आज मोरनियां पहुंचेगा मुंशीलाल का पार्थिव शरीर

Bareilly Updated Thu, 25 Oct 2012 12:00 PM IST
बरेली/रिठौरा। एक और जांबाज ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण कुर्बान कर दिए। मोरनियां गांव के मुंशीलाल यादव ने लद्दाख में आतंकवादियों का डटकर सामना किया। अंत तक पीठ नहीं दिखाई। वह आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। बृहस्पतिवार की सुबह उनका पार्थिव शरीर मोरनियां गांव स्थित घर लाया जाएगा। बुधवार को दिन भर उनके घर आने-जाने वाले लोगों का तांता लगा रहा।
शहर से करीब चौदह किलोमीटर दूर पीलीभीत रोड पर बसे मोरनियां गांव निवासी मुंशीलाल यादव मीडियम रेजीमेंट आर्मी एविएशन में सिपाही थे। परिजनों के मुताबिक पिछले सप्ताह लेह लद्दाख में मुंशीलाल ने अपने साथियों के साथ आतंकवादियों से जमकर मुकाबला किया। अंत में वह लड़ते लड़ते देश के लिए शहीद हो गए थे।
परिवारजनों ने बताया कि मुंशी लाल के शहीद होने की सूचना 17 अक्तूबर की सुबह 11 बजे फोन पर सेना से मिली थी। उसी दिन बड़े भाई धन सिंह, बहनोई राम सिंह और मौसेरे भाई लालता प्रसाद चंडीगढ़ को रवाना हो गए। खबर से मोरनियां गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। परिजनों का कहना है कि मुंशीलाल ने देश की खातिर शहीद होकर गांव और देश का नाम ऊंचा कर दिया। बृहस्पतिवार की सुबह करीब सात बजे उनका पार्थिव शरीर सेना के वाहन से मोरनियां गांव लाया जाएगा। जहां सेनाधिकारियों की मौजूदगी में राष्ट्रीय सम्मान के साथ जांबाज को अंतिम विदाई दी जाएगी।
बुधवार को सेना के अधिकारी शहीद के परिजनों को ढांढस बंधाने मोरनियां गांव गए। देर शाम तक घर में रिश्तेदार, नजदीकी और गांव वाले आते-जाते रहे। ग्रामीणों के मुताबिक जांबाज मुंशीलाल शांत स्वभाव के थे। उन्हें खेती किसानी से ज्यादा लगाव था। छुट्टियों में घर आने पर खेती में जुट जाते थे।

जल्दी घर आने का किया था वायदा
बड़ी बेटी सावित्री ने बताया कि 15 अक्तूबर की शाम फोन पर मुंशीलाल ने परिवार वालों से बात की थी। उन्होंने जरूरी काम निपटाने के बाद 17 अक्तूबर को घर आने के लिए लद्दाख से रवाना होने को कहा था। अगले दिन परिजन फोन मिलाते रहे, लेकिन बात नहीं हुई। 17 तारीख की सुबह 11 बजे सेना के एक अफसर का फोन बेटी सावित्री के मोबाइल पर पहुंचा था। उन्होंने ही मुंशीलाल लाल के शहीद होने की सूचना दी।

अध्यापक बनकर नाम रोशन करेगी बेटी
मुंशीलाल के परिवार में पत्नी विमला, बेटी सावित्री, 12 साल का बेटा जितेंद्र कुमार, नौ वर्ष का करनपाल हैं। सावित्री ने इसी साल इंटर की परीक्षा पास की। उसकी तमन्ना अध्यापक बनकर पिता का नाम रोशन करने की है। मुंशीलाल के दो बड़े भाई कस्तूरी लाल और धन सिंह हैं। उनके माता-पिता पहले ही परलोक सिधार चुके हैं।

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