मौत के मुंह से खींच ली जिंदगी

Bareilly Updated Sat, 06 Oct 2012 12:00 PM IST
बरेली। अक्सर सरकारी अस्पतालों में इलाज में लापरवाही और अव्यवस्थाओं की शिकायतें मिलती हैं, लेकिन तस्वीर का यही एक पहलू नहीं है। शुक्रवार को जिला अस्पताल में एक महिला को मौत की देहरी से लौटा कर डाक्टरों ने साबित कर दिया कि फर्ज निबाहने का जज्बा हो तो जिंदगी मुस्कुराने लगती है।
शुक्रवार की सुबह सात बजे। रेलवे पुलिस के जवान गंभीर रूप से घायल करीब 60 वर्षीय एक महिला को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे और भर्ती कराकर निकल लिए। महिला का बायां हाथ और पैर बुरी तरह घायल थे, टांग की हड्डी चार जगह से और हाथ दो जगह से टूट चुका था। वह लगभग कोमा में थी और टटोलने पर भी उसकी नब्ज नहीं मिल रही थी। डाक्टरों ने उसकी हालत को बेहद नाजुक पाया और उसके देर तक जिंदा रहने की उम्मीद बेहद कम दिखी। तभी जिला अस्पताल के सर्जन डा. कृष्ण वीर पाठक वहां पहुंचे। उन्हें लगा कि कोशिश की जाए तो महिला की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने ऐसा ही किया। उच्चाधिकारियों से अनुमति लेकर उन्होंने आपरेशन शुरू किया। करीब घंटे भर के आपरेशन के बाद महिला के हाथ-पैर में रक्त संचार सुचारू हुआ और दोपहर तक महिला की हालत में काफी सुधार आ चुका था। उसे इमरजेंसी वार्र्ड में गहन निगरानी में रखा गया है। महिला का नाम-पता जानने के लिए उसके पूरी तरह होश में आने का इंतजार किया जा रहा था।

सरकारी खर्च पर इलाज की मंजूरी
ट्र्रेन से गिरकर घायल हुई इस महिला का कोई परिजन नहीं होने के चलते ऑपरेशन के लिए जरूरी कनसेंट लिया जाना एक बड़ी समस्या बनी। यहां अपर निदेशक डा. आरसी डिमरी ने सराहनीय काम किया। कनसेंट पेपर भरा और ब्लड बैंक से खून मुहैया कराने के साथ सरकारी खर्चे पर उपचार करने की अनुमति प्रदान की।

बंथरा के पास गिरी थी ट्रेन से
यह महिला ट्रेन नंबर 14205 फैजाबाद दिल्ली एक्सप्रेस में सवार थी। ट्रेन शाहजहांपुर के पास बंथरा में धीमी हुई तो महिला ट्रेन से गिर गई। यात्रियों ने शोर मचाया तो ट्रेन में मौजूद रेलवे पुलिस वालों ने ट्रेन रुकवाई। बेसुध महिला को उसी ट्रेन में चढ़ाया और बरेली स्टेशन पर उतारा। यहां से जीआरपी वालों ने उसे जिला अस्पताल पहुंचाया।

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