यहां तो कोटे के तेल से चल रहे ट्रक

Bareilly Updated Wed, 26 Dec 2012 05:30 AM IST
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अजीत बिसारिया
बरेली। आम आदमी के घर में रोशनी और खाना पकाने के लिए सरकार जो मिट्टी का तेल भेजती है, हमारे जिले में उसका इस्तेमाल सड़कों पर ट्रक दौड़ाने में हो रहा है। कोटे की दुकानों पर से तो कार्डधारकों धमकाकर भगा दिया जाता है, लेकिन खुले मार्केट में केरोसिन भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। नियमानुसार यह तेल सस्ते गल्ले की दुकानों पर ही बेचा जा सकता है। पुलिस और पूर्ति विभाग की मिलीभगत से यह अवैध धंधा बड़े पैमाने पर हो रहा है, लेकिन बड़े अफसर भी चुप हैं।
जिले को हर महीने 29.02 लाख लीटर मिट्टी का तेल दिया जाता है। इसके बावजूद हर तरफ से कार्डधारकों की तेल न मिलने की शिकायतें ही आ रही हैं। पड़ताल की तो सच भी आसानी से सामने आ गया। शाहजहांपुर रोड सिर्फ अतिक्रमणकारियों के ही कब्जे में नहीं है, केरोसिन के अवैध कारोबारियों के कब्जे में भी है। मंगलवार को दिन में 12.35 बजे शाहजहांपुर रोड पर मालियों की पुलिया से पहले पेट्रोल पंप पर एक ट्रक खड़ा था। ट्रक के आगे दो खाली केन रखी थीं। इसमें रखा मिट्टी का तेल कुछ देर पहले ही फ्यूल टैंक में डाला गया था। कुछ ही देर बाद एक ठेले पर ड्रम लाया गया, जिसमें भी तेल था। रोड पर ही ड्रम में पाइप लगाकर इसे ट्रक के फ्यूल टैंक में डाल दिया गया। ड्रम लाने वाले व्यक्ति से इस बाबत पूछा तो उसका जवाब था, ‘ड्रम में मिट्टी का तेल है।’ कहां से लाते हो इसे? जवाब था-‘सब कुछ तो आप जानते हैं! गंगापुर से।’ कितने रुपये में दिया यह ड्रम? वह फिर बोला, ‘8800 रुपये में दो सौ लीटर।’ जब उसे अपनी गतिविधियां कैमरे में कैद होती दिखीं तो आनन फानन में तेल डालकर वहां से चला गया। इस तरह से ट्रक वालों को तेल की बिक्री यहां आम बात है। शाहजहांपुर रोड पर ही आम लोगों को तेल बेचने वाले एक दुकानदार ने बताया कि उन्हें कोटेदार खुद माल दे जाते हैं।


.....और यह गंगापुर में आंखों देखा नजारा
बरेली। दिन का 1.40 बजा था। गंगापुर में मंदिर के पास खाद्य तेल की दुकान पर अपनी बाइक खड़ी करने के बाद वहां टहलने लगे। सड़क की किनारे ही एक दुकान से केन ठेले में लादी जा रही थीं। दुकान के अंदर ड्रमों में तेल भरा था। कैमरा चलते देखा तो फौरन दुकान बंद करके दुकानदार वहां से खिसक लिया।
नजदीक के ही एक दुकानदार ने बताया कि जिस दुकान पर आपने तेल बिकते देखा, उसके दुकानदार का नाम राकेश है। गंगापुर में कई दुकानों पर कोटे का तेल बिकता है। यहां के दुकानदार सीधे कोटेदारों से तेल खरीदते हैं। महीने के शुरुआती दिनों में आम लोगों को 36 रुपये प्रति लीटर और आखिरी सप्ताह में 44 रुपये प्रति लीटर तक तेल बिकता है। यहां के दुकानदारों को प्रति लीटर तीन से चार रुपये ही बचते हैं। पुलिस वालों का महीना बंधा है। इसलिए वे छापा नहीं मारते। पूर्ति विभाग के अफसरों को चढ़ावा चढ़ाने की जिम्मेदारी कोटेदारों की है। आसपास की कई दुकानों पर केरोसिन बिकता हुआ मिला। इसी दौरान वहां शाहजहांपुर रोड पर ट्रक में तेल डालने वाला व्यक्ति मिल गया। उस वक्त उसके तेवर थोड़े बदले हुए थे। उसने और लोगों को भी बुला लिया। हालांकि, इसके फौरन बाद अमर उजाला की टीम वहां से चली आई।


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ट्रकों में केरोसिन के इस्तेमाल का अर्थशास्त्र
ट्रक ड्राइवरों को ब्लैक में 40-44 रुपये प्रति लीटर तक केरोसिन मिल जाता है। जबकि डीजल के दाम 49.98 रुपये प्रति लीटर है। यानी डीजल की जगह मिट्टी का तेल का इस्तेमाल करने पर दो सौ लीटर ईंधन पर 1200 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक की बचत हो जाती है। अलबत्ता इसमें कुछ रुपयों का मोबिल ऑयल जरूर मिलाना पड़ता है।

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मुनाफा बटोर रहे कोटेदार
केरोसिन (मिट्टी का तेल) का सरकारी रेट 14.65 रुपये से लेकर 14.85 रुपये प्रति लीटर है। ब्लैक में तीन गुना महंगा तक बिकता है। यही वजह है कि कार्डधारकों को तेल देने के बजाय ब्लैक करना कोटेदार ज्यादा पसंद करते हैं। जानकारों की मानें तो जिले में 15-17 लाख लीटर तेल हर महीने ब्लैक किया जाता है।

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यूं ही चुप नहीं रहता पूर्ति विभाग
सोमवार को डीएसओ केबी सिंह ने अमर उजाला को बताया था कि राशन-तेल न मिलने की कार्डधारकों की शिकायतें बहुत ही कम हैं। लेकिन मंगलवार को शाहजहांपुर रोड और गंगापुर में मिला नजारा इससे उलट हकीकत बयान करता है। कई कोटेदारों ने भी माना कि पूर्ति विभाग को हमेशा ‘महीना’ पहुंचाया जाता है। जो जितनी ज्यादा ब्लैक करता है, ‘महीना’ भी उसी हिसाब से तय होता है।

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