मेयर की नहीं मान रहे नगर आयुक्त

Bareilly Updated Tue, 25 Dec 2012 05:30 AM IST
बरेली। मेयर डॉ. आईएस तोमर और नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह के बीच ठन गई है। खटास की शुरुआत संजय कम्युनिटी हॉल को सील करने के दौरान हुई थी और उसके बाद सफाई नायकों के तबादलों का मसला दोनों के बीच प्रतिष्ठा का सवाल बन गया। अब हालात ये हैं कि मेयर के आदेश तक नहीं माने जा रहे। नगर निगम के दूसरे अफसर असमंजस में होने के बावजूद नगर आयुक्त के पाले में चले गए हैं।
नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन के कार्यकाल से यहां तैनात हैं। डॉ. तोमर ने जुलाई में मेयर का पद संभाला। अब तक दोनों के बीच काफी अच्छे रिश्ते रहे। लेकिन कुछ दिन पहले अचानक दोनों के बीच दूरियां बढ़ गईं। अब नौबत यह है कि मेयर के आदेशों को भी अनदेखा किया जा रहा है। मेयर और नगर आयुक्त के बीच मनमुटाव की चर्चा अब सभासदों और नगर निगम के कर्मचारियों की जुबां पर तक है। नगर निगम के कामों पर भी असर पड़ना शुरू हो गया है।

हॉल को सील करना नहीं भाया मेयर को
मेयर और नगर आयुक्त के बीच खटास की शुरुआत संजय कम्युनिटी हॉल को सील करने से हुई। यह कार्रवाई मेयर को रास नहीं आई। बीडीए से पंगा लेकर नगर निगम कुछ हासिल तो नहीं कर सका, मगर मेयर और नगर आयुक्त के बीच दरार की वजह जरूर बन गया। इसके बाद नगर आयुक्त खुद इस मामले को सुलझाने में लग गए थे। वह बीडीए के सचिव सुभाष उत्तम से मिलने भी गए थे। मगर जब उन्हें मेयर की मंशा के बारे में पता चला तो उन्होंने हॉल के बाहर उसे कुर्क करने का का नोटिस और लिखवा दिया।

ये विवाद आए सामने
-नगर आयुक्त ने 18 दिसंबर को 11 सफाई नायकों के तबादले किए थे। ये सफाई नायक मेयर से मिले तो उन्होंने तबादलों को रद्द कर दिया और नगर आयुक्त को एक नीति तय कर पांच साल से एक ही जगह पर जमे सभी नायकों को हटाने के लिए कहा। नगर आयुक्त ने इसके बजाय बीस साल पुराने 14 नायकों की सूची जारी की। यह भी साफ कर दिया कि बाकी को तभी हटाया जाएगा, जब उनके दोनों आदेशों के तहत ट्रांसफर हुए 11 और 14 सफाई नायक नए तैनाती स्थल पर ज्वाइन कर लेंगे। हालांकि सभी 11 सफाई नायक अपनी पुरानी ही जगह काम कर रहे हैं। चर्चा है कि नगर आयुक्त को यह अच्छा नहीं लगा कि सफाई नायकों के तबादले के उनके पहले आदेश को पलट दिया गया।

-19 दिसंबर को नगर निगम की टीम ने अपने दफ्तर के सामने अतिक्रमण हटाना शुरू किया और सरकारी जमीन पर रखे कैनोपी वाले दो जेनरेटर उठवा लिए थे। तब से ये नगर निगम परिसर में ही रखे हैं। सोमवार को दुकान के मालिक मुकेश अग्रवाल मेयर से मिले और इन्हें दिलाने की मांग की। इस पर मेयर ने संपत्ति निरीक्षक एमपी जौहरी के पास उन्हें भेज दिया। जौहरी ने नगर आयुक्त के आदेश के बगैर जेनरेटर देने से मना कर दिया। उनके लौटने पर ही कोई बात करने की बात कही। ऐसा ही जवाब उन्हें दो-तीन अन्य अफसरों से मिला। पूछने पर एक अफसर ने यहां तक कहा कि हमारी हिम्मत नहीं है कि नगर आयुक्त के आदेश के बगैर कुछ करें। यहां बता दें कि शमन शुल्क भी अगर लिया जाना है तो उसके लिए नगर आयुक्त का होना जरूरी नहीं था।

सुनियोजित ढंग से विरोध शुरू
11 सफाई नायकों के तबादले सशर्त रोकने पर दूसरे धड़े के लोग सुनियोजित ढंग से मेयर के पास पहुंचे थे और उनके फैसले का विरोध किया था। अब उन्हीं 11 सफाई नायकों ने नगर आयुक्त के आदेश का विरोध शुरू कर दिया है। सफाई मजदूर संघ के उपाध्यक्ष राजेंद्र समदर्शी के नेतृत्व में तमाम सफाई कर्मचारी और नायक मंडलायुक्त से मिले। उन्होंने नगर आयुक्त के स्थानांतरण की मांग की है। साथ ही तीन दिन बाद नगर आयुक्त के खिलाफ धरना देने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट से परमीशन मांगी है। नगर आयुक्त के खिलाफ शिकायत करने को वे नगर विकास मंत्री आजम खां का सर्किट हाउस में आने का भी इंतजार करते रहे। हालांकि आजम खां रामपुर से सैफई जाने को सीधे चौपला पुल से निकल गए। इन कर्मचारियों ने नगर आयुक्त के खिलाफ यह भी शिकायत की है कि उनसे जबरन इतनी सर्द ठंड में सीवर लाइन की सफाई कराई जा रही है।


क्या बोले
देखिए हम जनप्रतिनिधि हैं। हमें जनता जो बताती है, उसके माफिक सही काम कराना हमारी जिम्मेदारी है। जैसे हम जनता की बात सुनते हैं, वैसे ही अफसरों को हमारी सुनना चाहिए। हम बस इतना ही तो चाहते हैं। -डॉ. आईएस तोमर

मेयर ने जो कुछ कहा है, वह काम करा रहे हैं। अभी हमने 14 सफाई नायकों के तबादले किए हैं। अब एक दम से भी तो सबके तबादले करना ठीक नहीं है। वरना व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी। -उमेश प्रताप सिंह, नगर आयुक्त

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