फोरलेन बना रही कंपनी की मनमानी और प्रशासन की अनदेखी से हुआ हादसा

Bareilly Updated Tue, 06 May 2014 05:31 AM IST
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बहेड़ी। नैनीताल रोड पर आठ लोगों की जान लेने वाला हादसा बेवजह नहीं हुआ। ऐसा हादसा कभी न कभी होना ही था क्योंकि इस रोड पर फोरलेन निर्माण कर रही कंपनी की मनमानी और प्रशासन की अनदेखी से इस हादसे की जमीन पहले से ही तैयार थी। अनगिनत गड्ढों से भरी इस सड़क पर जरा सा तेज चलना हादसे को दावत देने के बराबर था। लगातार हादसे होने के कारण ही प्रशासन ने कंपनी को गड्ढों को मिट्टी से भरवाने की हिदायत दी थी लेकिन कंपनी ने इसे अनसुना कर दिया और फिर प्रशासन ने भी चुप्पी साध ली।
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सड़क की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांव जाम सावंत जनूबी के पास जहां यह हादसा हुआ, उससे बरेली की दिशा में एक किलोमीटर तक एक हजार से ज्यादा गड्ढे हैं। इससे और आगे बढ़ेंगे तो और बेशुमार गड्ढे मिलेंगे। दुर्घटना स्थल से बहेड़ी की ओर भी करीब एक किलोमीटर तक छह सौ से ज्यादा गड्ढे हैं। इस सड़क पर वाहनों के चलने पर जब धूल और गर्द के घने गुबार उड़ते हैं तो सामने से आने वाला वाहन तक दिखाई तक नही देता।
नैनीताल रोड के दाहिनी ओर फोरलेन का काम चल रहा है और खाई में मिट्टी डालकर सड़क बनाई जा रही है। इस वजह से मुख्य मार्ग और ज्यादा संकरा हो गया है। इस रोड पर लगातार सड़क दुर्घटनाएं होने के मद्देनजर प्रशासन ने फोरलेन बना रही कंपनी के अफसरों को कई बार गड्ढे मिट्टी से भरने और सड़क पर पानी डालने का निर्देश दिया था ताकि धूल का गुबार न उड़े लेकिन कंपनी ने प्रशासन के निर्देशों को हवा में उड़ा दिया।
ऐसे हुआ हादसा
बरेली की ओर से डंपर काफी तेजी से आ रहा था। गड्ढों भरी सड़क पर तेज रफ्तार के कारण ही डंपर का ड्राइवर अपना संतुलन खो बैठा और देखते ही देखते उसने सड़क पर दाहिनी ओर जाकर बहेड़ी की तरफ से बरेली जा रहे टेंपो को रौंद दिया। डंपर के ड्राइवर की बदहवासी का यह हाल था कि वह हादसे के बाद डंपर को वह करीब दो सौ मीटर तक दौड़ाता ले गया और उसके बाद डंपर सड़क किनारे एक खाई में पलट गया।

वर्जन-
फोरलेन बनाने वाली कंपनी को काफी पहले निर्देश दिया गया था कि सड़क के गड्ढों को मिटटी से पाट दिया जाए लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सड़क पर पानी का छिड़काव भी नही कराया जा रहा है। नैनीताल रोड के गड्ढों की वजह से ही इतना बड़ा हादसा हुआ है। -रामेश्वरनाथ तिवारी, एसडीएम बहेड़ी
वर्जन-
घटनास्थल का जायजा लिया है। फोरलेन बनाने वाली कंपनी को निर्देश दिया है कि सबसे पहले नैनीताल रोड के गड्ढों को मिट्टी से भरने का काम करें। मौके पर सीओ को आदेश दिए हैं कि घायलों को ठीक तरह से इलाज दिलाया जाए। वास्तव में यह बहुत दर्दनाक हादसा है। -अजय कुमार, कमिश्नर बरेली
वर्जन-
जहां नई सड़क चालू है वहां पुरानी सड़क रिपेयर कराने का कोई मतलब नहीं है। जहां नई सड़क नहीं बनी है, वहां पुरानी सड़कों के गड्ढे भरवाए जा रहे हैं। एक्सीडेंट सड़क पर गड्ढे की वजह से नहीं बल्कि ओवर स्पीड में टेंपो को ओवरटेक करने की वजह से हुआ है।’ -आरके पांडेय, प्रोजेक्ट मैनेजर पीएनसी इन्फ्राटेक लिमिटेड

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तो अभी डेढ़ साल और झेलनी पड़ेगी मुसीबत
निर्माण करने वाली कंपनी ने कहा- अभी हमारे पास है सितंबर 2015 तक का वक्त

अभी तक 20 किलोमीटर तक पूरा हो पाया है निर्माण

अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। नैनीताल रोड पर उत्तराखंड की सीमा पुलभट्टा तक 54 किमी सड़क का निर्माण पीपी मॉडल के तहत होना है। एजेंसी अभी 20 किमी सड़क ही बना पाई है। बाकी सड़क पर इतने गड्ढे हैं कि कोई वाहन 20 किमी से ज्यादा रफ्तार से नहीं चल सकता। बस से बरेली से बहेड़ी तक 50 किमी के सफर में तीन घंटे तक लग जाते हैं।
यूपी स्टेट हाइवे अथारिटी से 354 करोड़ की लागत से स्वीकृत बरेली-नैनीताल रोड 15 मार्च 2013 से निर्माणाधीन है। इसे आगरा की पीएनसी इन्फ्राटेक लिमिटेड फर्म बना रही है। बहेड़ी तक बीच-बीच में कहीं वन साइड रोड बन चुका है तो कहीं निर्माण चल रहा है। नई सड़क दो से तीन फुट ऊंची बन रही है। पुरानी सड़क पर पैच वर्क नहीं कराए जाने से गड्ढे पट नहीं पाए। इससे दुघर्टनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ठेके की शर्तों में नैनीताल रोड का निर्माण 15 सितंबर 2015 तक पूरा होना है। कार्यदायी संस्था के अधिकारियों के मुताबिक एक साल में 20 किलोमीटर सड़क बन चुकी है। अभी डेढ़ साल से ज्यादा वक्त बाकी है।


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इन सड़कों पर भी कम दुश्वारियां नहीं
बरेली। बरेली-नैनीताल रोड ही क्यों, बरेली-बीसलपुर रोड, फरीदपुर-बुखारा रोड, सौ फुटा रोड, बदायूं रोड पर गुजरने में भी लोगों को कम दुश्वारियां नहीं झेलनी पड़तीं। इन सड़कों पर भी आए दिन दुघर्टनाएं होती हैं। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है लेकिन फिलहाल इसकी भी अनदेखी की जा रही है।
बरेली-बीसलपुर रोड
बीसलपुर रोड का निर्माण भुता से दो किमी आगे तक पूरा हो चुका है। भुता पुल से आगे 25 किमी तक रोड इतनी ज्यादा खस्ताहाल है कि दोपहिया वाहन तक नहीं चल पाते। बस या ट्रकों की स्पीड 15 किलोमीटर से आगे नहीं बढ़ पाती। बजट न होने के कारण इस सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो पा रहा।
फरीदपुर-बुखारा रोड
फरीदपुर बुखारा रोड तीन साल पहले स्वीकृत हो चुकी है। बजट की एक किस्त आने के बाद सड़क का निर्माण प्रारंभ किया गया लेकिन दूसरी किस्त नहीं मिली। लिहाजा कार्यदायी संस्था ने सड़क का निर्माण रोक दिया है। इस जर्जर सड़क पर वाहनों तो दूर पैदल गुजरना तक मुश्किल है।
बरेली-बदायूं रोड
बदायूं रोड शासन से फोरलेन स्वीकृत हो चुका है। बजट की पहली किस्त भी मिल चुकी है लेकिन अब तक फोरलेन का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। पुरानी सड़क खस्ताहाल हो चुकी है। ट्रैफिक लोड ज्यादा होने से आए दिन दुघर्टनाएं होती रहती हैं।
सौ फुटा रोड
दो साल तक सड़क निर्माण के लिए कई आंदोलन हुए। बहुचर्चित रही यह रोड 12.70 करोड़ की लागत से स्वीकृत हो चुकी है। 18 फरवरी को सड़क निर्माण शुरू भी हो गया। जर्जर सड़क पर हैवी ट्रैफिक गुजरने से मार्ग दुघर्टनाएं होती रहती हैं।
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साल भर में 18 लोगों की मौत
डग्गामार वाहन हुए सबसे ज्यादा हादसों के शिकार
बहेड़ी। नैनीताल रोड पर गड्ढों के बाद हादसों की दूसरी सबसे बड़ी वजह डग्गामार वाहन हैं। इस रोड पर चलने वाले टेंपो, मैजिक और मैक्स गाड़ियां सवारियों को खुलेआम लटकाकर सफर तय करती हैं । परिवहन विभाग और पुलिस दोनों ने इस ओर से आंखें मूंद रखी हैं। डग्गामार वाहन थाने के गेट से लेकर बाईपास पर वन विभाग की चौकी के पास बने पुलिस बैरियर तक को बेखौफ पार करते हैं। यही वजह है कि एक साल में इस सड़क पर 18 लोगों की मौत हो चुकी हैं और दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। इस हादसे के बाद पुलिस ने लटकाकर सवारियों को लेकर चलने वाले टेंपो के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया लेकिन यह अभियान कब तक चलेगा कुछ पता नही।
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