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अब और महंगा होगा चावल-दाल

Basti Updated Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
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बस्ती। महंगाई से पहले से ही कराह रहे आम आदमी को एक और झटका झेलने के लिए तैयार रहना होगा। अगर आप चाहते हैं कि थाली में दाल और चावल भी मौजूद रहे तो जेब और ढीली करने को तैयार रहिए। वजह यह कि इस बार मानसून की लुकाछिपी ने किसानों को अरहर की बुआई का मौका ही नहीं दिया। रही बात धान की तो उसकी भी औसत से कम बुआई होने की आशंका है।
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अमूमन किसान 15 से 20 जून के बीच पहली बरसात होते ही अरहर की बुआई कर देते हैं ताकि मानसून सक्रिय होने से पहले अरहर का जमाव हो जाए और उसके पौधे इस लायक हो जाएं कि पानी की चोट सह सकें। पर इस बार मानसून के पहले की बारिश हुई ही नहीं। चूंकि खेतों में नमी बिल्कुल नहीं थी। बारिश के इंतजार में किसान बैठे रहे। घूमते-टहलते मानसून आया भी तो अब लगातार बारिश होती जा रही है। इसलिए किसानों को मौका ही नहीं मिला कि वे अरहर की बुआई कर पाएं। अब अगर मौसम सूखा हो भी जाए तो लेट वैराइटी छोड़कर सामान्य अरहर की बुआई का समय निकल गया है। जिन किसानों ने बरसात के पहले बुआई कर भी दी थी उनकी फसल ठीक नहीं दिख रही है। यही हाल धान का भी है। बरसात के इंतजार में धान की रोपाई भी किसान देर से शुरू किए। तमाम किसानों की नर्सरी रोपाई से पहले ही सूख गई। आंकडे़ गवाह हैं कि अब तक लक्ष्य से केवल 40 फीसदी तक ही रोपाई हो सकी है।

लक्ष्य से काफी पीछे है बुआई
बस्ती। कृषि विभाग ने इस बार खरीफ अभियान के तहत मंडल में 03.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई/बुआई का लक्ष्य रखा है। इसमें बस्ती में एक लाख 22 हजार 176 हेक्टेयर, संतकबीरनगर में 92 हजार हेक्टेयर और सिद्धार्थनगर में एक लाख 69 हजार 824 हेक्टेयर शामिल है। इस तरह कुल 8340 हेक्टेयर अरहर बुआई के लक्ष्य में बस्ती में 3191 हेक्टेयर, संतकबीनगर में 3255 और सिद्धार्थनगर में 1894 हेक्टेयर बुआई की जानी थी। संयुक्त कृषि निदेशक अशोक कुमार के मुताबिक, धान की 40 फीसदी रोपाई/बुआई हो चुकी है। रही बात अरहर की तो इस बार अरहर के मामले में किसान पिछड़ रहा है। हालांकि अभी कुछ वैराइटी लेट में बोई जा सकती हैं मगर, उनकी उपज प्रभावित होती है।

लेट वैराइटी के लिए अभी समय बाकी
बस्ती। यूं तो जून मध्य तक ही अरहर की बुआई के लिए आदर्श समय माना गया है। मगर देर से पकने वाली प्रजातियों की बुआई अभी की जा सकती है। जो करीब 250 से 270 दिन में पककर तैयार होती हैं। देर से पकने वाली प्रजातियों में टाइप-7, टाइप-17, अमर, नरेंद्र अरहर-1, पूसा-9, मालवीय विकास (एमएल-6) प्रमुख हैं। इसके अलावा बहार, आजाद, नरेंद्र-1 आदि किस्में भी जुलाई में बोई जा सकती हैं मगर, यह भी एक सप्ताह लेट हो चुकी हैं। कृषि वैज्ञानिक डाक्टर आरएल सिंह के मुताबिक, जुलाई में भी जो किसान अरहर की बुआई न कर पाएं वे सितंबर के पहले सप्ताह में पीडीए-11 की बुआई की जा सकती है।

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