नि:शुल्क बोरिंग योजना में गड़बड़ियां दूसरे गांवों में भी मुरारपुर में भी लाभार्थियों की सूची फर्जी

Bareilly Updated Sun, 28 Oct 2012 12:00 PM IST
बरेली। निशुल्क बोरिंग योजना में घपले सिर्फ एक-दो गांवों में ही नहीं हैं। बल्कि दो सालों के दौरान दिखाए गए ज्यादातर बोरिंग संदिग्ध हैं। फतेहगंज पश्चिमी ब्लॉक के गांव मुरारपुर में तो ऐसे व्यक्ति के नाम भी बोरिंग चढ़ा दिया गया जो बरसों पहले गांव छोड़ चुका है। सूची में लाभार्थी के तौर पर दर्ज कुछ और लोग गांव में रहते तो हैं, लेकिन उनके खेतों में बोरिंग हुआ नहीं है।
अमर उजाला की टीम ने शनिवार शाम गांव मुरारपुर गांव में योजना का सच जानने की कोशिश की। लघु सिंचाई विभाग की लाभार्थियों की सूची के मुताबिक हमने जानना चाहा कि दिलशाद खां पुत्र खिल्लन खां के खेत में वर्ष 2010-11 में बोरिंग हुआ कि नहीं। दिलशाद के बेटे मुनाजिर खां ने बताया कि वह फरियाद करते-करते थक गए, मगर आज तक किसी अफसर, कर्मचारी या प्रधान ने उन्हें बोरिंग के लिए मदद नहीं दी। उन्हें बताया गया कि लाभार्थियों की सूची में उनके पिता का नाम है तो तैश में आ गए। कहा, ‘आप प्रधान से मेरा आमना-सामना करा दीजिए। पता चल जाएगा कि मैं सही बोल रहा हूं या विभाग का रिकॉर्ड। मेरे खेत में चलकर देख लीजिए, कहीं भी बोरिंग नहीं मिलेगा। पानी के लिए दूसरों के सामने मिन्नत करनी पड़ती है।’ वहां खड़े इंतजार हुसैन समेत और लोगों ने भी बताया कि मुनाजिर की बात सही है। सूची में अबरार खां पुत्र वशीर अहमद का नाम भी था। गांव वालों ने बताया कि अबरार दस बरस पहले भोजीपुरा के दोहरिया गांव में रहने चले गए हैं। उनका एक खेत गांव में जरूर है, जिसे पेशगी पर उठा दिया गया है। लेकिन इस खेत में बोरिंग नहीं है।
रिकॉर्ड में इस ग्राम सभा में 50 निशुल्क बोरिंग देना दर्ज है। कथित लाभार्थियों में तत्कालीन प्रधान हारून खां की मां कनीज बेगम समेत उनके भाई और नजदीकी रिश्तेदार भी शामिल हैं। हालांकि, प्रधान हारून खां का कहना है कि उनके गांव में निशुल्क बोरिंग करने में कहीं कोई गड़बड़ नहीं की गई। अब उनकी बात कितनी सही है, ये तो जांच का विषय है।

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