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अधूरी तैयारी से लड़ेंगे जेई से जंग!

Basti Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
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बस्ती। पूर्वांचल में महामारी का रूप ले चुकी जापानी इंसेफेलाइटिस को काबू में करने के बस्ती मंडल में स्वास्थ्य महकमे की अभी तैयारियां अधूरी हैं। इस साल न तो जेई से बचाव को वैक्सीनेशन हुआ और न ही मंडल के किसी जिले में नये बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई। वहीं बस्ती समेत तीनों जिलों में आईसीयू की स्थापना भी अधर में लटका है। वह भी तब, जब जुलाई व अगस्त जेई के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। जबकि सूबे के 11 जिलों को संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है।
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जापानी इंसेफेलाइटिस को नियंत्रित कर मासूमाें को असमय मौत के आगोश में जाने से बचाने के लिए शासन भले ही गंभीर हो लेकिन, मंडल स्तर के विभागीय जिम्मेदारों की संवेदनशीलता नहीं जग पा रही है। 2010 में रोग से बचाव के लिए जेई वैक्सीनेशन कराया गया था लेकिन, पिछले व इस साल वैक्सीनेशन नहीं कराया गया। सिर्फ जिला अस्पताल में ही दो बाल रोग विशेषज्ञ हैं। अन्य अस्पतालों में पीडियाट्रीशियन का टोटा है। हालांकि शासन ने गोरखपुर-बस्ती मंडल में इंसेफेलाइटिस की संवेदनशीलता को देखते हुए बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती का डंका जरूर बजाया था लेकिन, अब तक मंडल में कोई तैनाती नहीं की गई।

केयर यूनिट वार्ड अधर में
महिला अस्पताल में बनने वाला न्यू सिक बार्न केयर यूनिट वार्ड का निर्माण कार्य भी अधर में लटका है। जिला अस्पताल, ओपेक कैली व सिद्धार्थनगर के चिल्ड्रेन वार्ड में दस-दस और संतकबीरनगर में चार बेड का आईसीयू प्रस्तावित है। इसे हर हाल में जुलाई तक क्रियाशील करने के लिए प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य और डीजी हेल्थ ने निर्देशित किया था। लेकिन आधा महीना गुजर गया, विभाग ने कार्यदाई संस्था का नाम तक फाइनल नहीं किया है। हालांकि दो करोड़ बयालीस लाख चौरासी हजार रुपये की लागत से बनने वाले आईसीयू के लिए 24-24 लाख रुपये प्रति दस बेड के हिसाब से शासन ने धन भी अवमुक्त कर दिया है।

पीछा नहीं छोड़ रहा घोटाले का भूत
एनआरएचएम घोटाले की काली छाया के चलते पैसा खर्च करने में विभागीय अधिकारी पूरी सतर्कता बरत रहे हैं। कार्यदाई संस्था को इस बात के लिए राजी कर रहे हैं कि पहले निर्माण करा फाइनल बिल प्रस्तुत करना होगा। फिर सत्यापन के बाद भुगतान किया जाएगा। इससे निर्माण संस्था पीछे हट रही है। ऊपर से उसके इस्टीमेट को बिजली विभाग से प्रमाणित भी कराया जाना है। ऐसे में आधा महीना गुजर गया लेकिन, अभी किसी संस्था के नाम पर सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब जेई भयावह रूप लेगी तो विभाग उसे कैसे काबू करेगा? मंडलीय अपर निदेशक डा. आईपी सिंह का कहना है कि आईसीयू निर्माण का जिम्मा सीएमओ व सीएमएस का है। फिर भी विलंब क्यों हो रहा है? इसकी जानकारी कर काम में तेजी लाने को निर्देशित किया जाएगा।

साल 2005 में टूटा सर्वाधिक कहर
सूबे में जापानी इंसेफेलाइटिस का सर्वाधिक कहर वर्ष 2005 में टूटा था। इस साल सूबे के 34 जिलों में जेई भारी पड़ी थी। जबकि 2010 में बीस, 2011 में 17 व 2012 की पहली छमाही में 11 जिले संवेदनशील की श्रेणी में रखे गए हैं। इनमें बस्ती मंडल के तीनों जिले शामिल हैं।

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