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सरकारी उदासीनता से बंद हो रहे संस्कृत विद्यालय

ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली। Updated Tue, 28 Jun 2016 12:47 AM IST
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सरकार और लोगों की उदासीनता के चलते बरेली शहर के दोनों संस्कृत विद्यालय बंद होने की कगार पर हैं। इन विद्यालयों के शिक्षक और प्रधानाचार्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसके बाद विद्यालय में कोई पढ़ाने वाला नहीं है। ऐसे में संस्कृत के छात्रों का भविष्य भगवान भरोसे है। 
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केंद्र सरकार संस्कृत का खूब ढिंढोरा पीटती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं दिख रहा है। प्रदेश सरकार तो पहले से ही उदासीन है। बरेली में दो एडेड संस्कृत विद्यालय हैं। एक जयदेवी संस्कृत विद्यालय और दूसरा बृज मोहन लाल संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय। जय देवी संस्कृत विद्यालय में लगभग 127 छात्र हैं। इस विद्यालय के प्रधानाचार्य और शिक्षक दोनों 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य एनडी शर्मा को दो साल पहले राज्यपाल पुरस्कार भी मिला था। पुरस्कार मिलने के बाद इनका कार्यकाल दो साल बढ़ गया। इसके बाद एनडी शर्मा 64 साल की उम्र में 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वहीं, बृज मोहन लाल संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. शिव अवतार मिश्र पांच साल पहले वीआरएस ले रहे हैं। दरअसल, छात्र संस्कृत में दाखिला नहीं लेना चाहते हैं और इसका परिणाम प्रधानाचार्यों को भुगतना पड़ता है। छात्र संख्या कम होने पर विद्यालय का अनुदान रोक दिया जाता है। इसके चलते प्रधानाचार्यों को वेतन के लाले पड़ जाते हैं। बृज मोहन लाल संस्कृत विद्यालय में इस समय पर 50 छात्र पंजीकृत हैं। 2013 में यहां पर 25 छात्र थे। इसलिए, विद्यालय पर कार्रवाई करते हुए अनुदान रोक दिया गया था। अनुदान रुकने से प्रधानाचार्य का वेतन भी रुक गया। आए दिन होने वाली इन कार्रवाइयों से तंग आकर डॉ. शिव अवतार मिश्र ने वीआरएस लेना ही मुनासिब समझा। उनके वीआरएस को डीआईओएस ने फारवर्ड कर दी। 
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30 साल पहले हुई थीं नियुक्तियां
बरेली। पहले संस्कृत विद्यालय धर्मार्ध कार्य के लिए स्थापित किए जाते थे। पुराने जमींदार इन विद्यालयों को दान दिया करते थे। अब नई पीढ़ी संस्कृत विद्यालयों के प्रति उदासीन हो गई। कॉलेजों के मैनेजमेंट भी विद्यालय को आगे बढ़ाने में सहयोग नहीं करते। विद्यालय खंडहर होने की कगार पर हैं, लेकिन उनकी मरम्मत कराने वाला कोई नहीं। अगर संसकृत विद्यालय बंद हो गए तो इनकी संपत्ति पर अतिक्रमण हो जाएगा। विद्यालय गिरने के बाद जमीन पर कब्जा हो जाएगा। इन विद्यालयों में 30 साल पहले नियुक्तियां हुई थीं। तब से एकल विद्यालय ही चल रहे हैं। एक-दो शिक्षकों से इतने बड़े कॉलेज चल रहे हैं। बृज मोहन लाल संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में छह से 12 तक कक्षाएं चलती हैं। इस हिसाब से 49 पीरियड होते हैं। 49 शिक्षक एक शिक्षक रोज कैसे पढ़ाएंगे। 
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शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया 2010 में शुरू हुई थी, लेकिन कुछ वजहों से नहीं हो पाई। अभी शिक्षकों की बहुत कमी है। दूसरे संस्कृत विद्यालयों से इन विद्यालयों में शिक्षक अटैच किए जाएंगे। 
- जसवंत सिंह, उपनिरीक्षक, संस्कृत पाठशालाएं, बरेली मंडल

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