कुपोषण यहां खतरनाक स्तर पर

Basti Updated Mon, 09 Jul 2012 12:00 PM IST
बस्ती। पहले कुपोषित बच्चों की संख्या में बड़ी वृद्धि देखी गई, अब अतिकुपोषित बच्चों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। सर्वे के बाद जो आंकड़ें आए हैं वह न सिर्फ चौंकाने वाले हैं बल्कि अब तक की सर्वे प्रक्रिया पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जून माह में कराए गए सर्वे ने अब तक के हुए सर्वेक्षणों पर सवालिया निशान लगा दिया है। विभाग की ओर से पिछले साल सर्वे में महज दो मासूमों को अतिकुपोषित बच्चों के रूप में चिह्नित किया गया है। मगर 2012 में जून माह के सर्वे में जो आंकड़े मिले उसने हर किसी को चौंका दिया। पहले तो कुपोषित बच्चों की संख्या में भारी इजाफा देखने को मिला, अब अतिकुपोषित बच्चों की संख्या ने भी सबको हैरत में डाल दिया है। जून की रिपोर्ट की मानें तो जिले में कुल 761 बच्चे अतिकुपोषित हैं। जबकि पिछले साल यह संख्या महज दो थी। एक साल के भीतर इसमें 759 की वृद्धि ने कई सवाल खड़े कर दिए। पहला तो यह कि अचानक इनकी संख्या में इतनी वृद्धि कैसे? दूसरा सवाल पहले की सर्वे प्रक्रिया को ही लेकर खड़ा हो रहा है।
कहां कितने अतिकुपोषित बच्चे
विक्रमजोत 329
परसरामपुर 187
सांऊघाट 139
बनकटी 35
गौर 23
रुधौली 20
कुदरहा 15
सदर 12
छह ब्लाकों में नहीं मिले अतिकुपोषित
राहत की बात है कि जिले के छह ब्लाकों में कोई भी बच्चा अतिकुपोषित नहीं मिला। इनमें कप्तानगंज, बहादुरपुर, हर्रैया, रामनगर, सल्टौआ और दुबौलिया शामिल हैं। इसके अलावा बस्ती शहर क्षेत्र में सर्वे के दौरान कोई अतिकुपोषित बच्चा नहीं मिला।
संख्या को लेकर हैरान नहीं: डीपीओ
बाल विकास परियोजना के डीपीओ अजय त्रिपाठी अतिकुपोषित बच्चों की बढ़ी संख्या के सवाल पर कहते हैं कि उन्हें इसे लेकर कोई हैरानी नहीं है। जब ठीक ढंग से सर्वे होगा तो सही स्थिति सामने आएगी ही। रही बात अतिकुपोषित बच्चों की संख्या में इजाफे की तो जिले की आबादी के हिसाब से यह अधिक नहीं है। विभाग के पास जो सुविधाएं है वह अतिकुपोषित बच्चों को उपलब्ध करा रहा है। इन बच्चों को चिकित्सीय सुविधाएं देने के लिए सीएमओ को भी लिखा जाता है।

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