‘गंगा-जमुनी संस्कृति, दिल हिंदुस्तानी है’

Bareilly Updated Sat, 06 Oct 2012 12:00 PM IST
रूहेलखंड महोत्सव में कविताओं से दिया राष्ट्रीय एकता का संदेश
बरेली। रूहेलखंड महोत्सव में हुए कवि सम्मेलन में स्थानीय कवियों के साथ ही अतिथि कवियों ने भी कौमी एकता और सौहार्दपूर्ण माहौल का संदेश देने वाली रचनाएं प्रस्तुत कीं।
कवि गौतम ने सुनाया-‘हर सुबह मचलती है और शाम सुहानी है, गंगा-जमुनी संस्कृति दिल हिंदुस्तानी है।’ बृजेंद्र ‘अकिंचन’ ने ‘सीढ़ियां मंदिर की चढ़ता दर्द मेरा, किंतु सुख शामिल नहीं है प्रार्थना में’ गीत गाया। नवोदित काव्य हस्ताक्षर मोहनांशु ‘रचित’ ने अपनी भावनाओं को कुछ इस प्रकार जाहिर किया-‘धड़कनें अब जा रही हैं साथ तन का छोड़कर, जाने क्या जादू किया है तुमने नाता जोड़कर’। कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि, विधायक डॉ. अरुण कुमार रहे। अध्यक्षता वरिष्ठ कवि श्रीराम मूर्ति गौतम ‘गगन’ ने की। विशिष्ट अतिथि श्री राम स्वरूप कुमुद रहे। संचालन रणधीर प्रसाद गौड़ धीर ने किया। कवि सम्मेलन में डॉ. विपिन सिन्हा, राजेंद्र श्रीमाली, कुमुद सम्हाले, अश्वनी कुमार तन्हा, सत्यवती सक्सेना, एसके कपूर हंस, सतीश शर्मा आदि कवियों ने समां बांधा। जिला समारोह समिति और श्री सिद्धि विनायक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, ऑल इंडिया कल्चरल कौमी एकता एसोसिएशन के तत्वावधान में हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया।
नाट्य प्रतियोगिता में जहां लखनऊ के राष्ट्रीय नाट्य परिषद के कलाकारों की ओर से मंचित ‘चौराहा’ पहले स्थान पर रहा। वहीं सर्वश्रेष्ठ निर्देशक नाटक के अशोक गेह, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता डॉ. अनुपम श्रीवास्तव और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री महिमा वाजपेयी को चुना गया। हास्य अभिनेता का पुरस्कार आतिफ हसीब को, प्रकाश व्यवस्था का पंकज श्रीवास्तव को, सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार के रूप में अंश, विशेष सामूहिक नृत्य में कुसुम कुमारी इंटर कॉलेज को पहला पुरस्कार दिया गया। समाजसेवी जेसी पालीवाल, इंस्टीट्यूट के उपनिदेशक बीएस सक्सेना ने विजेताओं को स्मृति चिन्ह और नकद राशि से सम्मानित किया।

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