एमएसडीपी से मिले 136 आंगनबाड़ी केंद्रों में से सिर्फ 12 का ही निर्माण पूरा

Bareilly Updated Tue, 06 Nov 2012 12:00 PM IST
बरेली। मल्टी सेक्टोरल डेवलेपमेंट प्लान (एमएसडीपी) के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों को मिले अरबों रुपये का कोई नतीजा सामने नहीं आया। कार्यदायी संस्था पैकफेड ने इन केंद्रों के लिए स्वीकृत हुई पूरी रकम लेने के बाद भी निर्माण पूरा नहीं कराया है। पैकफेड लागत में बढ़ने की बात कहते हुए 59.42 लाख रुपये और मांग रही है। यह रकम तो मिली नहीं और दूसरी तरफ अब तक हुआ निर्माण भी खंडहर में तब्दील हो रहा है। शासन का सख्त आदेश है कि घरों में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं चलेंगे, मगर ज्यादातर केंद्र घरों में ही चल रहे हैं।
वर्ष 2012-13 में एमएसडीपी के तहत 386.75 करोड़ रुपये मिला था। पहले चरण में 17 और दूसरे में 119 केंद्र स्वीकृत हुए थे। यहां बता दें कि अल्पसंख्यक बहुल जिलों के विकास के लिए केंद्र सरकार ने यह योजना शुरू की है। सभी 136 केंद्रों के निर्माण का ठेका उत्तर प्रदेश विधायन एवं निर्माण सहकारी संघ (पैकफेड) को दिया गया। पहले चरण के 17 केंद्रों के निर्माण के लिए दिए गए 35.70 लाख रुपये से पैकफेड ने सिर्फ 12 केंद्रों का निर्माण पूरा कर दिया। बाकी के पांच केंद्रों के निर्माण के लिए 18.55 लाख रुपये और मांगा। जो अभी तक मिला नहीं, नतीजतन पांच केंद्रों का निर्माण शुरू ही नहीं हो पाया।
दूसरे चरण के 119 केंद्रों में से एक का भी निर्माण अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इनका निर्माण पूरा करने के लिए भी पैकफेड ने 40.875 लाख रुपये और मांगा है। हकीकत तो यह है कि दी गई धनराशि से जितना काम हो सकता था, पैकफेड ने उतना काम भी नहीं कराया। हैरान कर देने वाली बात यह है कि पैकफेड ने बहुत पहले ही अपने इरादे से अफसरों को अवगत करा दिया था, इसके बावजूद जुलाई में आई दूसरी किस्त का उसे भुगतान कर दिया गया। इन 119 आंगन बाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए जो दीवारें खड़ी की गई थीं, धीरे-धीरे यह ढह रही हैं।
बिथरी चैनपुर संवाददाता के मुताबिक, दस गांवों में स्वीकृत आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण अधूरा है। इन केंद्रों की वर्कर अपने घरों या किराए के मकानों में ही केंद्र चला रही हैं। ये गांव हैं- भूड़ा मन्पुरिया, दलेल मोहनपुर, केसरपुर, परेवा कुइयां, पदारथपुर, भिंडौलिया, सैदपुर चुन्नीलाल, कुंवरपुर बंजरिया, चंदपुर बिचपुरी, म्यूड़ी खुर्द कला। भोजीपुरा संवाददाता के मुताबिक, दभौरा संजनपुर गांव में आंगनबाड़ी केंद्र की सिर्फ दीवारें खड़ी हैं, जो अब ढहने लगी हैं। ऐसा ही हाल यहां स्वीकृत हुए अन्य केंद्रों का हो रहा है। जानकारों का कहना है कि केंद्रों का निर्माण बेहद घटिया क्वालिटी का है। अब कार्यदायी संस्था इसके लिए उचित लागत मूल्य न मिलने को जिम्मेदार ठहरा रही है।

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पैकफेड ने आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण पूरा नहीं किया है। यह रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। पैकफेड के इंजीनियरों का तर्क था कि दूसरी किस्त न मिलने से जो निर्माण कराया गया है, वह भी खंडहर में बदल रहा है। लेकिन, दो महीने पहले दूसरी किस्त दिए जाने के बावजूद निर्माण पूरा नहीं किया गया। -मुजीब अहमद, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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चार साल पहले तय हुआ था कि 2.95 लाख रुपये में हम एक केंद्र बनाकर देंगे। लेकिन उसके डेढ़ साल बाद हमें धनराशि दी गई, तब तक मैटेरियल महंगा हो गया। अब एक आंगनबाड़ी केंद्र 3.62 लाख रुपये से कम में नहीं बनाया जा सकता। जितनी धनराशि दूसरी किस्त में मिली है, उसमें 119 के बजाय 99 केंद्रों का ही निर्माण पूरा किया जा सकता है। अगर डीएम लिखित में इसकी इजाजत दे दें तो हम काम शुरू करा देंगे। -डीके चौधरी, एक्सईएन, पैकफेड

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