सूख गईं नहरें, मानसून का पता नहीं, अन्नदाता हैं परेशान

Basti Updated Wed, 04 Jul 2012 12:00 PM IST
बस्ती। मानसून का अब तक अता-पता नहीं है। नहरों में पानी भी नहीं है। सरकारी नलकूप खराब पड़े हैं। ऐसे में अन्नदाताओं के आगे गहरी समस्या खड़ी हो गई है। धान की पैदावार को लेकर किसान परेशान हैं। किसान टकटकी लगाए आसमान की ओर मानसून की लुकाछिपी का खेल बेबस आंखों से देख रहे हैं। उधर पशुपालकों के सामने चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। दुग्ध उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। मौसम विभाग का अनुमान भी गलत साबित हो रहा है।

107 में 85 नहरों में एक बूंद पानी नहीं!
मंडल में सबसे खराब स्थित नहरों की है। 107 नहरों में से मात्र 22 नहरों के टेल तक पानी होने की सूचना है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक बस्ती में 25 नहरें हैं, इनमें तीन नहरों में एक बूंद भी पानी नहीं है। सिद्धार्थनगर की स्थिति तो सबसे खराब है। यहां पर 71 नहरें हैं मगर, एक भी नहर में पानी नहीं है। इसी तरह संतकबीरनगर में 11 नहर है अभी तक एक भी नहर में पानी नहीं पहुंचा।

47 नलकूप महीनों से खराब
नलकूप विभाग की तैयारियों का भी बुरा हाल है। वैसे मंडल में कागजों में कुल 1269 सरकारी ट्यूबवेल स्थापित हैं। बस्ती में 548, सिद्धार्थनगर में 322 और संतकबीरनगर में 399 नलकूप शामिल हैं। अब जरा खराब नलकूपों पर नजर डालिए। कुल 47 नलकूप ऐसे हैं, जो विद्युत और यांत्रिक दोष के कारण महीनों से खराब चल रहे हैं। हालांकि खराब होने का आंकड़ा सरकारी आंकड़ों से कई गुना अधिक है।

15 फीसदी तक होगा खरीफ फसलों का नुकसान
जेडीए अशोक कुमार कहते हैं कि लेट से मानसून आने के कारण लगभग 10 से 15 फीसदी का असर खरीफ की फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा। बताया कि 10 दिन लेट से धान की नर्सरी होने से उसका फायदा अब किसानों को मिलेगा। कहा कि किसानों को चाहिए कि वे नर्सरी को सहेज कर रखें। किसान यूरिया न डालें और जिसके पास जो भी साधन हो धान की रोपाई कर दें। एक महीने से ऊपर की जो नर्सरी है, उसके ऊपर के हिस्से को काटकर नर्सरी करें। एसआरआई विधि से धान की रोपाई की जा सकती है।

अन्नदाता लेट प्रजाति की बुवाई करें
अन्नदाता लेट प्रजाति के धान की बुआई कर सकते हैं। जेडीए ने बताया कि नरेंद्र-97, नरेेंद्र-118, नरेंद्र-80, साकेत-4 व पंत-12 उपयुक्त है। ये प्रजातियां 100 दिन की हैं। किसान अगर इनकी नर्सरी डालना चाहें तो ठीक है नहीं तो सीधे बुआई कर सकते हैं। 10 अगस्त तक बुआई की जा सकती है। धान की रोपाई करते समय पौधों की संख्या बढ़ा दें। यूरिया और जिंक सल्फेट का प्रयोग अवश्य करें।

सूखे से निपटने की तैयारियों में जुटे हैं अफसर : कमिश्नर
कमिश्नर एसके वर्मा कहते हैं कि पूरा प्रदेश मानसून के समय से न आने को लेकर प्रभावित है। मगर मंडल में अन्य की अपेक्षा बारिश का प्रतिशत अच्छा रहा है। बताया कि पहली जुलाई तक बस्ती में 119.09 मिमी. वर्षा के सापेक्ष 31.2 यानी 26 फीसदी वर्षा हुई है। वहीं सिद्धार्थनगर में 54 व संतकबीरनगर में 52.9 फीसदी वर्षा हो चुकी है। जबकि अन्य नौ जिलों में शून्य फीसदी बारिश हुई है। इनमें 40 जिले ऐसे हैं, जहां पर 0.2 से 20 एमएम तक बारिश हुई है। वर्षा होने में प्रदेश में संतकबीरनगर का चौथा, सिद्धार्थनगर का सातवां व बस्ती का 16वां स्थान है। बताया नेपाल से सटे और समीपवर्ती जिलों का मौसम अन्य जनपदों से ठीक रहा है। बताया कि समस्त डीएम से नहरों में पानी पहुंचाने, विद्युत और यांत्रिक दोष से खराब पड़े नलकूपों को ठीक कराने के निर्देश दिए गए हैं। बिजली, नलकूप और कृषि विभाग के अफसरों को भी सूखे की स्थित से निपटने और तैयारी करने को कहा गया है।

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