गंदगी ने बंद किए रिश्तों के दरवाजे

Bareilly Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
बरेली। शहर की किसी समस्या का अगर रिश्तों की हद तक असर होने लगे तो बात कितनी अफसोसनाक है, यह कोई बाकरगंज वालों से पूछे। शहर से रोज निकलने वाला सैकड़ों टन कचरा सिर्फ बाकरगंज के खड्ड में डंप हो रहा है और फैला रहा है माहौल में तीखी बदबू। इलाके में पूरे शहर की गंदगी बीमारियां तो फैला ही रही है, कलेजा कुरेदने वाली बात यह है कि इस इलाके के विवाह योग्य युवाओं के रिश्ते भी लौटने लगे हैं। कोई मजबूर पिता भी नहीं चाहता कि उसकी बेटी इस गंदगी वाले बदबूदार इलाके में अपनी गृहस्थी शुरू करे।
लखनऊ की सी नफासत वाले बरेली का हाल यह है कि शहर में रोजाना 447 टन ठोस कचरा और गंदगी निकलती है। मगर सिर धुनने वाली बात यह कि नगर निगम के पास इस कूड़े के पहाड़ के निपटान की कोई व्यवस्था नहीं है। ठोस कूड़े के ट्रीटमेंट के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनकर तैयार हो चुका है, मगर विवादों के चलते इसे शुरू नहीं किया जा सका। ऐसे में सारा कूड़ा बाकरगंज खड्ड में ही डंप हो रहा है। इससे बाकरगंज के रहवासियों का तीखी बदबू ने जीना दुश्वार कर दिया है। अब स्थिति यह हो गई है कि यहां रहने वाले लोगों के यहां रिश्ते आने बंद हो गए हैं। गंदगी-बदबू का प्रभाव शहर के पर्यावरण यानी कि आम आबादी पर भी पड़ रहा है।
अक्टूबर के पहले हफ्ते में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर निगम से प्रतिदिन निकलने वाले कूड़े और उसके निस्तारण की व्यवस्था के बारे में ब्योरा मांगा था। जवाब में नगर निगम ने कूड़े के निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने और 447 टन ठोस कूड़ा रोजाना निकलने की जानकारी दी। नगरीय ठोस अवशिष्ट प्रबंधन नियम-2000 के तहत शहर में निकलने वाले ठोस कूड़े और कचरे को बगैर ट्रीटमेंट किए अनियंत्रित तरीके से खुले में फेंकना मना है क्योंकि इससे परिवेश और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। पेड़-पौधों को काफी नुकसान होता है। शहर के कूड़े को बाकरगंज डंपिंग ग्राउंड में फेंके जाने से यहां की करीब छह-सात हजार की आबादी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मेयर डॉ. आईएस तोमर ने पिछले कार्यकाल में यहां कूड़ा फेंकने पर रोक लगा दी थी। मगर यहां पर फिर से कूड़ा फेंका जाने लगा।

पानी भी पीने लायक नहीं रहा
बाकरगंज के लोग बताते हैं कि नलों का पानी भी पीने लायक नहीं रह गया है। नगर निगम की सप्लाई कभी आ गई तो कभी नहीं। डंपिंग ग्राउंड के बगल में लगा हैंडपंप महीनों से खराब है।

कोट....
‘कूड़े की लेवलिंग कराई जाती है, ग्राउंड की पिछली साइड में अभी काफी जगह बची है। स्थानीय लोगों की समस्याओं की शिकायतें अगर आती हैं तो उन्हें दूर किया जाता है।’
- उमेश प्रताप सिंह, नगर आयुक्त


स्थानीय लोगों ने कहा...
- अशमत हुसैन नमाज पढ़ने निकल रहे थे। बोले, नमाज पढ़ने जाते हैं तो कूड़े की बदबू से मन खराब हो जाता है। हमने शिकायतें कीं, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।
- नूर हसन ने कहा कूड़े की वजह से हमारे बच्चे और बुजुर्ग बीमार हो रहे हैं। कुछ दिनों पहले यहां पर स्वास्थ्य शिविर लगाया गया, लेकिन लोगों को सूचना तक नहीं दी गई।
- अकबर अहमद ने कहा कि लोगों ने हमारे मोहल्ले में रिश्ता जोड़ने से मना कर दिया है। क्योंकि यहां आने के बाद और गंदगी-बदबू देखने के बाद रिश्ता करने से मना कर देते हैं। यहां की बदबू बेचैन कर देती है।
- मोहम्मद मियां ने कहा कि सभासद से कई बार कह चुके हैं पानी की व्यवस्था कराने के लिए। लेकिन खराब नलों को दुरुस्त नहीं कराया गया। सप्लाई का पानी पीने लायक नहीं होता है।
- नूरजहां ने कहा कि घरों से निकलना दूभर हो गया है। बाहर निकलकर काम करना मुश्किल है। बदबू और गंदगी से बीमारी हो रही है। डायरिया और संक्रामक रोग हर साल फैलते हैं।

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