किसके इशारे पर चल रही हैं आरामशीनें

Basti Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
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बस्ती। जिले में वैध से अधिक अवैध आरा मशीनों का संचालन आखिर किसके इशारे पर हो रहा है। इनके संचालन से अवैध कटान को बढ़ावा मिल रहा है। ऐसे में हरियाली का वजूद पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
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जिले में लाइसेंसी आरामशीनों की संख्या 65 है। कई साल से किसी नई आरामशीन को लाइसेंस जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद पिछले पांच वर्षों में दर्जनों की संख्या में नई आरा मशीनें लगाई गई हैं। इस समय जिले में करीब 90 आरा मशीनें अवैध रूप से संचालित हो रही हैं। इनके संचालन को रोकने की जिम्मेदारी वन विभाग और स्थानीय पुलिस की है। मगर दोनों ने चुप्पी साध रखी है। एडीएफओ मनोज खरे कहते हैं कि शिकायत मिलने पर अवैध आरामशीनों के संचालकों पर कार्रवाई की जाती है। विभाग की ओर से गठित सचल दस्ता भी ऐसे आरा मशीनों पर नजर रखता है। वन विभाग की मिलीभगत को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया।
इन स्थानों पर हैं गैर लाइसेंसी आरामशीनें
गौर ब्लाक क्षेत्र में दर्जन भर अवैध आरामशीनें संचालित किए जाने की खबर है। इनमें नरथरी और गौर में दो-दो, शहबाजपुर, बड़ोखर, बेलवरिया जंगल, मुस्लिम पैकोलिया, हलुआ में एक-एक अवैध आरामशीनों को संचालित किया जा रहा है। इसी तरह बस्ती शहर से सटे गनेशपुर में भी तीन आरामशीनों का संचालन अवैध तरीके से किया जा रहा है। कई बार इनकी चुटकी आदि खोलने की कार्रवाई की गई है, मगर बाद में मामला मैनेज हो जाने के बाद ये मशीनें फिर चलने लगी। टिनिच क्षेत्र में अवैध आरा मशीनें संचालित हैं। कोड़रा और आस पास के इलाके में भी तीन अवैध आरा मशीनों के संचालित होने की सूचना है। इसकी शिकायत डीएम से लेकर कमिश्नर तक से की जा चुकी है। हरैया क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक, कप्तानगंज में आधा दर्जन आरा मशीनें बगैर लाइसेंस के चलाई जा रही हैं।

कार्रवाई की बजाए मैनेज पर अधिक ध्यान
बस्ती। अवैध आरामशीनों के संचालन को रोकने के लिए दो टीमें बनाई गई हैं। इनमें एक वन संरक्षक की टीम है तो दूसरी डीएफओ की। वन संरक्षक के निर्देशन वाली टीम के इंचार्ज फारेस्टर सुभाष दूबे हैं तो डीएफओं के निर्देशन वाली टीम के इंचार्ज डिप्टी रेंजर राकेश चतुर्वेदी हैं। दोनों टीमें अवैध आरा मशीनों के संचालन को रोकने में असफल हैं। कुछ लोगों का तो आरोप है कि इन टीमों का ज्यादा ध्यान मामलों को मैनेज करने में रहता है।
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