न बल्लम न भाला ... बांस में बांध कर चले गुब्बारा

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बरेली। न तीर न तलवार, न बल्लम न भाला। न डीजे का धूम धड़ाका। बांस में बांध कर चले गुब्बारा। इस बार जुलूूसे मोहम्मदी में शामिल अंजुमनें शांति का संदेश दे गई। पिछले दिनों शहर में हुए तनाव को लेकर सभी परेशान थे। प्रशासन भी किसी तरह शहर में अमन चाहता था। इसके मद्देनजर इस बार प्रशासन ने जुलूस में डीजे, तलवार, बल्लम भाला लेकर चलने पर रोक लगा रखी थी। साथ ही जुलूस के आयोजकों से भी इसमें सहयोग करने को कहा था। इस पर आयोजकों ने भी पाबंदी की। इसमें दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) ने भी हथियारों और डीजे न लेकर चलने की अपील जारी की। साथ ही शहर में अमन का आह्वान किया। इसका असर जुलूस में दिखाई दिया। किसी भी अंजुमन ने प्रतिबंधित चीजों को अपने साथ नहीं लिया। अगर उनके हाथों में कुछ था तो इस्लामी या फिर रंगबिरंगे झंडे थे। जुलूस में आकर्षण पैदा करने के लिए कुछ अंजुमनों ने पूरे बांस पर गुब्बारों का गुच्छा सजा रखा था। जिसे वह अपने हाथों में लिए चल रहे थे। इस तरह अंजुमनों ने न सिर्फ अपने पैगम्बर के प्रति अकीदत का नजराना पेश किया, बल्कि शांति और सौहार्द का संदेश भी दिया।
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डीजे को लेकर सतर्क दिखा प्रशासन
बरेली। जुलूस में हथियारों के अलावा डीजे को लेकर प्रशासन काफी सतर्क दिखा। शक होने पर कई अंजुमनों को रोक कर उनके साउंड को चेक किया। तसल्ली होने पर ही उसे आगे बढ़ने की इजाजत दी।

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तोप और मॉडल था आकर्षण
बरेली। अंजुमन बज्म-ए गौस-ए आजम में शामिल तोप और आला हजरत का गुम्बद का माडल जुलूस में आकर्षण बना रहा। ऐसे जुलूस में पहली बार आला हजरत के गुम्बद का मॉडल शामिल किया गया था। अंजुमन के युवाओं ने इसे खुद अपनी कोशिशों से बनाया था। इसे बनाने उन्हें करीब 11 दिन लगे। वहीं इसमें शामिल तोप की खास बात यह थी कि इसके द्वारा फायर से निकल रहे फूल लोगों पर बिखर कर पड़ रहे थे। जो एक अलग खुशनुमा माहौल बना रहे थे।
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जोश दिखा आबिद में
बरेली। जुलूसे मोहम्मदी में आबिद अपनी ट्राई साईकिल से शामिल थे। वह विकलांग है और ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे, मगर ईद मीलादुन्न नबी का जोश उनमें भरा था। उन्होने अपनी ट्राई साईकिल को झालर और गोटों सजा रखा था। जो आकर्षण का केंद्र बने रहे। पूछने पर बड़ी मुश्किल से अपना नाम बता पाए।

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