40 गुना बढ़ा टैक्स, भड़के ऑटो ड्राइवर

Bareilly Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
बरेली। रेलवे जंक्शन के सर्कुलेटिंग एरिया में खड़े होने वाले ऑटो ड्राइवरों के लिए टैक्स की रकम 40 गुना बढ़ा दी गई है। बुधवार को रेलवे अफसरों की एक टीम इस टैक्स की वसूली करने पहुंची तो ऑटो ड्राइवरों ने टैक्स देने से इनकार करते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। काफी देर नारेबाजी और हंगामे के बाद रेल अफसरों को बैरंग लौटना पड़ा। ऑटो ड्राइवरों का कहना था कि बातचीत के जरिये पहले यह तय हो कि टैक्स किस आधार पर निर्धारित किया गया है।
बुधवार को स्टेशन अधीक्षक आदिल जिया सिद्दीकी टीटीई विजय प्रकाश और अनुराग के साथ सर्कुलेटिंग एरिया में खड़े ऑटो ड्राइवरों से वसूली करने पहुंचे। यह टीम 13 ऑटो ड्राइवरों की ही रसीद काट पाई थी कि हंगामा खड़ा हो गया। ऑटो रिक्शा चालक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेमपाल मौर्य और उपाध्यक्ष आरके शुक्ला समेत कई नेता पहुंच गए। ऑटो ड्राइवरों का कहना था कि वह वर्ष 2009 में एक आटो से जंक्शन के सर्कुलेटिंग एरिया में खड़े होने की एवज में 60 रुपये की सालाना फीस जमा कराई जाती थी, जिसे अब अचानक बढ़ाकर 200 रुपये महीना कर दिया गया है। उन्होंने 40 गुना बढ़ाए गए टैक्स की अदायगी करने से साफ इनकार कर दिया। ऑटो ड्राइवरों ने इतना ज्यादा हंगामा किया कि रेलवे अफसरों को वसूली छोड़कर सर्कुलेटिंग एरिया से लौटना पड़ा। ऑटो ड्राइवरों ने उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
इसी बीच ऑटो लेकर पहुंचे ऑटो ऑनर्स वेलफेयर सोसायटी के महासचिव सरदार गुरुदर्शन सिंह को भी ऑटो ड्राइवरों ने घेर लिया। दोनों यूनियनों के नेताओं ने उन्हें भरोसा दिलाया कि जब तक इस मामले में रेलवे अफसरों के साथ बैठकर बातचीत नहीं हो जाती, कोई भी ऑटो ड्राइवर रसीद नहीं कटवाएगा।

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जीआरपी की मनमानी से बढ़ी रेलवे की दिक्कतें
बरेली। कोई भी वक्त हो, जंक्शन के मेन गेट पर ऑटो रिक्शा का कुछ इस तरह हुजूम लगा होता है कि आम आदमी का पैदल निकलकर अंदर पहुंचना तक मुश्किल हो जाता है। ये हालात जीआरपी की देन हैं। दरअसल जीआरपी प्रीपेड बूथ के नाम पर जंक्शन पर आने वाले करीब 300 ऑटो रिक्शा की रसीद काट रही है। लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है।
जीआरपी हर ऑटो से प्रीपेड बूथ की फीस के नाम पर 100 रुपये महीना लेती है। इसके बदले उस पर व्यवस्थित ढंग से ऑटो का संचालन कराने की जिम्मेदारी आयद होती है, लेकिन जंक्शन पर इसका उल्टा नजारा है। जीआरपी के प्रीपेड बूथ का स्टीकर लगाने के बाद ऑटो ड्राइवर बेलगाम हो जाते हैं। वह जहां चाहे ऑटो रिक्शा खड़ा करके सवारी भरनी शुरू कर देते हैं। कुछ ऑटो ड्राइवरों से जीआरपी बिना रसीद दिए भी वसूली कर रही है। उन्हें यह भी परवाह नहीं रहती कि रेलवे को भी सर्कुलेटिंग एरिया में खड़े होने का शुल्क देना है। यही वजह है कि रेलवे अफसर जब अपना शुल्क वसूलने की कार्रवाई करते हैं तो जीआरपी चुप्पी साध लेती है। इसीलिए रेलवे और ऑटो ड्राइवरों के बीच टैक्स का विवाद कई साल बाद भी हल नहीं हो सका है।

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