चाची को डंडों से पीटकर मार डाला

Bareilly Published by: Updated Wed, 10 Jul 2013 05:32 AM IST
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बरेली। बभिया गांव में सोमवार रात एक शख्स ने अपनी चाची को डंडों से पीटकर मार दिया। दो पक्षों में दो दिनों से मारपीट हो रही थी और वे थाने और चौकी से मदद भी मांग रहे थे, लेकिन पुलिस की बेरुखी से आखिर इस मामले में एक जान चली गई। कैंट पुलिस ने घटना को हल्का करने के लिए गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया है।
बभिया के ओमवीर का मकान नीचा है, जिससे बारिश का पानी भर जाता है। सोमवार दोपहर दो बजे उसके घर वाले मिट्टी डाल रहे थे। ओमवीर के मुताबिक, उसी दौरान पड़ोस में रहने वाला उसका तहेरा भाई कुंवरपाल उर्फ बिगाड़ा फावड़ा मांगने पहुंच गया। चूंकि खुद काम कर रहे थे, लिहाजा उन्होंने फावड़ा देने के लिए मना कर दिया। इस पर कुंवरपाल गालियां देने लगा। कहासुनी होने पर कुंवरपाल के घर वाले पहुंच गए और मारपीट शुरू कर दी। ओमवीर और उसके घर वाले भागकर बभिया चौकी गए। पुलिस ने हमलावरों पर कार्रवाई करने के बजाय दूसरे पक्ष को बुलाकर समझौता करा दिया। ओमवीर ने बताया कि शाम को उसके भांजे रितिन को दूसरे पक्ष के लोग जंगल ले जा रहे थे। उसकी चीख सुनकर घर वाले पहुंच गए और रितिन को छुड़ा लिया। इससे बौखलाए कुंवरपाल व उसके घर वालों ने ओमवीर के घर पर पथराव किया। ओमवीर इसकी शिकायत करने कैंट थाने गया।

रात में 10.30 बजे ओमवीर कैंट थाने से घर लौटा तो कुंवरपाल व उसके घर वालों ने घेरकर उसे डंडों से पीटना शुरू कर दिया। उसकी चीख सुनकर 50 वर्षीय मां सुमित्रा देवी समेत घर के कई लोग बचाने गए। उन्हें भी हमलावरों ने लाठी डंडों से जमकर पीटा। सिर में गंभीर चोटें आने से सुमित्रा बेसुध होकर गिर गईं। ओमवीर, रितिन समेत कइयों को चोटें आईं। घटना की सूचना बभिया चौकी पुलिस को दी गई। चौकी के तीन बार चक्कर लगाने के बाद रात 11 बजे पुलिस मौके पर गई। फिर 108 नंबर एंबुलेंस बुलाकर घायलों को जिला अस्पताल भेजा गया, जहां सुमित्रा को मृत घोषित कर दिया गया। मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम कराया गया। कैंट पुलिस ने मृतक के बेटे प्रेमपाल की ओर से कुंवरपाल उर्फ बिगाड़ा, उसके भाई चिम्मन और ओमपाल के खिलाफ मारपीट और गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया है।
बाक्स
तो फिर क्या फायदा इस बभिया चौकी का!
बरेली। कैंट पुलिस दोनों पक्षों की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करती तो सुमित्रा की जान बच सकती थी, लेकिन पुलिस वाले हमलावरों को पकड़ने के बजाय घटना को दबाने में लगे रहे।
बदनाम गांव बभिया में छोटी सी बात पर लोग एक-दूसरे का खून कर देते हैं। बीते सात जून को बभिया में कैंट थाने के सिपाही अनिरुद्ध यादव की हत्या कर दी गई थी। उसके बाद बभिया गांव में पुलिस चौकी बना दी गई। उम्मीद थी कि इसके बाद बभिया में अपराध घटेंगे, लेकिन पुलिस का काम करने का तरीका पहले जैसा रहा।
सोमवार को सुमित्रा के घर वाले भागकर पीएसी के पास गए थे। पीएसी जवानों ने पुलिस चौकी भेज दिया। चौकी वालों ने घटना स्थल पर जाने तक की जहमत नहीं उठाई। बल्कि मुखबिर के माध्यम से हमलावरों को चौकी बुलाकर समझौता करने को कहा। विरोधी पक्ष ने सुमित्रा के घर शाम को दुबारा हमला बोल दिया। पीड़ित लोग शिकायत करने के लिए कैंट थाने गए। वहां भी उनकी नहीं सुनी गई। इससे हमलावरों का दुस्साहस इतना बढ़ा कि रात को तीसरी बार हमला कर दिया। घायल सुमित्रा के बेसुध होने पर घर वालों ने तीन बार चौकी के चक्कर लगाए। करीब पौन घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक सुमित्रा ने दम तोड़ दिया था।

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