अपने आंगन में उतर कर झूमा पहाड़

ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली Updated Sat, 14 Jan 2017 01:52 AM IST
Juma landed in his courtyard mountain
Juma landed in his courtyard mountain - फोटो : बरेली, अमर उजाला
सूर्य भगवान शनिवार को उत्तरायण होंगे। कुदरत की हर करवट पर उत्सव मनाने वाले उत्तराखंड लोगों ने एक दिन पहले ही जैसे पूरा पहाड़ ही अपने आंगन बरेली में उतार दिया। पहाड़ का संगीत, संस्कृति, लोकनृत्य और वहां की वेषभूषा ही नहीं वहां के उत्पाद और जायका सब हाजिर है। गुनगुनी धूप में छोलिया  हैरतअंगेज कारनामे करते हुए बरेली की सड़कों से गुजरते हुए बरेली क्लब के मैदान तक मेले की रंग यात्रा को लेकर पहुंचे और उत्तरायणी मेला शुरू। पेडो पाको बारो मासा... और जय हो कुमाऊं... जय हो गढ़वाला...जैसे गीतों के बीच पीले और नारंगी रंग का पिछौड़ा पहने लड़कियां नाचते चल रही थीं। हुड़के, दमामा नगाड़ों की थाप, मशकबीन की तान और रणासिंघा की धूं धूं के साथ नाचते हुए।  
उत्तरायणी जनकल्याण समिति की ओर से आयोजित उत्तरायणी मेले का रंग  जम गया। कोतवाली पर रंगयात्रा की शुरूआत मेयर डॉ. आईएस तोमर ने हरी झंडी दिखाकर की। उत्तराखंड की परंपरागत वेषभूषा में सजधज कर बच्चे सुबह ही यहां पहुंच गए। रंगयात्रा में बच्चाें ने बेटी बचाओ का संदेश भी दिया। बरेली क्लब मैदान में पहुंची यात्रा का स्वागत कैंट विधायक राजेश अग्रवाल ने मंत्रोच्चारण के साथ किया। इस दौरान मेजर जनरल एलसी पांडेय उपस्थित रहे। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमाें का शुभारंभ हुआ। रंगयात्रा से लेकर मंच पर अपनी प्रस्तुति देने में 16 सांस्कृतिक टीमों के करीब 200  बच्चों ने भाग लिया। कार्यक्रम में टीबरीनाथ सांगवेद संस्कृत महाविद्यालय, श्री गुरुनानक रिक्खी सिंह इंटर कालेज, सांस्कृतिक कला मंच सिविल लाइंस, पर्वतीय समाज आईवीआरआई, श्याम बिहारी मेमोरियल स्कूल, सांस्कृतिक मंच कुर्मांचलनगर, राजेंद्रनगर, पीएसी, देवांचल नृत्य दल, उत्तराचंल दीप पर्वतीय समाज करमपुर चौधरी, उत्तराखंड आर्य संस्कृति, गंगाशील स्कूल, होशी मिशन स्कूल, आरएन टैगोर इंटर कालेज के बच्चों ने भाग लिया। इस दौरान बिग्रेडियर सुरेंद्र मेहता कमांडेंट जेएलए ने स्मारिका का विमोचन किया। मेले में शंभूदत्त बेलवाल, गिरीश चंद्र पांडेय, प्रमोद बिष्ट, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, देवेंद्र जोशी, मोहन जोशी, पीसी पाठक, भुवनचंद्र पांडेय, मुकुल त्रिपाठी, दिनेश पंत, माधवानंद तिवारी व अन्य का सहयोग रहा। 

प्रदीप जोशी का हुआ सम्मान 
मेले के सांस्कृतिक मंच पर संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य प्रो. प्रदीप जोशी को सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि इस मेले में आना उनके लिए काफी गर्व की बात है। इससे बरेली के लोग भी उत्तराखंड की लोक संस्कृति को समझने में दिलचस्पी लेते हैं। 

उत्तरायणी कौतिक लागि रौ बरेली मा...
बरेली। रंगयात्रा के बाद सबसे ज्यादा दर्शक सांस्कृतिक मंच की प्रस्तुति देखने को जुटे।  नंद किशोर के नेतृत्व में हल्द्वानी से आई दिव्य ज्योति लोक कला समिति की टीम ने देवी देवताओं के आह्वान में गोलाज्यू हमारा इष्ट देवा छन..., छपेली में लादे- लादे हीरा आखों में सुरमा... गाकर खूब रिझाया। जगदीश उपाध्याय और ज्ञान ज्योति गौतम ने एकल गीत गाए। क़ु माऊं सांस्कृतिक उत्थान समिति नैनीताल से विनोद आर्या की टीम ने शाबास मेरा मोतिया बल्द तिले धारू बोला, अल्मोड़ा बाजार कमला न मार लटक, रूम झूम ज्योगाड़ तिल धारू बोल... की  प्रस्तुति दी। मुनस्यारी से सदाबहार गायक आंनद सिंह कोरगा ने उड़ि- उड़ि ज्ञान द्वि पंछी अकाशा... जौ नंदा भाई को मैत शिब्ज्यू को कैलाशा... सुनाया। एकल गायक बसंती बिष्ट ने उत्तरायणी को त्यार एगौ मेरी दूज मै बुलाये, मैं भल्यंो भेजी दिए भागी मैं झन भुलाए और आमा बूबू तुमले आया कौतिक.. दीदी भलि सब ले आया कौतिक उत्तरायणी कौतिक लागी रौ बरेली मा... गाया। 

पहाड़ की सब्जी और अनाज के लिए खरीदार जुटे
उत्तरायणी मेले में सबसे ज्यादा लोग जो पसंद करते हैं वह है यहां की बाल मिठाई, अनाज, सब्जी और फल। पहले दिन से ही खरीदने के लिए लोग खूब जुटे। किसी दुकान पर भीड़ हो या न हो अनाज की दुकान पर लोग सामान खरीदने के लिए आ रहे हैं। मेला मैदान में 145 स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें अनाज, फल, मिठाई और सब्जी बेचने वालाें की दुकान सबसे अधिक है। अगर एक दुकान का रेट न समझ में आए तो दूसरी दुकान में आ सकते हैं, यहां शर्तिया आपको दाम कम मिल जाएगा। दुकानदाराें ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले दाल के दामों में थोड़ा बहुत अंतर आया है। लेकिन ज्यादा महंगी नहीं हुई है। पहाड़ पर उगने वाली मीठी पत्ती जिसे स्टीविया भी यहां मिल रहा है। इसे डायबिटीज के मरीज अपने खाने पीने के पदार्थों में बिना डर के इस्तेमाल कर सकते हैं। कड़ी पत्ता का का पैकेट भी मिल रहा है। माल्टा, कद्दू, गडरी, सिघोड़ी भी  है। 

दाम पर एक नजर 
मंडुए का आटा 50 से 60 रुपए प्रति किलोग्राम
गडरी  50 से 60 रुपए प्रति किलो
कद्दू 40 से 50 रुपए प्रति किलो
गहत की दाल 160 से 200 रुपए प्रति किलो
भांग  30 रुपए पैकेट
बाल मिठाई 400 रुपए प्रति किलो
भट की दाल 140 से 160 रुपए प्रति किलो
समा के चावल 40 रुपए पैकेट 

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