नशे में मारपीट के बाद दोस्त ने किया था कत्ल

Basti Updated Wed, 11 Jul 2012 12:00 PM IST
बस्ती। शिक्षक पुत्र अमित तिवारी हत्याकांड में जो कयास लगाए जा रहे थे वे सही साबित हुए। पुलिस के मुताबिक, नशे के चलते अमित के दोस्त ने ही नृशंस तरीके से उसका कत्ल कर दिया। इसके पीछे कोई खास वजह भी नहीं थी। नशे में धुत होकर मारपीट के दौरान दोस्त ने ही उसका चेहरा कूंच दिया था। बात केवल इतनी थी कि घटना के तीन दिन पहले अमित तिवारी ने कुछ साथियों के साथ अभियुक्त शानू को रोडवेज के पास पीट दिया था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
एसपी एमडी कर्णधार ने मंगलवार को घटनाक्रम की जानकारी दी। बताया कि घटना के दिन अमित तिवारी साइकिल से कटेश्वर पार्क गया था। वहां पर उसकी मुलाकात एक महीने के दोस्त शानू उर्फ सिकंदर पुत्र मोहम्मद कासिम निवासी मालीटोला गांधीनगर कोतवाली से हुई। दोनों पैदल टहलते जीआईसी कैंपस में गए। उस समय कैंपस का मेन गेट खुला था। बकौल शानू, वे दोनों कैंपस में काफी देर तक बैठे रहे। इस दौरान शानू ने नशे की गोली खाई और अमित तिवारी आदत के मुताबिक थिनर से रुमाल भिगोकर उसे सूंघकर नशे की तलब पूरी की। दोनों नशे में धुत हो गए तो किसी बात पर अमित फिर उसका हाथ मरोड़ने लगा और ईंट से पीठ पर प्रहार कर दिया। शानू ने खुद कबूल किया कि उसकी इस हरकत पर वह झुंझला गया। नशा होने की वजह से वह भी अपने को रोक नहीं पाया और अमित के सिर पर ईंट से वार कर दिया। एक ही वार में वह गिर पड़ा। इसके बाद ताबड़तोड़ तीन-चार ईंट उसके चेहरे पर मार दिया। उसे लहूलुहान देख वह घबरा गया और वहां से चला गया। उसे यह भी नहीं पता था कि अमित मर चुका है। एसपी के मुताबिक, पहले मृतक के दोस्तों और परिजनों से पूछताछ करते हुए मामले का क्लू मिला और तब शानू गिरफ्त में आया। उसकी साइकिल और मोबाइल अभी नहीं मिल सका है। एसपी ने 24 घंटे के भीतर मामले का खुलासा करने पर सीओ सिटी राजेश भारती की तारीफ की।

घटनाक्रम
रविवार की रात कोतवाली थानाक्षेत्र के पचपेड़िया निवासी 19 वर्षीय अमित तिवारी का चेहरा कूंचकर हत्या कर दी गई। दूसरे दिन जीआईसी कैंपस में बाउंड्री में उसकी खून से लथपथ लाश मिली। मृतक के पिता अमरेश तिवारी प्राइमरी स्कूल के अध्यापक हैं। इनके बडे़ भाई आलोक कुमार तिवारी ने तहरीर देकर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा कायम कराया था।

एक माह में हो गया दोस्ती का खूनी अंत
पुलिस की गिरफ्त में आ चुके शानू उर्फ सिकंदर ने बताया कि कटेश्वर पार्क आते-जाते दोनों की दोस्ती हुई। वे दोनों अक्सर पार्क में बैठकर नशा करते थे। एक महीना पहले उन दोनों में अचानक बातचीत शुरू हुई और फिर वे रोजाना मिलने-जुलने लगे। पर एक ही महीने में इस दोस्ती का खूनी अंत हो गया।

मिर्गी की दवा का करता था इस्तेमाल
शानू उर्फ सिकंदर ने बताया कि उसे झटके आते थे। इसी की दवा चल रही थी। उस दवा से हल्का नशा होता था। इसके बाद उसने डोज बढ़ाना शुरू कर दिया। तब उसे अच्छा खासा नशा होने लगा। कुछ दिन बाद इस नशे का वह आदी हो गया। उसने बताया कि वह एक स्ट्रिप गोली रोजाना खा लेता था। इससे 24 घंटे उसे नशा छाया रहता था। रंजीत चौराहे पर स्थित एक मेडिकल स्टोर से वह पांच रुपये में गोली का एक पत्ता खरीदता था। पुलिस की मानें तो गोली न खाने पर उसकी शरीर अकड़ जाती थी और दौरे पड़ने लगते थे।

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