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अयोध्या प्रकरणः कल्याण सिंह बतौर आरोपी 27 को अदालत में तलब, विशेष न्यायाधीश ने दिया आदेश

अयोध्या प्रकरण के विशेष न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री व राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह को बतौर आरोपी तलब किया है।

22 सितंबर 2019

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बरेली

रविवार, 22 सितंबर 2019

बीडीए का जागा भक्ति भाव, नाथ नगरी के मंदिरों में मिलेगी पंचवाटिका की छांव

बरेली। बीडीए ने नाथनगरी के पौराणिक मंदिरों के सौंदर्यीकरण और उन्हें स्वच्छ बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत इन मंदिरों में नक्षत्र और पंचवाटिका तैयार कराने के साथ धोपेश्वरनाथ मंदिर में सरोवर को साफ करने के लिए संयत्र भी लगाया जाएगा। मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले फूलों से खाद तैयार होगी। बीडीए ने इसके लिए मशीनें उपलब्ध कराने वाली कुछ कंपनियों से भी संपर्क किया है। बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल ने बताया कि बीडीए की इस परियोजना का मकसद पर्यावरण संरक्षण है और इसे दो से तीन महीने में पूरा कर लिया जाएगा।
बीडीए सभागार में पत्रकारों से रूबरू बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल ने बताया कि अलखनाथ मंदिर में पंचवाटिका तैयार होगी। इसमें आंवला, बरगद, पीपल, बेल सहित दूसरे औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। तपेश्वरनाथ मंदिर में राशि वन और बनखंडीनाथ मंदिर में सप्तर्षि वन तैयार किया जाएगा। इसमें तुलसी, अगस्त्य, चिड़चिड़ा, दूब, बेल, शमी और धतूरा पौधे लगाए जाएंगे। धोपश्वर नाथ मंदिर में नवग्रह वाटिका तैयार होगी। बीडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने पर्यटन विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ इन मंदिरों का दौरा किया था। इस दौरान पाया कि कई मंदिरों के सरोवर दूषित हैं जिस वजह से श्रद्धालुओं को असुविधा होती है। इसे देखते हुए धोपेश्वरनाथ मंदिर के सरोवर को स्वच्छ बनाने के लिए संयत्र लगाया जाएगा। मंदिरों के प्राचीन कुओं को भी पुनर्जीवित किया जाएगा। बीडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि प्रत्येक नाथ मंदिर में चढ़ाए जाने वाले फूलों से भी खाद तैयार होगी ताकि मंदिरों में गंदगी के साथ खाद की दिक्कत भी दूर हो सके। मंदिरों में सोलर लाइटें भी लगाई जाएंगी।
गोशालाओं के गोबर से बनेगी लकड़ी
पर्यावरण संरक्षण के लिए हवन और अंत्येष्टि आदि में लकड़ी का उपयोग कम करने के लिए बीडीए ने शहर के पौराणिक मंदिरों में गोबर से लकड़ी तैयार करने की योजना बनाई है। बीडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि इसके लिए एक कंपनी से बात हो गई है, जो मंदिरों को 60 हजार रुपये में मशीन उपलब्ध कराए। इसे हाथ या मोटर दोनों से चलाया जा सकता है। मंदिरों की गोशालाओं से बड़ी मात्रा में गोबर भी आसानी से मिल जाएगा।
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डिलीवरी के बाद महिला की मौत पर अस्पताल में तोड़फोड़, हंगामा

बरेली। डिलीवरी के लिए भर्ती कराई गई महिला की ऑपरेशन के दौरान मौत होने के बाद तीमारदारों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। शव ले जाते वक्त तीमारदारों ने सड़क पर पड़े पत्थर फेंककर अस्पताल में तोड़फोड़ कर दी। स्टाफ ने विरोध किया तो उनसे भी मारपीट हुई। मौके पर पहुंची पुलिस ने तीमारदारों ने लाठी फटकार कर खदेड़ा। बच्चे को एक अन्य निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। तीमारदारों की शिकायत पर डॉक्टर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
सुभाषनगर की बग्गा कालोनी निवासी फतेह बहादुर टेलर हैं। उन्होंने अपने पत्नी 22 वर्षीय फूलवती को शुक्रवार शाम डिलीवरी के लिए बदायूं रोड स्थित स्वास्ति अस्पताल में भर्ती कराया था। फतेह बहादुर ने बताया कि डॉ. प्रीति वैश्य ने शनिवार को ऑपरेशन की बात कहकर पत्नी को भर्ती कर लिया। उनके मुताबिक शनिवार शाम फूलवती का ऑपरेशन किया गया। डिलीवरी के कुछ देर बाद महिला की मौत हो गई थी। सूचना मिलते ही परिजन अस्पताल में हंगामा करने लगे। स्टाफ ने तुरंत इसकी सूचना पर पुलिस को दी। तीमारदारों में शामिल एक महिला लापरवाही का आरोप लगाते हुए सड़क से पत्थर उठाकर अस्पताल की विंडो में दे मारा। शीशा टूटने के बाद अस्पताल में तोड़फोड़ शुरू हो गई। स्टाफ भी अपनी जान बचाकर भागने लगा। मौके पर पहुंची पुलिस ने तीमारदारों को समझाकर शांत किया। न माने तो लाठियां फटकारकर हुड़दंगियों को खदेड़ा। पुलिस की निगरानी में नवजात को स्टेशन रोड स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया और महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। फतेह बहादुर ने डॉ. प्रीति वैश्य, डॉ. अजय वैश्य व अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सुभाष नगर थाने में रिपोर्ट कराई है।
डॉक्टर ने मारपीट और तोड़फोड़ के आरोप लगाए
- डॉ. प्रीति वैश्य ने भी सुभाषनगर थाने में मृतक महिला के पति व तीमारदारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि सबकुछ ठीक था। अचानक महिला को हार्टअटैक जैसी स्थिति से मौत हो गई। इसके बाद तीमारदारों ने उनके अस्पताल में तोड़फोड़ की। विरोध करने पर स्टाफ से भी मारपीट की। उन्होंने अपने ऊपर लगे लापरवाही के भी आरोपों को गलत बताया।
इसी अस्पताल में बच्चे की मौत के बाद तीमारदारों ने किया हंगामा
बरेली। स्वास्ति अस्पताल में जब डिलीवरी के दौरान महिला की मौत पर हंगामा चल रहा था, तभी यहां भर्ती एक अन्य परिवार भी हंगामा करने लगा। परिवार के मुताबिक दो दिन पहले हुई डिलीवरी के बाद बच्चे की इलाज के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही से मौत हो गई। परिवार की शिकायत पर सुभाषनगर थाने में इनकी भी रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
सुभाषनगर के गांव रौंधी मिलक निवासी विष्णू कुमार अपनी गर्भवती पत्नी ऊषा देवी को बृहस्पतिवार को स्वास्ति अस्पताल में भर्ती कराया था। उनके मुताबिक अल्ट्रासाउंड के बाद डॉ. प्रीति वैश्य ने पत्नी के पेट में पल रहे बच्चे को मृत घोषित कर दिया था। तीमारदारों के मुताबिक बृहस्पतिवार को ही हुए ऑपरेशन में बच्चा जिंदा पैदा हुआ। दो दिन इलाज के बाद डॉक्टरों की लापरवाही के कारण शनिवार शाम बच्चे की मौत हो गई। हालांकि डॉ. प्रीति वैश्य ने बताया कि डिलीवरी प्रीमेच्योर हुई थी। परिवार को सात माह गर्भ के बच्चे की हालत के बारे में बता दिया गया था। उन्हें बच्चे को कहीं और दिखाने को भी कहा गया था। परिवार बच्चे को वहीं रखे रहा। इलाज न मिल पाने के कारण उसकी मौत हो गई।
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बिजली विभाग में दिखा ऊर्जा मंत्री की सख्ती का असर, चीफ इंजीनियर ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में अफसर कसे

बरेली। ऊर्जा मंत्री की सख्ती का बिजली विभाग में असर दिखने लगा है। चीफ इंजीनियर ने बरेली के सभी अफसरों की संयुक्त कार्यशाला में साफ कहा कि उपभोक्ता और विभाग हित पहले होना चाहिए। बार-बार फाल्ट और शट डाउन बर्दाश्त नहीं होंगे। कामकाज में सुधार नहीं लाने वाले अफसर और अधीनस्थ को दंडित करने की चेतावनी दी। कहा, काम में टालमटोल, नए कनेक्शन देने में मनमानी और बिल सुधार संबंधी शिकायतें मिलने पर जिम्मेदार नपेंगे।
शनिवार सुबह से शाम तक चीफ इंजीनियर तारिक मतीन ने विभागीय सभागार में अधीक्षण और अधिशासी अभियंता, एसडीओ और जेई के साथ बैठक की। इसमें बिंदुवार प्रशिक्षण देते हुए ऊर्जामंत्री के निर्देश और उनकी मंशा से अवगत कराया। चीफ बोले, हर दस मिनट में शट डाउन, फाल्ट नहीं होना चाहिए। उपकेंद्रों पर लॉगबुक अपडेट रहे। आचरण, व्यवहार और सही भाव से कार्य किया जाए। कहा, समाज सेवा और नौकरी बिजली विभाग में ही संभव है, इसलिए लोगों को दौड़ाया नहीं जाए। उपभोक्ता सेवा सही तो हमारा विभाग भी सही है। निर्देश दिए कि अधीक्षण अभियंता ग्रुप में सभी एसडीओ और जेई एक घंटे से अधिक वाले फाल्ट और कटौती की जानकारी जरूर दें। राजस्व वसूली, बिल सुधार और नए कनेक्शन प्राथमिकता से किए जाएं, अन्यथा कड़ी कार्रवाई होगी।
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पांच भूमाफिया को नोटिस, देना होगा अकूत संपत्ति का हिसाब

बरेली। भूमाफिया बताई गईं पांच हस्तियां शासन के आदेश पर शुरू हुई जांच में घिर गई हैं। इनके खिलाफ नाजायज तरीकों से अकूत संपत्ति के साथ करोड़ों रुपये की काली कमाई करने का मामला ऊपर तक पहुंचा था जिसके बाद मुख्यमंत्री के स्तर से इस मामले में जांच कराने के निर्देश दिए गए थे। शासन से इस बारे में आदेश आने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू करते हुए पांचों लोगों से अपनी चल-अचल संपत्ति का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा है। सदर तहसीलदार आशुतोष गुप्ता ने पांचों बिल्डरों को नोटिस जारी किया है।
शासन स्तर से डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को इस संबंध में जो आदेश जारी किया गया है, उसके मुताबिक इन भूमाफिया के ठिकाने साहूकारा, सिविल लाइंस, आईवीआरआई रोड आदि प्रमुख इलाकों में हैं। इन भूमाफिया में से एक पहले सिनेमा कारोबार से जुड़ा रहा है तो एक ने बीसलपुर रोड पर शहर की बड़ी कॉलोनी डेवलप की है। एक अन्य भूमाफिया का भी कॉलोनाइजिंग से ताल्लुक है और उसने भी शहर में कई कॉलोनियां डेवलप की हैं। शासन से आए आदेश में इन पांचों के नाम भी दिए गए हैं। दरअसल शासन को मिले फीडबैक के मुताबिक इन पांचों भू्माफिया ने अवैध तौर से काली कमाई करने के साथ बेइंतहा प्रॉपर्टी जुटाई है।
बताया जाता है कि शासन में इन भूमाफिया के खिलाफ पहले से फीडबैक था लेकिन फिर उच्च पदों पर बैठे अफसरों की ओर से इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया। हाल ही में एक शिकायत के जरिये यह मामला सीएम की जानकारी में आया तो शासन को कड़े निर्देश जारी किए गए जिसके बाद जांच का आदेश डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को भेजा गया। अब एसडीएम सदर अमरेश कुमार ने तहसीलदार सदर आशुतोष गुप्ता से इस मामले में जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। तहसीलदार ने जांच शुरू करते हुए पांचों भूमाफिया को नोटिस जारी कर उन्हें अपनी भूमि और संपत्तियों का ब्योरा एक सप्ताह के अंदर देने को कहा है। बताया जाता है कि इन भूमाफिया के खिलाफ अकूत संपत्तियों और काली कमाई की शिकायत सपा सरकार में भी हुुई थी लेकिन तब इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
शासन के आदेश पर मैंने संबंधित बिल्डरों को नोटिस जारी कर दिया है। उनसे उनकी संपत्ति का ब्योरा मांगा गया है। उन्हें यह चेतावनी भी दी गई है कि रिकार्ड न देने पर शासन को एक पक्षीय रिपोर्ट भेज दी जाएगी। -आशुतोष गुप्ता, तहसीलदार सदर/ जांच अधिकारी
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जेल में बीस बंदियों के साथ स्वामी ने गुजारी रात

शाहजहांपुर। मखमली गद्दों पर सोने वाले दुष्कर्म के आरोपी स्वामी चिन्मयानंद की जेल में पहली रात मुश्किलों से कटी। बैरक में कंबल, चादर, दरी के साथ लेेटे स्वामी रात भर करवटें बदलते रहे। शनिवार तड़के 3:30 बजे वह जाग गए। सुबह कुछ देर बैरक में टहले। इसके बाद ध्यान में बैठ गए। दूसरे दिन उनसे मिलने जेल में कोई नहीं पहुंचा। खास यह कि भक्तों से घिरे रहने वाले स्वामी ने रात अब बंदियों के साथ गुजरेगी। उनकी बैरक में बीस बंदी हैं।
शनिवार को सुबह पांच बजे बंदियों के लिए बैरक खोली गई तो चिन्मयानंद भी सामान्य बंदियों की तरह फ्रेश हुए और फिर सुबह सात बजे सभी के साथ उन्हें भी नाश्ते में दलिया, चाय, गुड़ दिया गया। सुबह 11:30 बजे स्वामी ने जेल का बना हुआ खाना खाया। उन्हें जेल मीनू के हिसाब से अरहर की दाल, आलू की सब्जी और रोटियां दी गईं। उन्हें जिस बैरक में रखा गया हैं, उनमें बीस बंदी और रखे गए हैं। शाम को उनका मेडिकल चेकअप हुआ, जिसमें ब्लड प्रेशर, शुगर आदि नार्मल था। चेकअप करने मेडिकल कॉलेज के डॉ. केसी वर्मा, डॉ. एमएल अग्रवाल ने उन्हें पुरानी बीमारियों की वजह से नियमित रूप से दवा लेने की सलाह दी। इससे पहले शुक्रवार को जेल भेजे जाने के बाद उनसे मिलने के लिए उनके वकील ओम सिंह व पूजा पहुंचीं थीं।
विश्वविद्यालय ने छात्रा को प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय को निर्देश दिए थे कि पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर दुष्कर्म के आरोप लगाने वाली एलएलएम की छात्रा की पढ़ाई के लिए दूसरे लॉ कॉलेज में एडमिशन दिलाया जाए, लेकिन अब तक छात्रा ने एडमिशन के लिए कोई कार्यवाही नहीं की है। इस पर विश्वविद्यालय ने छात्रा को पत्र लिखकर एडमिशन प्रक्रिया पूरी कराने को कहा है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा था कि पीड़ित एलएलएम की छात्रा और उसके भाई का भविष्य महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने इस मामले में रुहेलखंड विश्वविद्यालय को निर्देश दिए थे कि छात्रा की मर्जी के मुताबिक रुहेलखंड विश्वविद्यालय उसकी और उसके भाई की पढ़ाई का इंतजाम कराए। मगर छात्रा या उसके भाई ने दूसरे कॉलेज में एडमिशन के लिए विश्वविद्यालय में अब तक आवेदन नहीं किया है। इससे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हो पाया है। अब विश्वविद्यालय ने छात्रा को पत्र लिखकर एडमिशन प्रक्रिया पूरी कराने को लिखा गया है।
‘विश्वविद्यालय छात्रा को उसकी मर्जी के मुताबिक कॉलेज में एडमिशन दिलाने को तैयार है, लेकिन अभी तक छात्रा ने आवेदन नहीं किया है। हम छात्रा के आवेदन का इंतजार कर रहे हैं।
- प्रो. अनिल शुक्ल, कुलपति
 चिन्यमयानंद की करतूत से संत समाज में रोष है। हरिद्वार के संतों ने उन्हें अपने समाज से बहिष्कृत कर दिया। तपोनिधि आनंद अखाड़ा के राष्ट्रीय सचिव और बरेली स्थिति अलखनाथ मंदिर के महंत कालू गिरी ने भी उन्हें गलत बताया। कहा कि सृष्टि का यही नियम है, जो जैसा करेगा वैसा भरेगा। अपने कर्मों का फल मनुष्य हों या साधु संत सभी को भुगतना ही पड़ता है। स्वामी चिन्मयानंद ने गलत काम किया है। इसकी उन्हें सजा मिली है। ऐसे साधु संतों के साथ हम नहीं हैं।
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स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट: सपनों के शहर पर पार्षदों के सवालों का ग्रहण

बरेली। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शनिवार को रुहेलखंड विश्वविद्यालय के सभागार में हुए पहले सेमिनार में ही पार्षदों के ताबड़तोड़ सवालों ने अफसरों को असहज कर दिया। शहर की व्यस्ततम सड़कों और पिछड़े इलाकों की अनदेखी कर इस प्रोजेक्ट में पहले से विकसित इलाकों को शामिल करने और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पीपीपी मोड में दे दिए जाने जैसे मुद्दों पर न नगर आयुक्त कोई सीधा जवाब दे पाए न स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अर्बन प्लानर। मेयर उमेश गौतम ने जैसे-तैसे पार्षदों को शांत किया। अर्बन प्लानर निशांत गोयल की ओर से बताया गया कि शहर में विभिन्न चरणों में एक हजार करोड़ की धनराशि से 36 प्रोजेक्ट पर काम होगा। 11 दूसरे प्रोजेक्ट पर पीपीपी मोड पर काम होगा।
अर्बन प्लानर निशांत गोयल ने सेमिनार में शहर के विकास का खाका प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस प्रोजेक्ट में स्वच्छ हवा, स्वास्थ्य, बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर समेत सभी प्रमुख बिंदुओं पर काम होगा। अभी जिस क्षेत्र को विकास के लिए चुना गया है, वह कुतुबखाना मोती पार्क से शुरू होकर बरेली जंक्शन, अक्षर विहार तालाब, सेटेलाइट तक है। इसके बाद दूसरे इलाके चुने जाएंगे। इस प्रेजेंटेशन के बाद सवाल-जवाब और सुझावों का दौर शुरू हुआ तो पार्षद सतीश कातिब ने आपत्ति की कि जब डेलापीर चौराहे का नाम अभिनंदन चौक हो गया है तो प्रोजेक्ट में उसका नाम क्यों नहीं बदला गया है। अब्दुल कयूम मुन्ना ने शहर का छोटा हिस्सा प्रोजेक्ट में शामिल करने पर सवाल उठाया। शालिनी जौहरी ने पटेल चौक से डेलापीर तक व्यस्ततम सड़कों के लिए प्रोजेक्ट न बनाने का कारण पूछा। विकास शर्मा ने कहा कि पहले से विकसित इलाकों को प्रोजेक्ट में महत्व देने की वजह जाननी चाही। अहम प्रोजेक्ट पीपीपी मोड पर देने पर भी आपत्ति की। पार्षद सुखदीश कश्यप ने औद्योगिक क्षेत्र को शामिल करने की मांग की। बंटी शर्मा ने सबसे सहयोग की अपील की। पार्षदों के सवालों पर नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अर्बन प्लानर निशांत गोयल जवाब देते रहे लेकिन कई सवालों ने उन्हें असहज कर दिया। रंगकर्मी जेसी पालीवाल ने संजय कम्युनिटी हॉल को बेहतर करने और डॉ. मनु नीरज ने जरी कारोबारियों की स्थिति पर ध्यान देने की बात कही।
पार्षदों को मेयर की नसीहत- स्वार्थी नहीं सारथी बनें
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए मेयर उमेश गौतम ने आलोचकों को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि उनके मेयर बनने के डेढ़ महीने बाद स्मार्ट सिटी का तोहफा मिला था। साल भर के बाद अब प्रोजेक्ट कागजों से धरातल पर उतरने जा रहे हैं। यह स्मार्ट सिटी की पहली वर्कशॉप है और पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसमें कुछ इलाकों को चयनित किया गया है। ऐसे मौके पर सभी को सारथी बनने की जरूरत है, अपने-अपने क्षेत्र का नाम लेकर स्वार्थी न बनें। कार्यक्रम को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल, नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार ने भी संबोधित किया। भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर, महानगर अध्यक्ष डॉ. केएम अरोरा, वीसी बीडीए दिव्या मित्तल, सीईओ कैंट बोर्ड अनुपमा तलवाड़ मंच पर मौजूद रहीं। अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
प्रो. जैतली ने पूछा- ऐसे कैसे सुंदर होगा शहर
विश्वविद्यालय के प्रो. एके जैतली ने कहा कि कूड़ा निस्तारण पर विश्वविद्यालय ने काम किया है लेकिन नगर निगम ने कभी सलाह तक नहीं ली। बोले- आप लोगों का फोकस सौंदर्यीकरण पर है लेकिन सड़कों की चौड़ाई कम है, ऐसे में आपके प्रोजेक्ट कैसे पूरे होंगे। पाथ वे पर दिव्यांगों के लिए व्यवस्था होने और जबलपुर की तर्ज पर ई-साइकिल चलाने की बात की। इस पर मेयर उमेश गौतम ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था लागू कर नजीर पेश करे ताकि उसे दूसरी कालोनियों में लागू किया जा सके।
बार-बार उठाने पर गुस्साए पार्षद
मंच से बार-बार अपनी जगह बैठने की उद्घोषणा पर पार्षद विकास शर्मा गुस्से में आ गए और विरोध करके उठाकर जाने लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि अभी अधिकारी के नाम पर कभी किसी अन्य वजह से उठने की बात कहकर अपमानित किया जा रहा है। नगर आयुक्त ने पहुंचकर शांत कराया। इस दौरान नगर आयुक्त का गनर बीच में आया तो वह उससे भी गुस्सा होने लगे।
स्मार्ट सिटी के लिए चुनी गईं परियोजनाएं
हैंडीक्राफ्ट सेंटर : 211 करोड़ से जिला उद्योग केंद्र के पास बनेगा और यहां बरेली के जरी-जरदोजी, फर्नीचर उद्योग के उत्थान के लिए ट्रेनिंग सेंटर, प्रदर्शन और बिक्री का इंतजाम होगा।
सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट : 170 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में कामर्शियल और सरकारी ऑफिस के लिए स्पेस होगा। पार्किंग की व्यवस्था होगी।
कामर्शियल कॉम्प्लेक्स : संजय कम्युनिटी हॉल, तालाब और एलन क्लब को मिलाकर बनेगा। यहां मनोरंजन, खानपान, घूमने और ऑडिटोरियम होगा।
चौराहों का विकास और पैदल पुल : डेलापीर, चौकी चौराहा, पटेल चौक और गांधी उद्यान समेत छह चौराहों पर रोटरी और सौंदर्यीकरण होगा। जिला अस्पताल और गांधी उद्यान पर दो पैदल पुल भी बनेंगे।
सॉलिड वेस्ट : 50 करोड़ की लागत से चार कूड़ा कलेक्शन सेंटर बनेंगे और बाकरगंज के कूड़े निस्तारण होगा।
स्टेडियम : स्पोर्ट्स स्टेडियम में ही मिनी स्टेडियम बनेगा और वहां स्वीमिंग पूल, बैडमिंटन कोर्ट का नवीनीकरण होगा।
मल्टीलेवल पार्किंग : एलन क्लब, मोती पार्क, संजय कम्युनिटी हॉल समेत चार जगह होगी।
कमांड एंड कंट्रोल सेंटर : ट्रैफिक, सीसीटीवी से निगरानी समेत अन्य कार्यों के लिए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनेगा।
स्वास्थ्य : शहर में स्वास्थ्य जांच के लिए 16 स्थानों पर हेल्थ एटीएम। महिलाओं के लिए टॉयलेट में सेनेटरी पैड, फीडिंग कॉर्नर होगा।
नाथ नगरी सर्किट : नाथ नगरी के सारे मंदिर सड़क मार्ग से जोड़े जाएंगे।
सोलर : सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सोलर ट्री और सरकारी विभागों की छत पर सोलर पैनल।
एसटीपी : शहर में चार दिशाओं में चार एसटीपी प्लांट।
कैटल पार्क : डेयरी शहर से बाहर करने और जानवरों की बेहतर देखभाल के लिए।
स्मार्ट क्लास एवं ओपन जिम : नौ स्कूलों में 30 स्मार्ट क्लास, दर्जन भर पार्कों में ओपन जिम।
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अनुमान से आधे बजट में ही बन जाएगी अस्थायी सड़क

बरेली। लालफाटक पर 320 मीटर लंबी अस्थायी रोड बनाने के लिए पहले जितना अनुमान था, उसके मुकाबले आधे बजट से ही काम चल जाएगा। सेतु निगम और पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने शनिवार को डीपीआर तैयार की है, उसके मुताबिक अस्थायी रोड को बनाने में 1.20 करोड़ रुपये ही खर्च आाएगा जबकि पहले यह खर्च करीब ढाई करोड़ रुपये आंका गया था। डीपीआर को शासन को भी भेज दिया गया है। अधिकारियों का कहना कि स्वीकृति मिलने के साथ निर्माण शुरू हो जाएगा।
लालफाटक पर ओवरब्रिज का काम शुरू करने के लिए रेलवे एक सितंबर से रोड को बंद करने तैयारी में था लेकिन जिला प्रशासन के आग्रह के बाद एक माह तक मोहलत दी गई है। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार और कमिश्नर रणवीर प्रसाद की सर्किट हाउस में बैठक के बाद से रेलवे, पीडब्ल्यूडी और सेतु निगम के सहयोग से अस्थायी रोड बनाने के लिए कई दिनों की मशक्कत के बाद शनिवार को आखिर नक्शा फाइनल हो गया है। यह अस्थायी रोड फाटक के पास करीब 30 मीटर की दूरी पर 320 मीटर लंबी और 7.50 मीटर चौड़ी होगी। इस पर डिवाइडर भी होगा। पहले इस अस्थायी रोड बनाने का खर्च करीब ढाई करोड़ रुपये आंका गया था लेकिन शनिवार को फाइनल डीपीआर में इस रोड को बनाने में 1.20 करोड़ के खर्च को शामिल किया है। कई दिनों से सेतु निगम के इंजीनियर प्रस्तावित नक्शे की कॉपी लेकर पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड भवन के एक्सईएन वीएम शर्मा के पास पहुंचकर माथापच्ची कर रहे थे, लेकिन बार-बार खामियां निकलने से इस प्रस्ताव को शासन को भेजने में देरी हो रही थी। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि स्वीकृति के लिए नक्शे को शासन में भेज दिया गया है। बजट पास होते ही निर्माण शुरू करा दिया जाएगा।
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मंत्री जी नहीं आए तो पब्लिक ने खुद दौड़ा लिया अंडरपास

बरेली। आईवीआरआई अंडरपास का विधिवत उद्घाटन करने तो मंत्री जी नहीं आए, निर्माण भी पूरा नहीं हुआ लेकिन इस बीच पब्लिक ने खुद ही इस अंडरपास का इस्तेमाल शुरू कर दिया। शनिवार को इस अंडरपास पर जमकर ट्रैफिक गुजरता नजर आया। रेलवे अस्पताल की ओर अंडरपास के दोनों सिरों पर बतौर बैरियर रखे गए खंभे भी नजर नहीं आए। हालांकि रेलवे ने सफाई दी कि अंडरपास का उद्घाटन नहीं हुआ है और उसके शुरू होने की भी उसके पास कोई सूचना नहीं है।
आईवीआरआई अंडरपास का उद्घाटन पहले 21 सितंबर को करने का दावा किया गया था लेकिन इसकी कोई सूचना अधिकारियों के पास नहीं आई। अंडरपास के लिए अभी फाइबर शेड, नाली निर्माण सहित कई काम होने बाकी है। साथ ही अंडरपास को जोड़ने वाली खराब एप्रोच रोड को भी ठीक नहीं कराया जा सका है। कमिश्नर रणवीर प्रसाद के निर्देश पर रेलवे के अधिकारियों ने अंडरपास का काम शुरू कराया था ताकि पब्लिक को आने-जाने में कोई परेशानी न हो। अंडरपास शुरू करने के लिए कई बार अधिकारी कई बार तारीख तय कर चुके हैं लेकिन निर्माण पूरा न होने के कारण इसके उद्घाटन में लगातार देरी हो रही थी। हाल में केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के 21 दिसंबर ने इसका उद्घाटन करने की जानकारी दी गई थी लेकिन अंडरपास और एप्रोच रोड का काम पूरा न होने की वजह से इसे टाल दिया गया। अंडरपास पर जलभराव की दिक्कत भी पैदा हो रही है। इसके लिए नाली का निर्माण कराया जा रहा है। दूसरी ओर रेलवे स्टेशन की तरफ निर्माणाधीन 320 मीटर लंबे अंडरपास का अभी काफी काम बाकी है। रेलवे अस्पताल की तरफ बने अंडरपास के दोनों सिरों पर लोहे के खंभे रखकर बैरियर लगा दिया गया था लेकिन शनिवार को ये अंडरपास से खंभे हट गए और वहां से पब्लिक का गुजरना भी शुरू हो गया है।
बिना उद्घाटन के अंडरपास चालू नहीं होगा। निर्धारित तिथि के बाद ही इस पर आवागमन शुरू कराया जाएगा। -राजेंद्र सिंह, पीआरओ, रेलवे
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साहब मांगेंगे पांच महीने का हिसाब तो क्या देंगे जवाब

बरेली। पांच महीने बाद कमिश्नर रणवीर प्रसाद फिर कलक्ट्रेट के राजस्व अभिलेखागार का दौरा करने वाले हैं और इससे स्टाफ में खलबली मची हुई है। दरअसल पिछले दौरे के वक्त कमिश्नर ने यहां रखे पुराने और कटे-फटे रिकॉर्ड को सहेजने के लिए उसकी जिल्दबंदी कराने का निर्देश दिया था लेकिन स्टाफ ने उस पर ध्यान नहीं दिया। अब दोबारा उनके निरीक्षण का कार्यक्रम तय होने के बाद ठेका देकर इस रिकॉर्ड की जिल्दबंदी कराने की तैयारी की जा रही है। सहायक भू-लेखाधिकारी को इसके लिए बजट का प्रस्ताव भी भेज दिया गया है।
राजस्व अभिलेखागार में चकबंदी विभाग के रिकार्डों की हालत काफी खराब है। काफी समय से रिकार्डों के बस्ते और उनकी जिल्दों को दुरुस्त न कराए जाने से महत्वपूर्ण अभिलेखों के नष्ट होने की आशंका बनी हुई है। पुराने रिकार्डों के पन्ने फट जाने से चकबंदी की जमीनों का ब्योरा देखने में भी अक्सर दिक्कत होती है। अब कमिश्नर का दौरा तय होने के बाद जिल्दों की बाइंडिंग और बस्तों को बदलने का काम ठेके पर देने की तैयारी चल रही है। राजस्व अभिलेखागार के प्रभारी अधिकारी ने इस संबंध में कलक्ट्रेट के सहायक भू-लेखाधिकारी को चिट्ठी भेजी है। इसमें बताया गया है कि जीर्णशीर्ण बस्ते बदलने के लिए उत्तर प्रदेश हथकरघा निगम लिमिटेड कानपुर कुटेशन मय जीएसटी के 76 रुपये प्रति बस्ता निर्धारित की गई है। साथ ही पटवारी फंड में जिन 1121 खस्ताहाल चकबंदी की जिल्दों की बाइंडिंग की जानी है, उनका कुटेशन भी जीएसटी सहित 148 रुपये निर्धारित किया गया है। रिकार्ड रूम प्रभारी ने यह काम शीघ्र शुरू कराने के लिए सहायक भू-लेखाधिकारी से बजट उपलब्ध कराने को कहा है।
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फाइक एन्क्लेव के हिबा हत्याकांड में दोषी को उम्रकैद

बरेली। बारह साल पहले फाइक एन्क्लेव में हुए हिबा हत्याकांड में दोषी पाए गए आरोपी ताजुद्दीन को विशेष न्यायाधीश मोहम्मद अहमद खां ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
20 जून 07 को फाइक एन्क्लेव में रहने वाली एएनएम शगुफ्ता तबस्सुम की बेटी हिबा जैनब रिजवी की हत्या कर दी गई थी। 21 जून को दर्ज कराई रिपोर्ट में शगुफ्ता ने कहा था कि फरीदपुर के मोहल्ला मिरधान का रहने वाला ताजुद्दीन उसके घर आता-जाता था। चूंकि शगुफ्ता अपनी बेटी के साथ अकेली रहती थीं, इसलिए उसने ताजुद्दीन के आने पर ऐतराज जताया। इस पर आरोपी मां बेटी दोनों को धमकाने लगा।
शगुफ्ता ने बताया कि घटना वाले दिन जब वह ड्यूटी पर जा रही थीं तो ताजुद्दीन उसके पीछे सेटेलाइट बस स्टैंड तक आया। वो भगवंतपुर जाने के लिए थ्री व्हीलर में बैठी तो भी आरोपी आसपास ही मंडरा रहा था। ड्यूटी के बाद जब वो घर पहुंची तो बेटी हिबा की लाश मिली। मोहल्ले के लोगों का कहना था कि ताजुद्दीन को बाइक से जाते देखा गया है। अभियोजन की ओर से सरकारी वकील अखिलेश सक्सेना और जावेद अली खां ने पक्ष रखा। कोर्ट ने अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए ताजुद्दीन को उम्रकैद की सजा सुनाई और उसे पैंतीस हजार का जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की राशि में से बीस हजार रुपये पीड़िता को देने का आदेश दिया।
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मोबाइल लैब जांच में पिस्ता में कलर, दूध भी अशुद्ध मिला

बरेली। खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग ने बरेली जिले में तीन दिन के लिए मोबाइल लैब उपलब्ध कराई है। पहले दिन नवाबगंज और रिठौरा में लोगों ने खाद्य पदार्थ चेक कराए। लैब में बर्फी का एक नमूना पहुंचा, जांच करने पर पता चला कि उस पर लगे पिस्ता में कलर मिला हुआ है।
पहले दिन एफएसडीए मोबाइल लैब से 20 लोग दूध और खाद्य पदार्थ आदि चेक कराने पहुंचे। दो नमूना दूध में अशुद्धता पाई गई। बर्फी पर लगे पिस्ता में हरा अखाद्य रंग पाया गया। इस मौके पर खाद्य अधिकारियाें ने उपभोक्ताओं से कहा कि वे खाद्य पदार्थ प्रयोग करने में सतर्कता बरतें। जिला अभिहित अधिकारी धर्मराज मिश्रा ने बताया कि रविवार सुबह से दस बजे फतेहगंज पश्चिमी और दो बजे दोपहर बहेड़ी में मोबाइल लैब पहुंचेगी। कोई भी व्यक्ति खाद्य पदार्थ का नमूना निशुल्क चेक करा सकते हैं। उन्होंने कारोबारियों से भी कहा कि वे भी अपने उत्पाद लैब से गुणवत्ता परख करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मोबाइल लैब से चेक किए नमूने कोई गड़बड़ी पाए जाने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
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शहर में लगने लगे स्मार्ट मीटर

बरेली। ऊर्जा मंत्री की सख्ती के बाद बिजली विभाग ने शहर में स्मार्ट मीटर लगाने शुरू कर दिए हैं। इसकी शुरुआत सिठौरा से हुई। अब दूसरे इलाकों में भी इन्हें लगाने का कार्यक्रम बनाया गया है।
पिछले महीने आए स्मार्ट मीटर स्टोर में धूल फांक रहे थे। ऊर्जामंत्री ने स्मार्ट मीटर पर सवाल पूछा तो अफसर बगलें झांकने लगे। मीटर लगाने की जिम्मेदारी विद्युत परीक्षण खंड की थी। एसई एनके मिश्रा ने कई बार इन मीटरों को लगाने का काम शुरू करने को कहा भी था लेकिन परीक्षण खंड हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। ऊर्जा मंत्री की नाराजगी के बाद शनिवार को वितरण खंड प्रथम में मीटर लगाने का काम शुरू हुआ। विभाग का मकसद ज्यादा लाइन लॉस वाले इलाकों में ये मीटर लगाने का है।
स्मार्ट मीटर की खूबियां
- उपभोक्ता कभी भी और कहीं भी ऑनलाइन एनर्जी खपत, बिल की जानकारी स्मार्टफोन पर देख सकते हैं।
- बिल में कोई भी छेड़खानी नहीं हो पाएगी।
- नेट मीटर के लिए अलग कोई मीटर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- ये पोस्ट/पेड से प्री-पेड में भी बदल सकेंगे।
- मीटर रीडिंग की जरूरत नहीं, ऑनलाइन होगी।
स्मार्ट मीटर शहर में लगना शुरू हो गए हैं। ये काम पहले ही होना चाहिए था। कई बार विद्युत परीक्षण खंड को निर्देशित किया था। चिह्नित इलाकों में इन्हें लगाया जाना है ताकि बिजली चोरी पर अंकुश लग सके। - एनके मिश्रा, एसई शहर
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हत्या में दो को उम्रकैद की सजा

बरेली। भैंस चुराकर ले जाते चोरों को ललकारने पर की गई हत्या के मामले में दो लोगों को अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई। सजा का आदेश विशेष न्यायाधीश उमेश चंद्र पांडे ने किया। घटना की रिपोर्ट गांव मूसापूर थाना भोजीपुरा की रहने वाली मृतक की पत्नी सरवरी ने लिखाई। रिपोर्ट में कहा कि 28 फरवरी 11 को आधी रात के बाद वादिनी की भैंस चोर खोल कर ले गए। जागने पर पति बड़े खां ने उनका पीछा गांव जटउपटटी तक किया। साथ में उसका बेटा इकबाल व देवर चांद भी गए थे। रास्ते में चोरों को भैंस ले जाते देखकर उन्होंने पहचान लिया। रिपोर्ट में कहा कि वीरपाल व मंगली व कईअन्य आदमी भैंस को लिए जा रहे थे। इन लोगों ने लाठी डंडों से बडे़ खां को मार कर घायल कर दिया। अस्पताल ले जाते समय बड़े खां की मौत हो गई। अभियोजन की ओर से सरकारी वकील आशुतोष दुबे ने पक्ष रखा। अदालत ने अभियुक्त वीरपाल व मंगली को दोषी मानते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई। इसके अलावा हर एक पर पचास-पचास हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। ... और पढ़ें
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