अवैध रूप से बना बारात घर ढहाया

Bareilly Updated Fri, 14 Dec 2012 05:30 AM IST
बरेली। इंदिरानगर में नगर निगम की जमीन पर अवैध रूप से बने बारात घर और स्कूल को बृहस्पतिवार को नगर निगम ने ढहा दिया। एक साल पहले हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। अब फिर नए कमरे बनाए जाने पर निगम ने यह कार्रवाई की।
राजेंद्रनगर चौराहा से इंदिरानगर को जाने वाले मार्ग के मोड़ पर करीब 22 सौ वर्ग गज जगह पर यह अवैध निर्माण था। निगम में यह मामला ‘प्लॉट 45 डी’ विवाद से काफी समय से चर्चा में रहा। रेलवे दीवार से सटे हिस्से में किड्स स्कूल बना रखा था और दूसरी साइड में बारात घर के कमरे। स्कूल के बराबर में ही बारात घर के लिए अन्य कमरों का निर्माण इस समय चल रहा था। नगर आयुक्त के मुताबिक, यह कार्य गांधी मोहन सक्सेना करा रहे थे। वर्ष 2011 में हाईकोर्ट के ‘स्टेटस-को’ यानी यथास्थिति का आदेश देने के बावजूद भी एक बार निर्माण का प्रयास किया गया था, जिसे रोक दिया गया था। अब फिर से निर्माण होने की शिकायत पर नगर आयुक्त ने कार्रवाई के आदेश दिए। इस पर बृहस्पतिवार दोपहर एक्सईएन सतीश कुमार, एई सुशील सक्सेना, मानचित्रकार मोहम्मद हसन पुलिस को साथ लेकर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने जेसीबी मशीन से पुराना और नया दोनों ही निर्माण तोड़ दिया। इस दौरान वहां काफी भीड़ लग गई।
30 हजार रुपये लिये जाते थे आयोजन के
अक्षय बारात घर के नाम से यह भवन बना हुआ था। इसमें शादी के एक कार्यक्रम के लिए 30 हजार रुपये तक लिये जाते थे। बुधवार को भी एक शादी हुई थी। स्कूल के आगे खाली पड़ी जमीन को कार्यक्रम के लिए इस्तेमाल किया जाता था। बारातियों के लिए स्कूल के कमरे भी खोल दिए जाते थे।
सौ साल पुराना है निगम की यह जगह
तत्कालीन नगर पालिका प्रशासन ने शहर के विस्तार के लिए वर्ष 1910-11 में उदयपुर खास और विहारमान नगला की जगह अधिग्रहीत की थी। उसी में स्टेडियम भी बाद में बना। साथ ही नगर पालिका ने खसरा नंबर 162 से लेकर 164 तक की कुल जमीन का लेआउट पास कराकर 288 प्लॉट तैयार किए। उसी लेआउट का नंबर 45 डी है। कुल 288 प्लॉट में से 22 वर्ग गज का यह प्लॉट बिकने से रह गया था। निगम अधिकारियों के मुताबिक मिर्च व्यापारी गुलशन कुमार ने इस पर कब्जा कर लिया था। बाद में गांधी मोहन सक्सेना ने भी इस पर अपना दावा कर दिया। नगर निगम के कार्रवाई किए जाने पर पहले गांधी मोहन कोर्ट में चले गए। वहां इस जगह को खसरा नंबर 177 बताते हुए जमीन को अपना बताया। वहीं रेलवे ने कोर्ट में यह लिखकर दे दिया था कि इस खसरा नंबर की जमीन तो रेलवे की है। इस आधार पर उन्हें निचली अदालत से कोई राहत नहीं मिली और न ही बाद में हाईकोर्ट से। अब कोर्ट मेें गुलशन कुमार ने मालिकाना हक का दावा किया तो हाईकोर्ट ने यथास्थिति का आदेश पिछली साल किया। इसका उल्लंघन करने पर ही निगम ने बृहस्पतिवार को कार्रवाई की।

हमारा तो निगम से मालिकाना हक को लेकर पहले से मुकदमा चल रहा है और उस पर हमारे पक्ष में स्टे भी है। गांधी मोहन ने ही अवैध कब्जा करके निर्माण करा लिया था, इसी वजह से निगम ने ढहाया है। -गुलशन कुमार।

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