम में से नहीं है। रोजा बुराइयों से दूर रहने, आपसी भाईचारा फैलाने और खुदा की इबादत का नाम है।
इन मस्जिदों में होगी नमाज-ए-तरावीह
शहर के जामा मसजिद, कटरा स्टैंड, खैर मसजिद, जीएनबाबू, निसार हुसैन, छोटी मसजिद पक्के बाजार, नूरानी मसजिद, जामियां हनफिया, दरिया खां, दारूल उल्लूम, मसजिद बेलाल, गड़गोडिया, दक्षिण दरवाजा, मसजिद अंजुमन इस्लामिया सहित दो दर्जन मसजिदों में नमाज-ए-तरावीह की नमाज अदा की जाएगी। शनिवार को सेहरी की और ‘बेसौमे गदिन नवैतो मिन शहरे रमजान’ दुआ के साथ अपने पहले रोजे की नियत करेंगे। घराें में कुरान शरीफ की तिलावत की जाएगी।

70 गुना बढ़ जाता है इबादत का सवाब
माहे रमजान मुसलमानों के लिए बड़े खैरो बरकत का महीना है। जो इबादत से सराबोर होता है। इस महीने में लोगाें को सिर्फ खुदा की बंदगी करनी चाहिए। इस महीने किए गए इबादत का सवाब सत्तर गुना अधिक होता है। रहमत के महीने में सुबह शाम की रौनक बढ़ जाती है। मदरसा खैरूल उल्लूूम के प्रिंसिपल अब्दुर रब कासमी के मुताबिक, मुकद्दस रमजान में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते है। जबकि शैतानों को पिंजड़ों में कैद कर दिया जाता है। रमजान से कुरान का गहरा ताल्लुक है। इसी महीने कुरान-ए-पाक को नाजिल किया गया। लोगों को इसकी तिलावत करनी चाहिए।

कहां कितने दिन की नमाज-ए-तरावीह
: जामा मस्जिद में 27 दिन।
: जामिया हनफिया में 7 दिन।
: दारूल उलूम में 27 दिन।
: दारूल उलूम में 7 दिन।
: जैफ मंजिल गांधीनगर में 27 दिन।
: माली टोला मस्जिद में 15 दिन।
: आगा दरिया खां मस्जिद में 27 दिन।
: अंजुमन मस्जिद पुरानी बस्ती में 7 दिन।
: अरबिया गौसिया मस्जिद पुरानी बस्ती में 27 दिन।
: डफाली टोला मस्जिद में 27 दिन।
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