ये टेंपो तो मौत के दूत हैं

Bareilly Updated Wed, 07 May 2014 05:31 AM IST
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बरेली। केस वन
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दिन मंगलवार। स्थान पीलीभीत बाईपास रोड पवन विहार के सामने। समय शाम 5 से 5.05 बजे। इस बीच इधर से 45 आटो, टेंपो गुजरे। यानी एक मिनट में नौ टेंपो। ज्यादातर में चालक के दाएं और बाएं दोनों सवारियां बैठी थीं।
केस टू
दिन मंगलवार। स्थान सीबीगंज में बरेली-रामपुर हाइवे इलाहाबाद बैंक के सामने। समय अपराह्न 2.55 से 3 बजे। इस बीच 30 आटो व टेंपो गुजरे। यानी एक मिनट में छह टेंपो। कइयों में सवारियां ठूंसकर भरने के साथ पीछे लटकी थीं।
बहेड़ी के पास सोमवार को डंपर की टक्कर में एक टेंपो के परखचे उड़ गए। इस हादसे में आठ लोगों को जान गंवानी पड़ी और पांच लोग गंभीर रूप घायल हो गए थे। ये सभी टेंपो में सवार थे। यानी सात सवारी के लिए स्वीकृत टेंपो में चालक तेरह सवारियां ठूंसकर ले जा रहा था। इतने लोगों की जान की परवाह टेंपो वाले को तो थी ही नहीं, आरटीओ, पुलिस-प्रशासन को भी कभी नहीं रहती। आठ मौतों के लिए जितना नैनीताल रोड के गड्ढे और इस रोड को गड्ढों में ही तब्दील करने वाला तंत्र जिम्मेदार है उतना ही दोषी ओवरलोडिंग पर अंकुश के लिए जिम्मेदार महकमे। इस हादसे में जान गंवाने वाले तो वापस नहीं लौट सकते लेकिन जिम्मेदार महकमे जाग जाएं और अपनी ड्यूटी को गंभीरता से अंजाम दें तो आगे इस तरह के हादसे होने से रोके जा सकते हैं।
आरटीओ विभाग और ट्रैफिक पुलिस में भारी भरकम स्टाफ, रोड किनारे थाने और पुलिस चौकियां बनी हैं। फिर भी जिले में यातायात व्यवस्था बेपटरी नजर आती है। आटो, टेंपो, टाटा मैजिक, मैक्स जीप, लोडर, प्राइवेट बसें सारे वाहन ओवरलोड दौड़ते हैं। यहां तक कि चालक अपनी सीट तक पर सवारियां बैठा लेता है। मगर इन्हें देखने वाला कोई नहीं। आरटीओ विभाग के अफसरों की नजर बड़े वाहनों से वसूली पर रहती है। ट्रैफिक पुलिस कर्मी चेकिंग और टारगेट भर को चालान करने से ज्यादा कुछ नहीं करते। थाने और चौकी वाले गाड़ियों में लटकी सवारियों को देखते रहते हैं। नतीजतन ट्रैफिक में सब कुछ अस्त व्यस्त है। ऊपर के आदेश पर एक-दो दिन चेकिंग चलती है। कुछ व्यवस्था सुधरी नजर आती है लेकिन उसके बाद पहले से ज्यादा बिगड़ जाती है। ओवरलोडिंग और बेतरतीब वाहनों के दौड़ने का नतीजा जाम और हादसे के रूप में सामने आते हैं। मजबूरन लोग जान जोखिम में डालकर सफर करते हैं।
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कहां से आए इतने टेंपो?
आरटीओ दफ्तर के रिकार्ड के मुताबिक शहर क्षेत्र में संचालन के लिए साढ़े तीन हजार आटो, टेंपो का रजिस्ट्रेशन है। मगर दौड़ते आठ हजार से भी ज्यादा हैं। इतने टेंपो कहां से आए इस बारे में न आरटीओ विभाग के पास कोई जवाब है और न पुलिस कुछ बता पाती। देहात के टेंपो शहर में चलने का बहाना जरूर है।
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... तो पुलिस चलवाती है अवैध स्टैंड
शहामतगंज, चौपुला ओवरब्रिज तिराहा, नेकपुर चीनी मिल के पास, सैटेलाइट बस स्टैंड, किला में सत्यप्रकाश पार्क के पास अवैध रूप से बस और टैक्सी स्टैंड चल रहे हैं। इन सभी जगह ट्रैफिक और थाना पुलिस मुस्तैद रहती है जबकि सरकारी रिकार्ड में शहर के अंदर कहीं भी स्टैंड नहीं हैं।
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नहीं कोई रूट निर्धारण
शहर में आटो, टेंपो वालों के लिए कोई निर्धारित रूट नहीं है। यानी जो चालक जिधर चाहता दौड़ता चला जाता है। इससे कुछ रोडों पर आटो, टेंपो की संख्या बहुत ज्यादा है।
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टेंपो समेत सारे वाहनों पर नियंत्रण रखना हमारा और ट्रैफिक पुलिस का काम है। समय-समय पर अभियान भी चलाया जाता है। मगर आरटीओ विभाग बड़े वाहनों से राजस्व वसूली में उलझा रहता है।
-- एके वर्मा, एआरटीओ प्रशासन
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बुधवार को आटो यूनियन पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है। इसमें सारे नियम समझाए जाएंगे। मतगणना यानी 16 मई के बाद चेकिंग अभियान चलेगा। इससे पहले आरटीओ से वार्ता कर ली जाएगी।- बृजेश कुमार श्रीवास्तव, एसपी ट्रैफिक
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