बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

... तो बरेली कॉलेज के लॉ डिपार्टमेंट पर लग सकता है ताला

बरेली।  Updated Fri, 19 May 2017 01:13 AM IST
विज्ञापन
... तो बरेली कॉलेज के लॉ डिपार्टमेंट पर लग सकता है ताला
... तो बरेली कॉलेज के लॉ डिपार्टमेंट पर लग सकता है ताला - फोटो : ... तो बरेली कॉलेज के लॉ डिपार्टमेंट पर लग सकता है ताला

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

ख़बर सुनें
बरेली कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही से विधि विभाग पर खतरा मंडरा रहा है। पिछले सात साल से विभाग का लाइसेंस बार काउंसिल से नहीं कराया गया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने इसको लेकर दस लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पैनल्टी न जमा करने पर संबद्धता निरस्त करने की चेतावनी भी है। बताया यह भी जा रहा है कि अगर संबद्धता निरस्त होती है तो बरेली कॉलेज से 2010 में पास हुए छात्रों की डिग्री तक अमान्य घोषित हो जाएगी।  
विज्ञापन

बरेली के सबसे पुराने विधि विभाग को लेकर बरेली कॉलेज प्रबंधन गंभीर न हुआ तो इस पर कभी भी ताला लटक सकता है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने नवीनीकरण न कराने पर कॉलेज पर दस लाख रुपये की पैनल्टी लगाई और निरीक्षण फीस पांच लाख रुपये जमा करने को कहा। कॉलेज मैनेजमेंट इस मामले पर कोई फैसला नहीं कर सका। काफी समय बाद पांच लाख रुपये तो जमा कर दिये गए लेकिन नवीनीकरण फीस नहीं जमा की गई। बीसीआई ने बरेली कॉलेज को 320 सीटें आवंटित की है, लेकिन हर साल ढाई सौ से 300 सीटों पर ही एडमिशन होते हैं। वहीं इतने ही छात्र हर साल पास भी होते हैं। 

- रुहेलखंड विश्वविद्यालय भी आया सामने 
बताया जा रहा है कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से बरेली कॉलेज को पत्र लिखकर कहा है कि अगर वह मामला को जल्द नहीं सुलझाता है तो लॉ की काउंसिलिंग में बरेली कॉलेज को शामिल नहीं किया जाएगा। इससे कॉलेज को छात्र नहीं मिलेंगे। बरेली कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सोमेश यादव ने लाइसेंस नवीनीकरण के दस्तावेज मंगवाए हैं। इस मामले पर विभाग के पूर्व प्रभारी पर भी लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। 
लाइसेंस नवीनीकरण से संबंधित जब दस्तावेज तलब किए गए तो जानकारी दी गई कि लाइसेंस नवीनीकरण की फीस का ड्राफ्ट विभाग के पूर्व प्रभारी की अलमारी में था। प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि जून में इस विवाद को सुलझा लिया जाएगा।
डॉ. सोमेश यादव, प्राचार्य, बरेली कॉलेज 
अगर कोई ड्राफ्ट बनता है तो उसका रिकार्ड अकाउंट विभाग में भी रहता है। अभी तक इसे क्यों नहीं देखा गया। प्राचार्य सभी कुछ जानते हुए भी यह कह रहे हैं तो वह प्राचार्य बनने के लायक नहीं। 
डॉ. एमपी  रस्तोगी, पूर्व प्रभारी, लॉ विभाग 

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us