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राम बदले पर नाव-तालाब वही रहा

Bareilly Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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बरेली। चौधरी तालाब की रामलीला का इतिहास 445 साल पुराना है। समय के साथ यहां भी सब कुछ बदलता रहा। नहीं बदला तो चौधरी तालाब और भगवान राम को नदी पार ले जाने वाली नाव। पूरे जिले में यह एक मात्र स्थान है जहां भगवान राम को नदी पार कराने के प्रसंग का मंचन वास्तविक ढंग से किया जाता है।
महामाया होलिका मंदिर की पुजारिन अल्क शर्मा बताती है कि मंदिर के आसपास का क्षेत्र अयोध्या के रूप में दिखाया जाता है और तालाब के पार हार्टमैन मैदान लंका। इसी मैदान पर भगवान राम और रावण का युद्ध भी होता है। दृष्य बदलते ही स्थान भी बदल जाता है। बकौल अल्का शर्मा, ‘केवट प्रसंग’ के दौरान श्री राम नदी पार कराने का अनुरोध करते हैं, तो बरसों पुरानी नाव से केवट उन्हेें नदी पार कराते हैं और कहते हैं कि जैसे वह राम को पार लगाएंगे वैसे ही भगवान भी उनकी जीवन नैया पार लगाएंगे। इस प्रसंग में श्री राम और केवट के प्रेम को देखकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठते हैं। इस दौरान तालाब के चारों ओर लोग खड़े होकर रामलील देखते हैं। पूरे तालाब में नाव घूमती है और कुछ देर बाद राम, लक्ष्मण और सीता नदी पार कर लेते हैं। पं. जुगल किशोर दुबे ने बताया कि इस प्रसंग के बाद सभी श्रद्धालु हार्टमैन ग्राउंड की ओर चले जाते हैं। इस सजीव दृष्य को देखने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं।

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