भेड़ों को चेचक से बचाएगा ‘एसपीपीवी श्रीनगर’

Bareilly Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
जनार्दन सिंह
बरेली। मनुष्यों की तरह भेड़-बकरियों में भी चेचक रोग फैलता है। यह मौत का कारण भी बनता है लेकिन अब डरने की कोई बात नहीं। एक ऐसी वैक्सीन विज्ञानियों ने ईजाद की है जो भेड़ों को जन्म के बाद टीके के रूप में देने पर ताउम्र खतरा नहीं रहेगा। यह टीका उसे भी दिया जा सकता है जिसे बीमारी हो चुकी है। इससे वह ठीक हो जाएगा साथ ही दुबारा रोग का खतरा भी नहीं होगा। पशुपालकों के लिये यह करिश्मा यहां के भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) ने कर दिखाया है।
शोध विज्ञानियों की टीम ने करीब 10 साल की मेहनत से श्रीनगर के भेड़ों में मौजूद वायरस से नया वैक्सीन एसपीपीवी श्रीनगर विकसित किया। देश के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर इसका परीक्षण - मूल्यांकन किया गया। रिजल्ट सौ फीसदी मिला और इसे सामूहिक टीकाकरण वास्ते एकदम उपयुक्त पाया गया। इस वैक्सीन से भेड़ों में दो वर्ष से भी अधिक समय तक चेचक प्रतिरोधी क्षमता जस की तस मिली है। ताउम्र यह क्षमता बनाये रखने का परीक्षण सालाना स्तर पर पांच साल चलेगा। टीका लगने के बाद भी रोग के दोबारा उभरने की खतरे की पांच बार अलग - अलग सूक्ष्म परीक्षण में प्रभाव सौ फीसदी मिला। यह पहले विकसित चेचक के टीकों (एसपीपीवी रानीपेट और एसपीपीवी आरएफ) से तुलनात्मक परीक्षण में भी काफी सुपीरियर मिला। संस्थान के निदेशक प्रो. गया प्रसाद के अनुसार, यह वैक्सीन पशु चिकित्सा जगत के लिये नई उपलब्धि है और परीक्षण कार्य पूरा होते ही आम पशुपालकों के प्रयोग के लिये उपलब्ध हो सकेगा।

बकरियों को चेचक से मुक्ति देगी उत्तरकाशी वैक्सीन
बरेली। भेड़ों की भांति बकरियों को चेचक के खतरे से बचाने को आईवीआरआई (बरेली) के विज्ञानियों ने एक नया वैक्सीन ईजाद किया है। इसके लिये उत्तरकाशी के बकरियों में मौजूद वायरस से तैयार किया गया है। इसीलिये इसका नामकरण उत्तरकाशी के नाम पर किया गया है। संस्थान के निदेशक प्रो. गया प्रसाद के अनुसार, यह जारी परीक्षण में विभिन्न तापक्रमों पर समान रूप से कारगर साबित हुआ है। चार डिग्री सेल्सियस तापमान पर 98 दिनों तक, 37 डिग्री सेल्सियस तापमान पर नौ दिनों तक और 45 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पांच दिनों तक भंडारण में यह प्रभावी रहा है।

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