सरकारी महकमों को हाईटेक करने की कवायद

Bareilly Updated Thu, 01 Nov 2012 12:00 PM IST
बरेली। यूपी की साइंस एंड टेक्नोलॉजी की मदद से सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन के महकमों में कामकाज को तेज और बेहतर बनाने की संभावनाएं तलाश रही है। इसके लिए उसने भारत सरकार की कौंसिल ऑफ साइंटिफिक इंडस्ट्रीयल रिसर्च से संपर्क साधा है। बरेली के ही रहने वाले कौंसिल के डायरेक्टर डॉ. मोहसिन उल्ला खान इसका खाका तैयार करने में जुटे हैं।
मूल रूप से पुराने शहर के रहने वाले डॉ. मोहसिन खानकाह-ए-तहसीनी खानदान के सदस्य हैं। अपने बेटे जेनुुल्लाह खान की शादी के सिलसिले में वह आजकल बरेली में हैं। डॉ. मोहसिन के मुताबिक यूपी सरकार कुछ अर्सा पहले ही कौंसिल ऑफ साइंटिफिक इंडस्ट्रीयल रिसर्च को राज्य के सरकारी विभागों में कामकाज को बेहतर बनाने के लिए साइंस एंड टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश करने की जिम्मेदारी सौंपी है। फिलहाल यह काम शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन के क्षेत्र में शुरू किया गया है।
डॉ. मोहसिन ने बताया कि शुरुआती दौर में वह साइंस एंड टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करने वाली उत्तर प्रदेश की इकाइयों से संपर्क कर रहे हैं। यूपी में टेक्नोलॉजी की शिक्षा दे रहे संस्थानों और भारत सरकार के संस्थानों के बीच तालमेल बनाने की कोशिश भी की जाएगी। इस प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ यह है कि आम आदमी को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देने के लिए सरकारी महकमों में साइंस एंड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाया जाए। जल्द ही इसका खाका तैयार करके यूपी सरकार को सौंप दिया जाएगा। सरकार उचित समझेगी तो उसे लागू करेगी।
भारत को भारी पड़ेगा जंगलों का नष्ट होना
बरेली। वेट रिसर्च सेंटर ऑफ फिनलैंड के सीनियर रिसर्च साइंटिस्ट टोरस्टी लोइकानेन कहते हैं कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में जंगलों का भी काफी महत्व होता है, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत में लगातार जंगलों को काटा जा रहा है और सरकार भी इसे रोकने के लिए कड़े कदम नहीं उठाती।
कौंसिल ऑफ साइंटिफिक इंडस्ट्रीयल रिसर्च दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. मोहसिन उल्ला खान के बेटे की शादी में शामिल होने आए लोइकानेन ने कहा कि फिनलैंड छोटा देश होते हुए भी साइंस एंड टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत से काफी आगे है। नोकिया मोबाइल हमारे देश की ही देन है। हमारी सेना जिस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है, उसे भारत आने में कई साल लग जाएंगे। यह टेक्नोलॉजी हमने स्वीडन, डेनमार्क और नार्वे को भी दी है। अब भारत और दुनिया के कुछ और मुल्कों को भी यह टेक्नोलॉजी देने की बात चल रही है। टेक्नोलॉजी की वजह से ही हमारा देश आर्थिक रूप से भी दूसरे देशों के मजबूत है।
उन्होंने बताया कि फिनलैंड में जंगल ज्यादा होने की वजह से पेपर एंड पल्प पर बड़े स्तर पर काम होता है। जंगल सिर्फ फिनलैंड नहीं, पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था मजबूत कर सकते हैं। लोइकानेन का भारत अक्सर आना-जाना रहता है। वह यहां तमाम सेमिनारों में शामिल होते हैं। उन्होंने डॉ. मोहसिन के साथ पढ़ाई की है।

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