बदलते मौसम में बेमेल भोजन से लोग हो रहे बीमार

Bareilly Updated Thu, 11 Oct 2012 12:00 PM IST
बरेली। बदलते मौसम में खानपान पर ध्यान न देना अनकहे ही बीमारी को दावत दे रहा है। खाते समय भोजन के अधिकाधिक आइटम के लालच में पड़ना तो बीमारी के जाल में फंसने सरीखा है। खास तौर पर एक वक्त में रोटी के साथ चावल भी खाना इस समय चिकित्सकीय लिहाज से शरीर के पाचन प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है जो आपको बुखार, शरीर में दर्द, पेट में गैस, जलन आदि के रूप में महसूस होगा। हाल के दिनों में जिला अस्पताल में ऐसी शिकायतों के साथ पहुंचे लोगों के बीमारी की वजह के विश्लेषण में यही बात उभरकर सामने आई है।
चालू अक्तूबर माह में यहां ओपीडी में रोजाना न्यूनतम 1254 और अधिकतम 1545 नए मरीज उपचार को पहुंचे। इनमें 60 फीसदी को उक्त शिकायत रही। यह जानकारी पाकर अपर निदेशक डा. आरसी डिमरी का माथा ठनका। वह एक दिन खुद भी ओपीडी में मरीजों का चेकअप करने पहुंचे। साथ ही ड्यूटी कर रहे अन्य 12 चिकित्सकों के पास पहुंचे मरीजों के केस का ब्योरा लिया। विश्लेषण में रोचक तथ्य सामने आया। पाया कि हरारत, हल्का बुखार, पेट में दर्द, गैस, जलन, दर्द, जकड़न और अपच सरीखी शिकायतें लेकर पहुंचे मरीज खुद को वायरल पीड़ित होने का अंदेशा जाहिर कर रहे थे। लेकिन प्राथमिक जांच में ही अंदेशा खारिज हो गया। कारण जांच में इनमें बुखार सरीखी समस्या ही नहीं मिली। वजह कुछ और ्मिली। वह यह कि बदलते मौसम में मिस मैच या बेमेल भोजन करना। पाया कि इन्होंने रात के भोजन में रोटी के साथ चावल भी खाया। साथ में दाल और सब्जी के भी कुछ आइटम चखे। कुछ ने मसालेदार नान वेज (मांसाहारी) के साथ चावल खाया। अंत में चासनी में डूबी मिठाई भी खा ली। नतीजा यह कि स्टार्च, वसा और कार्बोहाइड्रेट की अधिकता से इनके शरीर में चय-पचय की प्रक्रिया प्रभावित हुई। कारण इन्हें पचाने को शरीर में स्रावित होने वाले पेंक्रियाटिक जूस, बाइल और एंजाइम्स की ऊर्जा कम पड़ जाती है। नतीजा कि नहीं पच पाए भोज्य के चलते पेट में गैस, अम्ल, जलन आदि विकार पनपा और इससे शरीर में जकड़न, दर्द, शरीर का ताप भी हल्का सा बढ़ा।

विशेषज्ञ चिकित्सक का पक्ष
1. कभी कभार तो बेमेल भोजन चल जाता है। लेकिन यह रूटीन में अपनाने पर दिक्कत पेश आती है। बदलते मौसम में रोटी और चावल एक ना लें। इससे पाचन को शरीर में स्रावित होने वाले द्रव का लक्ष्य भटकने लगता है। शरीर के भीतर स्वाभाविक क्रम में होने वाले कार्य के प्रभावित होने पर उसका असर बाहरी तौर पर दिखना लाजिमी है। इसमें दवा से ज्यादा सही मेल का भोजन करना सबसे कारगर है। -- डा. आरसी डिमरी, अपर निदेशक (स्वास्थ्य), बरेली।
2. जब भी मौसम बदलता है, उसमें खानपान संतुलित रखना सबसे अहम होता है। संतुलित खाइये, कम खाइए और अच्छा खाइए तभी स्वस्थ रहेंगे। अगर रोटी लें तो सिर्फ रोटी ही खाएं, चावल का लोभ त्यागें। चावल ही खाना है तो चावल ही लें, रोटी का लोभ छोड़े। मिस मैच डाइट लेने से शरीर की पाचन प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित होती है। इसका सीधा असर व्यक्ति के रोग प्रतिरोधी क्षमता (इम्यूनाइजेशन) पर पड़ता है। -- डा. प्रमेंद्र माहेश्वरी, प्रबंध निदेशक, गंगा चरण हास्पिटल।
3. शरीर में आंतरिक शक्ति बनाए रखने को संतुलित आहार सबसे जरूरी है। लेकिन लोग इस पर ध्यान ही नहीं देते। इसी कारण मिस मैच डाइट से कार्र्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, मिनरल्स आदि का अनुपात डगमगा जाता है। नतीजतन उसका असर शरीर विभिन्न रूप में सामने आता है। यह हरारत भी हो सकता है, पेट में गैस या जलन आदि के रूप में भी। -- डा. वाईके साहनी, कैंफर हास्पिटल।


क्या करें, क्या ना करें
जब चावल खाएं तो रोटी नहीं, रोटी खाएं तो चावल नहीं
सुबह नाश्ते में रूटीन में कचौड़ी - समोसे के सेवन से बचे
नाश्ते में एक ही प्रकार के भोज्य का सेवन करें। फल लें तो रोटी या पराठा नहीं।
चाय या काफी में दूध मिलाकर ना पीएं। इससे चाय या काफी में मौजूद लाभकारी एंटी आक्सीडेंट प्रभावहीन हो जाता है
माढ़ मिला हुआ दाल ना खाएं, यह पूरी तरह नहीं पच पाता क्योंकि इसमें स्टार्च अधिक होता है
बदलते मौसम में फ्रिज में ठंडा किया हुआ पानी पीने से बचें, नाक जाम या गले में खिचखिच नहीं होगी

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