नि:शुल्क बोरिंग योजना में घपला

Bareilly Updated Mon, 29 Oct 2012 12:00 PM IST
बरेली। पिछले दो सालों में निशुल्क बोरिंग योजना में दिए गए 10.5 करोड़ रुपये की बंदरबांट बड़े ही खुले ढंग से की गई। इसमें लघु सिंचाई विभाग के ब्लॉक स्तर से लेकर बड़े अफसर तक शामिल रहे। किसानों के हाथ तो एक-दो पाइप ही आए। अगर ईमानदारी से जांच हो जाए तो जिले का यह बड़ा घोटाला साबित होगा।
मुरारपुर गांव के किसान इंतजार हुसैन को दफ्तरों के काफी चक्कर लगाने के बावजूद भी निशुल्क बोरिंग नहीं मिला। लेकिन जिन्हें भी इसका फायदा मिला, उनका कहना है कि इससे तो बिना फायदे के ही ठीक हैं। उन्होंने बताया कि 60-70 फीट बोरिंग करना पड़ता है। लघु सिंचाई विभाग के इंजीनियरों ने किसानों को सिर्फ एक दो पाइप ही दिए। बोरिंग कराने के लिए मशीन तक नहीं दी। मजदूरी से लेकर बोरिंग करने की मशीन का खर्चा किसानों को खुद वहन करना पड़ा। सही बात तो यह है कि इस योजना से किसानों को कागजों का पेट भरने लायक ही फायदा हुआ। किसानों के नाम चढ़ाई गई धनराशि का बड़ा हिस्सा तो कर्मचारी और इंजीनियर ही हजम कर गए। मझगवां ब्लॉक के गांव कुड़रिया फैजल्लापुर और पटपरागंज के किसान भी यही कहानी बताते हैं। उनका कहना है कि एक बार अफसर उनके यहां आकर जांच कर लें कि उनके गांव के जितने लोगों के नाम सूची में दर्ज हैं, उनके खेत में पिछले दो सालों में बोरिंग हुआ या नहीं? सारी असलियत खुद ब खुद उनके सामने आ जाएगी।

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