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किसी को सजा देनी हो तो भेजिए नैनीताल

Bareilly Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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बहेड़ी। सरकारी दाव-पेचों में आम लोगों का कोई जरूरी मसला कैसे फंसकर रह जाता है, नैनीताल रोड इसकी जीती-जागती मिसाल है। लंबा वक्त हो चला है इस सड़क को अफसरशाही की अनदेखी की मार झेलते हुए, लेकिन इधर तो कई महीनों से तो हाल यह है कि इस पर गुजरना किसी सजा से कम नहीं है। यूं इस सड़क को फोर लेन होना है। मंजूरी के सारे काम हो चुके हैं। सिर्फ छोटी-मोटी औपचारिकताएं बाकी रह गई हैं, लेकिन अफसरों की बेफिक्री का हाल यह है कि महीने दर महीने गुजरते जा रहे हैं और सड़क पर काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
बरेली से दिल्ली हाईवे के बाद नैनीताल रोड है जो सबसे ज्यादा व्यस्त रहती है। उत्तराखंड के तमाम धार्मिक स्थलों के अलावा नैनीताल-अल्मोड़ा जैसे पर्यटन स्थलों को जाने वाले हजारों लोग इसी सड़क से गुजरते हैं। इसके बावजूद यह सड़क बदहाल है। पुल भट्ठा से बरेली तक इतने बड़े गड्ढे हो गए है, जिनको देखकर हालत खराब हो जाती है। न सिर्फ छोटी गाड़ियां बल्कि कई बार ट्रक तक इन गड्ढों में फंस जाते हैं। बरेली से बहेड़ी तक 50 किलोमीटर का सफर करने में ही तीन घंटे से ज्यादा वक्त लग जाता है।
सड़क की यह हालत तब है जब इसे काफी वक्त पहले फोरलेन करने की मंजूरी हो चुकी है। पीडब्ल्यूडी इसके बाद इसे स्टेट हाईवे अथॉरिटी को हैंडओवर कर चुका है। काफी वक्त केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से सड़क के किनारे खड़े पेड़ों को काटने की इजाजत न मिलने से उसे फोरलेन करने का काम अटका रहा, लेकिन दो महीने पहले मंत्रालय पेड़ काटने की सैद्धांतिक मंजूरी दे चुका है। स्टेट हाईवे अथॉरिटी इससे पहले सड़क को फोरलेन करने की जिम्मेदारी कंसट्रक्शन कंपनी पीएनसी को दे चुका है, जो इसे फोरलेन करने के बाद 25 सालों तक टोल टैक्स की वसूली करेगी। अब सिर्फ यूपी के वन विभाग और स्टेट हाईवे अथॉरिटी के स्तर पर कुछ औपचारिकताएं बाकी रह गई हैं, जिनके पूरा न होने की वजह से काम शुरू नहीं हो पा रहा है। चूंकि सड़क स्टेट हाईवे अथॉरिटी को हैंडओवर हो चुकी है, इसलिए पीडब्ल्यूडी भी इसकी मरम्मत कराने की जिम्मेदारी से मुक्त हो चुकी है। इसी का खामियाजा सड़क से गुजरने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से नैनीताल रोड पर पेड़ों को काटने की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है, लेकिन अभी कुछ औपचारिकताएं बाकी रह गई हैं। इनके पूरा होते ही नैनीताल रोड को फोरलेन करने का काम शुरू कर दिया जाएगा। -आरके पांडेय, प्रोजेक्ट डायरेक्टर पीएनसी



इनसेट
अफसरों-जनप्रतिनिधियों को भी परवाह नहीं
नैनीताल रोड पर सफर करने वाले लोगों की तमाम दुश्वारियों की जानकारी होने के बावजूद न जनप्रतिनिधियों की ओर से इस पर जल्द काम शुरू कराने की कोई पहल हुई है, न प्रशासन के बड़े अफसरों की तरफ से। डीएम 15 सितंबर को जब बरेली से बहेड़ी गए थे तो उन्होंने खुद अपने मुंह से नैनीताल रोड के दुखदायी सफर का बयान किया था। यह तक कहा कि सड़क ने तो कमर ही तोड़ दी। पिछले दिनों बरेली से मेयर डॉ. आईएस तोमर भी बहेड़ी गए, लेकिन सड़क का हाल देखकर उन्होंने रास्ता बदल लिया। वह नवाबगंज होते हुए बहेड़ी पहुंचे और यह बात उन्होंने अपने भाषण में भी कही। यह बात अलग है कि अफसरों और जनप्रतिनिधियों के लिए यह सफर एक वक्ती दिक्कत भर था। इस सड़क पर रोज सफर करने वालों की मुसीबत के बारे में किसी ने नहीं सोचा।
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