छात्र संघ चुनावों ने बड़े सियासी जंग के लिए दलों के माथे पर डाला बल

Bareilly Updated Thu, 08 Nov 2012 12:00 PM IST
बरेली। रूहेलखंड विश्वविद्यालय और बरेली कालेज में मंगलवार रात संपन्न हुए चुनाव के परिणाम ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटे बरेली के राजनीतिक दलों के दिग्गजों के माथे पर बल डाल दिया है। भगवा खेमे से लेकर सपा तक इससे सकते में हैं। कांग्रेस जन इसे अपने हित में साधकर आंक रहे हैं पर पूरे घटनाक्रम से अपने को निरपेक्ष बनाये हुए हैं।
पूरे माहौल पर बरेली की राजनीतिक गलियारे से जो बातें छनकर सामने आई हैं, उसके अनुसार समाजवादी पार्टी (सपा) खेमा सबसे ज्यादा चिंतित है। आपसी मतभेद और ईगो फाइटिंग का नतीजा क्या हो सकता है, वह इस चुनाव परिणाम में सामने आ गया। तत्काल संगठन में ऊपर से नीचे स्तर तक इस घटनाक्रम से सबक लेकर मिशन 2012 की तरह मिशन 2014 में नए उत्साह से एकजुट होने का संदेश गया है। संगठन में पूरे मामले का विश्लेषण जारी है। विश्वविद्यालय में समाजवादी छात्र सभा (सछास) से अध्यक्ष पद के लिए टिकट का आवेदन करने वाले अरविंद पटेल प्रत्याशी न बनाये जाने पर बागी हो गये। अंबेडकर छात्र मोर्चा के बैनर तले मैदान में कूदे और विश्वविद्यालय राजनीति में सछास के कद्दावर के साथ ही पुराने कांग्रेसी नेता का आशीर्वाद मिला। नतीजा यह कि इसी ने सछास प्रत्याशी को पछाड़ा। साथ ही सछास से टिकट न मिलने पर निर्दलीय उतरे प्रमोद चौधरी को भी तीसरे स्थान पर रोक दिया।
बरेली कालेज में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी के तौर पर मतैक्य नहीं हुआ और पार्टी दो दिग्गजों के आशीर्वाद प्राप्त दो छात्र चुनाव मैदान में डटे। नतीजा दोनों ही तीसरे - चौथे स्थान पर रहे। लेकिन उपाध्यक्ष और महामंत्री पद पर मतैक्य रहने से जीत हासिल हुई। दूसरी ओर भगवा खेमे में भी विश्लेषण - मंथन जारी है। कालेज में सिर्फ अध्यक्ष पद और विश्वविद्यालय में सिर्फ पुस्तकालय मंत्री पद पर मिली सफलता ने इसे चिंता में डाल दिया है। यह दो पदों की जीत से मुगालते में नहीं रहना चाहती।

संगठनों के पदाधिकारियों का बयान
1. अपेक्षित संख्या में अभाविप प्रत्याशी नहीं जीते। यह कमी जरूर खली। लेकिन अच्छी बात यह रही कि जातिगत और धनबल की राजनीति से ऊपर उठकर बरेली कालेज में जिस तरह मतदाताओं ने संगठन के आम कार्र्यकर्त्ता पर भरोसा जताया है, उसने आशा की नई किरण दिखाई है। परिषद के विजेता कार्यकर्त्ताओं को बधाई। -- संतोष गंगवार, भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री।
2. अपने राम तो छात्र राजनीति से पले - बढ़े हैं। अपना तो विशुद्ध मानना है कि छात्रों की राजनीति में दलों को शामिल नहीं होना चाहिये। हां, यह भी स्पष्ट कर दूं कि इस नतीजे का अगले लोकसभा चुनाव से कोई लेना - देना नहीं है। कैंपस और लोकसभा के मुद्दे और माहौल जुदा होते हैं। -- प्रवीण ऐरन, सांसद, कांग्रेस।
3. छात्र संघ चुनाव के मद्देनजर प्रदेश सछास अध्यक्ष स्वयं बरेली में मौजूद थे। उन्होंने विश्वविद्यालय में हुई हार की वजह के बाबत प्रत्याशी से और जिला स्तर पर रिपोर्ट मांगी है। यह भेजी जा रही है। बरेली कालेज के लिए अंतिम क्षण तक संगठन से जुड़े दो में एक भी मैदान से नहीं हटे और इसका नतीजा प्रदेश नेतृत्व देख ही रहा है। महामंत्री और उपाध्यक्ष पद पर मिली जीत ने एकता के साथ मैदान में उतरने का मंत्र दिया है। -- गौरव सक्सेना, जिलाध्यक्ष, समाजवादी छात्र सभा, बरेली।
4. रूहेलखंड विश्वविद्यालय का चुनाव काफी छोटे स्तर का था। हां, बरेली कालेज में हम महामंत्री का चुनाव बड़े अंतर से जीते। साथ में उपाध्यक्ष की सीट भी कब्जाई। अगले लोकसभा चुनाव में सपा बरेली जनपद के दोनों सीटों पर परचम फहराएगी। -- संजीव यादव, जिला प्रवक्ता, सपा, बरेली।

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