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राजा दशरथ को मिला श्राप

Bareilly Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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श्रवण के माता-पिता बोले- हे राजन तुम भी पुत्र वियोग में मरोगे

बरेली। सुभाषनगर की रामलीला शुक्रवार से शुरू हो गई। इसके पहले दिन आज्ञाकारी श्रवण कुमार माता-पिता को तीर्थ यात्रा पर ले जाते हैं जहां दशरथ के तीर से श्रवण कुमार की मृत्यु हो जाती है। यह दृष्य देखकर श्रद्धालुओं की आंखें बरबस ही नम हो गईं।
सुभाषनगर की रामलीला में श्रवण कुमार अपने माता पिता को तीर्थ कराने के लिए ले जाते हैं। इस दौरान राजा दशरथ जंगल में शिकार के लिए निकले थे। तभी अपने माता-पिता को विश्राम करने के लिए छोड़ देते हैं और स्वयं पानी लेने चले जाते हैं। नदी से पानी लेने के दौरान कुछ आवास सुनाई दी राजा दशरथ ने सोंचा कि कोई जानवर पानी पी रहा है और उन्होंने तीर छोड़ दिया। वह तीर श्रवण कुमार को जा लगा जिससे उनकी मृत्यु हो गई। पुत्र की मृत्यु की सूचना मिलते ही वृद्ध माता-पिता विचलित हो उठे और क्रोध में राजा दशरथ को पुत्र वियोग का श्राप दे दिया। उन्होंने कहा कि जैसे मैं पुत्र की पीड़ा में बिलख रहा हूं, ऐसे ही तुम भी पुत्र वियोग में प्राण त्यागोगे। इसके साथ ही मंच का पर्दा गिर जाता है। इस मौके पर शोभाराम कश्यप, आलोक तायल, ओम प्रकाश कश्यप, ललित भंडारी आदि मौजूद रहे।

रामलीला में आज
0 नारद विवाह मोह प्रसंग का मंचन।

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फोटो....
लक्ष्मण और परशुराम के बीच हुआ संवाद
बरेली। जोगीनवादा की रामलीला में लक्ष्मण और परशुराम का संवाद हुआ। इससे पहले सुबह सुबह कृष्णलीला का मंचन हुआ। कृष्णलीला में भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं को देखकर श्रद्धालु हर्षित हो उठे। इसके अलावा शाम को हुई रामलीला में परशुराम की प्रतिज्ञा के बावजूद सीता से विवाह के लिए भगवान राम को धनुष तोड़ना पड़ता। इसके बाद राम और सीता का विवाह भी हुआ।

रामलीला में आज
0 भगवान राम को वनवास।
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फोटो...
प्रभु श्री राम का हुआ जन्म
बरेली। चौधरी तालाब की रामलीला में रावण और राक्षसों के अत्याचार से भयभीत देवतागण इंद्रलोक पहुंचे। देवताओं ने नारायण से प्राण रक्षा की गुहार लगाई लेकिन देवलोक भी रावण के बल के आगे नतमस्तक था। देवतागण भगवान विष्णु के पास पहुंचते हैं। जहां भगवान उन्हें देवलोक वापस कराने का वरदान देते हैं।
बिहार के बेगूसराय से आए कलाकारों द्वारा मंचित रामलीला में राजा दशरथ पुत्र प्राप्ति के लिए लिए यज्ञ करते हैं। यज्ञ से प्रसन्न होकर भगवान माता कौशल्या को उसके गर्भ से जन्म लेने का स्वप्न देते हैं। भगवान राम अत्याचारियों से धरती को मुक्ति दिलाने के लिए अपने तीन भाईयों लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ जन्म लेते हैं। इसके साथ ही पूरा रामलीला मैदान श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा।


रामलीला में आज
राम की बाल लीला झांकी, जानकी जन्म, विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा, ताड़का वध, अहिल्या उद्वार।


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