मेयर बोले-मुझे नहीं मिली फैसले की कापी

Bareilly Updated Sat, 26 Oct 2013 05:44 AM IST
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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनने के बाद चला कम है, उस पर उठापटक ज्यादा हुई है। सुप्रीम कोर्ट के स्टे ऑर्डर पर अब जैसे-तैसे प्लांट चलने की नौबत आई है तो इसी बीच नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश ने मेयर और नगर आयुक्त को फिर तगड़ा झटका दे दिया। नगर निगम को अभी ट्रिब्यूनल का आदेश तो मिला नहीं है, लेकिन यह तय हो गया है कि इस बार भी इस उठापटक का अंत सुप्रीम कोर्ट में ही होगा।
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बरेली। मेयर और नगर आयुक्त पर पांच-पांच लाख का जुर्माना और एक दिन की सजा, साथ ही नगर निगम पर भी साठ लाख का जुर्माना। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के इस फैसले ने हलचल तो खूब पैदा की, लेकिन शुक्रवार को देर शाम तक भी यहां नगर निगम तक नहीं पहुंच पाया। मेयर डॉ. आईएस तोमर ने इस बीच कहा कि वह जनता के लिए एक क्या कितने भी दिन के लिए जेल जाने को तैयार हैं। लेकिन ट्रिब्यूनल के इस फैसले को वह सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
मेयर डॉ. तोमर ने बताया कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के संबंध में ग्रीन ट्रिब्यूनल के एक दिन की सजा और जुर्माने के आदेश का पता चला है लेकिन 25 अक्तूबर की शाम तक ट्रिब्यूनल के फैसले की प्रति उन्हें नहीं मिली। प्लांट दो दिन से लगातार चल रहा है। नगर निगम का प्रयास है कि प्लांट को पूरी क्षमता से चलाकर जनता की अपेक्षा के अनुरूप शहर के कूड़े का निस्तारण कराया जाए। प्लांट चलने से शहर की गंदगी दूर होगी। जहां तक ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्णय की बात है तो न्यायपालिका में पूरी निष्ठा है। सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले दिनों ट्रिब्यूनल के एक निर्णय पर रोक लगाकर प्लांट चालू कराया था। यह मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में चल रहा है। ट्रिब्यूनल के इस आदेश के खिलाफ भी हम सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।
यह है फैसला
ट्रिब्यूनल ने 24 अक्तूबर को दिए निर्णय में 28 मई से 18 जुलाई तक जानबूझकर जन उत्पीड़न करने के बदले मेयर और नगर आयुक्त को एक दिन की सजा के साथ दोनों पर पांच-पांच लाख रुपये जुर्माना और नगर निगम पर जनहित के स्वास्थ्य की अनदेखी कर पर्यावरण को प्रदूषित करने के लिए 28 मई से 27 जुलाई तक प्रतिदिन एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इस तरह मेयर, नगर आयुक्त और नगर निगम पर कुल 70 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। हालांकि ट्रिब्यूनल ने मेयर को अवमानना और नगर आयुक्त को न्यायालय में व्यक्तिगत तौर पर पेश होने की छूट दी है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक ट्रिब्यूनल का आदेश प्रभावी नहीं होगा।


अभी तक टिब्यूनल के फैसले की कापी नहीं मिली है। निर्णय का अध्ययन करने के बाद विधिक राय लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी।’
- उमेश प्रताप सिंह, नगर आयुक्त
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