मरीज को देखा बाद में, बेड रेस्ट की सिफारिश पहले ही

Bareilly Updated Wed, 19 Dec 2012 05:31 AM IST
बरेली। हत्या के एक आरोपी को फर्जी ढंग से जिला अस्पताल में भर्ती दिखाकर कानूनी कार्रवाई से बचाने की कोशिश का खुलासा होने के बाद भी यहां लोगों को फर्जी सर्टिफिकेट जारी करने का सिलसिला रुका नहीं है। मंगलवार को दूसरे दिन मंगलवार भी एडी एसआईसी डॉ. एके जैन ऐसी ही कई गड़बड़ियां पकड़ीं। एक मरीज के लिए बैक डेट में दो हफ्ते के बेड रेस्ट की सिफारिश करने के इस मामले में इस बार कार्डियोलाजी के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. वीपी भारद्वाज फंस गए हैं। उन्हें तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में चार दिसंबर को रेखा नाम की एक रोगी का ओपीडी में पंजीकरण हुआ था, लेकिन उसके पर्चे पर डॉ. भारद्वाज ने तीन दिसंबर की तारीख से ही दो हफ्ते के बेड रेस्ट की सिफारिश लिख दी। एडी एसआईसी डॉ. भारद्वाज को पत्र जारी कर तीन दिन के अंदर स्पष्ट करने को कहा है कि उन्होंने किस नियम के तहत मरीज को एक दिन पहले की तारीख में बेड रेस्ट की सिफारिश कर दी।
जांच-पड़ताल में डॉ. भारद्वाज के खिलाफ ही मंगलवार को दो और संदिग्ध मामले पकड़ में आए। इन दोनों मामलों में भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। यह मामला रोगियों को जिला अस्पताल की ओपीडी के फर्जी पर्चे जारी करने का है। दो रोगियों को दिए गए ये पर्चे अस्पताल के प्रचलित पर्र्चे से आकार से छोटे हैं। इन पर पंजीकरण तिथि की मोहर भी नहीं है। हालांकि इन पर डॉ. भारद्वाज की राइटिंग से मिलता-जुलती राइटिंग में रोगी के डायग्नोसिस का ब्योरा लिखा है।
बता दें कि सोमवार को पेट दर्द और सांस की तकलीफ में मेरठ जेल के बंदी रक्षक को एक डॉक्टर द्वारा दो हफ्ते के बेड रेस्ट की सिफारिश करने का मामला पकड़ में आया था। जबकि इस तरह सामान्य बीमारियों में हफ्ते भर से ज्यादा के बेड रेस्ट की सिफारिश न करने का नियम है। ऐसे मामलों में पांच से सात दिन बाद मरीज का दोबारा परीक्षण करने के बाद ही बेड रेस्ट बढ़ाने की सिफारिश की जा सकती है।

डॉक्टरों के काम की मासिक समीक्षा होगी
बरेली। जिला अस्पताल में चिकित्सकीय कार्य की मासिक समीक्षा होगी। ओपीडी में किस डॉक्टर ने कितने रोगी देखे, कितने भर्ती किए, कितने ठीक हुए, कितनों का फालोअप हुआ, कितने आपरेशन और कितने की मौत हुई जैसे बिंदुओं पर हर डॉक्टर का आकलन किया जाएगा। लापरवाही पर डॉक्टरों को चेतावनी जारी होगी। इसके अलावा अस्पताल में होने वाली रोगियों की मौत, उसकी वजह और डॉक्टर की जिम्मेदारी तय करने जैसे बिंदुओं की समीक्षा को भी एडी एसआईसी डॉ. एके जैन ने दो सदस्यीय समिति बना दी है। इसमें डॉ. वीके धस्माल और डॉ. करमेंद्र को रखा गया है। डॉ. जैन ने बताया कि जिला अस्पताल में खाली पड़ी जमीन को साफ और समतल कराकर उसे लॉन नुमा बनाया जाएगा ताकि मरीज और तीमारदारों को यहां सेहतमंद माहौल मिले। मंगलवार को इमरजेंसी के पास विकलांग मरीजों के शौचालय बनाने को भी मंजूरी दे दी गई।

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