समितियों से यूरिया गायब, किसान परेशान

Basti Updated Mon, 09 Jul 2012 12:00 PM IST
हर्रैया। बरसात होते ही किसानों के सामने एक बार फिर संकट खड़ा हो गया। समितियों पर खाद न होने से किसान निजी दुकानदारों के हाथों ठगे जा रहे हैं। मुंहमांगे दाम पर यूरिया को बाजार में खुलेआम बेचा जा रहा है। जानकारी होने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
गेहूं बुवाई के समय खाद का संकट झेल चुके किसान खरीफ फसलों के लिए चिंतित हैं। बरसात होते ही जहां गन्ना की फसलों में खाद की आवश्यकता पड़ गई, वहीं धान की रोपाई भी शुरू है। सरकारी समितियों पर खाद न होने से किसानों को खाद मजबूरन प्राइवेट दुकानदारों से उसे खरीदना पड़ रहा है। इसका फायदा उठाते हुए दुकानदार किसानों से निर्धारित मूल्य से अधिक दाम पर यूरिया बेच रहे हैं। किसान सुबास, विजय चौधरी, संतोष, पुनपुन चौधरी, रामऔतार चौधरी ने बताया कि प्राइवेट दुकानदार यूरिया 350 से 370 रुपये प्रतिबोरी बेच रहे हैं। महराजगंज कसबे एक दुकानदार से महंगी खाद के बाबत किसानों ने जब पूछा तो कहा कि सस्ती खाद सोसाइटी पर मिलेगी। जब हम महंगी खाद डीलर के यहां से पाएंगे तो उसे कम दाम पर कैसे बेचेंगे। वहीं इस संबंध में एडीओ पंचायत सहकारिता विजय कुमार गुप्ता का कहना है कि यूरिया की मांग की गई है। सरकार ने प्लेन बोरी खाद का मूल्य 301 रुपये और नीम कोटेड बोरी का मूल्य 311 रुपये निर्धारित किया है। इससे अधिक दाम लेना गलत है। कालाबाजारी रोकना हमारा काम नहीं है। कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि यूरिया निर्धारित मूल्य पर किसानों को दिलाए।

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