मौन रखकर जताया आक्रोश

Bareilly Updated Thu, 27 Dec 2012 05:30 AM IST
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बरेली। दिल्ली में हुए गैंग रेप और शहर में खुलेआम घूम रहे व मनमानी कर रहे गुंडों की वजह से हर दिन हो रही घटनाओं के विरोध दिल्ली पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने कैंडल मार्च निकाला। विद्यार्थियों ने मौन रखकर अपना आक्रोश जताया। विद्यार्थियों ने दुराचारियों को फांसी की सजा की मांग की।
शहर में लगातार हो रही छेड़खानी से घटनाओं से स्कूली बच्चे भी आक्रोशित हैं। अपने शहर की लड़कियों की सुरक्षा के लिए वह भी सड़क पर निकल पड़े और घटनाओं का विरोध दर्ज कराया। विद्यार्थियों ने प्लेकार्ड्स हाथों में लेकर संदेश देने का प्रयास किया। नाटक का मंचन हिंदी की शिक्षक शीला भाकुनी की ओर से किया गया। विद्यार्थियों ने प्रशासन से मांग की कि शहर में मनमाने कर रहे गुंडों को पकड़कर कठोर कार्रवाई की जाए, जिससे शहर की लड़कियां सुरक्षित हो सकें। स्कूल की प्रधानाचार्य रजनी सिंह ने विद्यार्थियों को सुरक्षा के प्रति सचेत रहने की अपील की। इस मौके पर शिक्षक वैशाली पाठक और दयानिधि एंड्रूज डिल्लू भी मौजूद रहे।



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आक्रोशित महिलाएं और सुधी जनों की राय


मानसिकता में करें बदलाव
जब तक स्त्री को उसकी पहचान के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। जब तक मानसिकता में बदलाव नहीं आएगा, तब तक कुछ भी भला नहीं होने वाला है। इसलिए, हमें इस ओर ही प्रयास करना होगा। ठीक है इसके साथ सख्त कानून भी बने, लेकिन मूल जड़ जहां पर है, उसे बदलने की जरूरत है।
- डॉ. वंदना शर्मा, समाजसेवी
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नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाएं
पैसे का जोर और प्रभाव हर चीज पर भारी पड़ रहा है। जितनी संपन्नता बढ़ गई है, उतनी ही नैतिकता का ह्रास होता जा रहा है। इसका रिश्तों में भी साफ असर देखा जा सकता है। व्यक्ति हर चीज को उपभोग की तरह देख रहा है। इन सब चीजों के लिए शिक्षा और व्यावसायिकता ही जिम्मेदार है। जब शिक्षा में नैतिकता का पाठ पढ़ाएंगे, तो सब कुछ अपने आप बदल जाएगा।
- डॉ. एमसी सोंधी, समाजशास्त्री

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शिक्षा का ठीक तरह से हो क्रियान्वयन
यह सही बात है कि मानसिकता को बदलने में शिक्षा की अहम भूमिका होती है। व्यक्ति के अधिकार और कर्तव्य बताती है। लेकिन, शिक्षा में बदलाव तो बाद की बात है, लेकिन अभी जो है, हम उसका ही क्रियान्वयन ठीक तरह से नहीं करा पा रहे है। अगर उस पर ही गंभीरता से काम हो तो फिर काफी कुछ सुधार देखने को मिलेगा।
- डॉ. उमा व्यास, शिक्षाशास्त्री
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अश्लील विज्ञापनों पर रोक लगे
ऐसे देश में जहां महिलाओें को संविधान में बराबरी का दर्जा दिया गया है, वहां पर इतनी असुरक्षा यह बड़ी ही शर्मनाक बात है। साहित्य, फिल्में, सीरियल और विज्ञापनों में जिस तरह की अश्लीलता बढ़ रही है, यह सब उसका ही नतीजा है। इन सब पर रोक लगाने के साथ ही ऐसे मामलों के लिए सख्त कानून भी बनाना बहुत जरूरी है।
- गीता शांत, सामाजिक कार्यकर्ता
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शहर में पुलिस गश्त बढ़ाए
पुलिस छेड़खानी के मामलों को छिपाने का प्रयास कर रही है। ऐसे मामलों का विरोध वाले लोगों को गलत ठहराने की कोशिश कर रही है। पुलिस प्रशासन को यह चाहिए, वह अपनी गश्त बढ़ाए, कार्रवाई करे और लोगों की मदद लेकर ऐसे लोगों को बेनकाब करे। इसके साथ ही फास्ट ट्रैक अदालत में ऐसे मामलों की सुनवाई हो, ताकि पीड़ित को समय से न्याय मिल सके।
- पूनम, वकील
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सबको निभानी होगी जिम्मेदारी
यह कैसा लोकतंत्र है, जहां पर अपने ही देश में महिलाएं सड़क पर निकलने से डर रही हैं। किसी को भी पुलिस का कोई डर नहीं है। एक तरफ विरोध हो रहा है तो दूसरी तरफ लगातार छेड़खानी की घटनाएं हो रही हैं। सरकार, प्रशासन सब अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। कोई भी अपनी गलती स्वीकार नहीं कर रहा है। इसके लिए सभी को प्रयास करना होगा। - सीमा, गृहणी
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छात्राओं की राय........
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अभिभावक अपने बच्चों को संस्कार दें। महिलाओं की इज्जत करना सिखाएं। अगर बच्चे अपनी मां की इज्जत करेंगे तो फिर बाहर महिलाओं का भी सम्मान करेंगे। यहीं से सुधार हो जाएगा।
- रेनू, छात्रा, बीए फर्स्ट ईयर
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समाज में हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। पुलिस, प्रशासन, समाज के स्त्री-पुरुष सभी अपनी जगह पर मुस्तैद रहें और हर गलत घटना पर अपना विरोध दर्ज कराएं।
- शिवानी, छात्रा, बीएससी फर्स्ट ईयर
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महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी करें, तभी वह ठीक तरह पढ़ाई-लिखाई और नौकरी कर पाएंगे। अगर वह डर गईं तो फिर सड़कों पर कैसे निकलेंगे। अपना काम कैसे कर पाएंगी।
- रति तिवारी, छात्रा, बीए थर्ड ईयर
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दिल्ली तो अपना शहर उससे भी आगे निकलने की होड़ कर रहा है। शहर में ही दिनदहाड़े छेड़खानी हो रही है। अब तो छात्राओं का दिन में भी सड़क पर निकलना मुश्किल हो गया है।
- इरम नाज, छात्रा, एमसी फर्स्ट ईयर
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छात्राओं को हर घटना का खुलकर विरोध करना चाहिए। लड़कियां चुप रह जाती हैं, इसलिए शोहदों के आत्मविश्वास और बढ़ जाता है, फिर पर किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए तैयार हो जाते हैं।
- राखी, छात्रा, एमएससी फर्स्ट ईयर

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कॉलेज और कोचिंग में भी छात्राओं की सुरक्षा के इंतजाम होने चाहिए, क्योंकि यहां पर अक्सर ऐसी घटनाएं होती हैं। जब तक पुलिस प्रशासन सख्त नहीं होगा, तब तक कुछ भी नहीं बदलेगा।
- पूजा सिंह, छात्रा, एमएससी फर्स्ट ईयर

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