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250 गांवों का नक्शा रिकार्ड रूम से गायब!

Basti Updated Thu, 19 Jul 2012 12:00 PM IST
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बस्ती। जिले के 250 गांवों के अस्तित्व का ही पता नहीं चल पा रहा है। वजह, अभिलेखागार से गांवों का नक्शा गायब हो गया है। अंदेशा जताया जा रहा है कि ग्राम समाज की जमीनों को हथियाने के निए ‘भूमाफियाओं’ ने रिकार्ड रूम के कर्मियों से मिलकर गांवों के नक्शे को ही गायब करवा दिया। वर्तमान में गांव की सीमा और खेतों की चौहद्दी तक किसानों को नहीं मालूम है। मामले का खुलासा होने पर सीआरओ ने प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
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मुख्यालय स्थित राजस्व अभिलेखागार से ढाई सौ से अधिक गांवों का नक्शा गायब हो चुका है। इसकी जानकारी आरआरके को छोड़ कर अन्य किसी को नहीं है। मामले का खुलासा कभी नहीं होता अगर, चननी सियारोबास की प्रमिला सिंह नक्शे की छानबीन नहीं करतीं। खेत का सीमांकन कराने के लिए जब महिला ने नक्शे की मांग तो अभिलेखागार के प्रभारी आरआरके कई महीनों तक टरकाते रहे। थक-हारकर महिला ने डीएम से नक्शा की मांग की। छानबीन के बाद पता चला कि गांव का नक्शा ही अभिलेखागार से गायब हो चुका है। यह भी पता चला कि 250 अन्य गांवों का भी नक्शा अभिलेखागार से गायब है। मामला जब सीआरओ के देवीदास के पास पहुंचा तो वे भी भौचक रह गए। आरआरके रामनिहाल तिवारी तलब हुए। बताया कि सभी नक्शा 20-25 साल से गायब हैं। सीआरओ ने बताया कि नक्शा गायब होने की जिम्मेदारी आरआरके की है। नक्शा गायब होने की जानकारी राजस्व परिषद को भी दी जा चुकी है। एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। जब आरआरके से नक्शा गायब होने वाले गांवों की सूची मांगी गई तो उन्होंने उसे देने में असमर्थता जताई है।


पांच साल पहले भी गायब हुआ था रिकार्ड
बस्ती। जानकार बताते हैं कि किसी राजस्व ग्रामों का चिह्नीकरण गांव के नक्शे से ही होता है। नक्शा से ही पता चलता है कि गांव की सीमा कहां तक है? ग्राम समाज की संपत्तियों की पहचान नक्शे से ही होती है। किसानों की जमीन कहां है और उसका कितना क्षेत्रफल है? इसका पता भी नक्शे से ही हो पाता है। विवाद होने की दशा में सीमांकन के समय भी गांव के नक्शे की आवश्यकता पड़ती है। पांच साल पहले भी इसी तरह का खुलासा हो चुका है। इस मामले में दर्जनों लोगों को जेल की हवा खानी पड़ी जबकि एक कर्मी को नौकरी से हाथ तक थोना पड़ा था। साथ ही तत्कालीन आरआरके को निलंबन का दंश झेलना पड़ा था।

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