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Bareilly: पुल निर्माण के चलते लगे जाम में फंसी गर्भवती महिला, प्रसव पीड़ा से लगी चीखने, आशा वर्कर्स ने संभाला

अमर उजाला नेटवर्क, बरेली Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 27 Nov 2022 01:04 PM IST
सार

गर्भवती की जान खतरे में पड़ने का प्रकरण अस्पताल में चर्चा का विषय बना रहा। पुल निर्माण से पहले इलाज के लिए उन्हें पैदल अस्पताल पहुंचने में बमुश्किल पांच मिनट का वक्त लगता था। लेकिन शनिवार को सरायखाम की एक गर्भवती को ई-रिक्शा से 400 मीटर दूर महिला अस्पताल तक पहुंचने में करीब घंटा भर लग गया।

गर्भवती
गर्भवती
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विस्तार

कुतुबखाना पुल निर्माण के चलते ग्रीन कॉरीडोर से गर्भवतियों और गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल तक पहुंचाने के जिम्मेदारों के दावे कागजों तक सीमित है। शनिवार को सरायखाम की एक गर्भवती को ई-रिक्शा से 400 मीटर दूर महिला अस्पताल तक पहुंचने में करीब घंटा भर लग गया। बर्न वार्ड से गुजरते हुए गर्भवती दर्द से चीखकर बेहाल हो गई। गनीमत रही कि पीछे से आ रहीं आशा वर्कर ने सूझबूझ से गर्भवती को संभाल लिया और अस्पताल पहुंचाकर सुरक्षित प्रसव कराया।



कोतवाली के पास सरायखाम मोहल्ला के रहने वाले मोहसिन की पत्नी 22 वर्षीय जेबा को शनिवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल ई-रिक्शा बुलाया और सवा नौ बजे महिला अस्पताल जाने के लिए रवाना हुए। मोहसिन की मां कमरुल निशा के मुताबिक, कुमार टाकीज से जाने को कहा तो ई-रिक्शा चालक ने पुल निर्माण के चलते रास्ता बंद होने की बात कही। लिहाजा वे सरायखाम से बांसमंडी, आलमगीरीगंज, कुतुबखाना चौकी से जिला पंचायत के सामने हाल में बर्न वार्ड की दीवार तोड़कर बनाए गए रास्ते से गुजरे। जगह-जगह जाम मिलने से देर होती रही।


सुबह करीब दस बजे बर्न वार्ड परिसर पहुंचने पर प्रसव पीड़ा इस कदर बढ़ गई कि जेबा बेहाल होने लगी। परिजन मदद की गुहार लगाने लगे। उनकी आवाज सुनकर मरीज के साथ रास्ते से गुजर रहीं आशा वर्कर पुष्पा, साजमा बेगम ने ई-रिक्शा में ही जेबा को संभाला। आगे परिजन रास्ता साफ कराते रहे। महिला अस्पताल पहुंचकर तत्काल डिलीवरी रूम में ले जाकर प्रसव कराया। जेबा ने बेटे को जन्म दिया।
 
अस्पताल से पैदल सिर्फ पांच मिनट की दूरी पर है सरायखाम
कमरुल निशा के मुताबिक, कुतुबखाना पुल निर्माण से पहले इलाज के लिए उन्हें पैदल अस्पताल पहुंचने में बमुश्किल पांच मिनट का वक्त लगता था। पुल निर्माण की वजह से जाम के बीच से गुजरने के कारण उनकी बहू की जान पर बन आई थी। रास्ते में मिलीं आशा वर्कर और महिला अस्पताल में जिस तरह डॉक्टर, स्टाफ ने उनकी मदद की, उसके लिए वह और उनका परिवार हमेशा आभारी रहेगा।
 
महिला अस्पताल के स्टाफ ने भी जताई आपत्ति
गर्भवती की जान खतरे में पड़ने का प्रकरण अस्पताल में चर्चा का विषय बना रहा। डॉक्टरों के मुताबिक, अस्पताल की तीन स्टाफ गर्भवती हैं। वह हर दिन जाम से गुजरती हैं। सड़क पर फैले कीचड़ से फिसलने की आशंका रहती है। ऐसे में वे परिजनों का हाथ पकड़कर या अन्य स्टाफ का सहारा लेकर ही अस्पताल परिसर के बाहर आती-जाती हैं। उन्होंने अफसरों से इस मुसीबत से निजात दिलाने की मांग की है।

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