‘आउटडेटेड’ स्टोव की फिर किचन में इंट्री

Bareilly Updated Thu, 04 Oct 2012 12:00 PM IST
बरेली। गैस सिलेंडर के आसमान छूते दामों ने घरों में आउटडेटेड हो गए स्टोव को फिर से चलन में ला दिया है। अब लोग बिजली और मिट्टी के तेल से जलने वाले चूल्हे का इस्तेमाल करने लगे हैं। कुछ ने खरीद लिया तो कुछ खरीदने की तैयारी में हैं। जिनके घरों में स्टोव कबाड़ का हिस्सा बने थे, उन्हें दुरुस्त करके किचन में इंट्री दे दी गई है।
अब जब घर में गीजर से लेकर कारें तक एलपीजी गैस के सहारे हैं, ऐसे में गैस का कोटा फिक्स होना और कोटे से ज्यादा सिलेंडरों को दामों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी ने हालात बदल दिए हैं। महिलाओं का कहना है, अब गैस पर खाना पकाने की हिम्मत ही नहीं हो रही है। कोई न कोई विकल्प तो ढूंढना ही पड़ेगा।

बोले व्यापारी
तेजी से बिकने लगे हैं स्टोव
केरोसिन स्टोव खरीदने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कुतुबखाने दुकानदार पोखड़दास को ‘स्टोव वाले’ ने बताया, पहले कभी-कभी ही कोई स्टोव खरीदने पहुंचता था। अब तो हर दिन चार-पांच स्टोव बिक रहे हैं। नैनीताल रोड पर स्टोव के दुकानदार शाइन हुसैन ने बताया, हर खरीददार यही कहता है कि अब गैस पर खाना बनाना मुश्किल हो गया है। लिहाजा स्टोव पर खाना बनाना मजबूरी बन गई है। उनके यहां से भी लोग हर दिन पांच से छह स्टोव बिक रहे हैं। सिविल लाइंस में कुमार लाइट हाउस के जगदीश कुमार ने बताया, बिजली के चूल्हे (हीटर) खरीदने वालों की संख्या भी काफी बढ़ गई है। पहले महीने में चार-पांच ही बिकते थे। अब 10-12 बिक रहे हैं।

महिलाओं से बातचीत
पुराने स्टोवों को फिर बना रहे काम लायक
बहुत पहले स्टोव खरीदा था। रसोई का सारा काम गैस पर होने लगा तो स्टोव को उठाकर कबाड़ में डाल दिया था। अब जब गैस सिलेंडर के दाम बढ़ गए हैं, तो फिर स्टोव की जरूरत महसूस होने लगी है। मेरी समझ से स्टोव जलाकर खाना बनाना गैस मुकाबले सस्ता पड़ेगा।-आशा अग्रवाल, गृहणी

पहले बेच दिया, अब दोबारा खरीदेंगे
मेरे घर में इस वक्त कोई स्टोव नहीं है। पहले कभी पीतल का स्टोव था। काम में न आने पर उसे बेच दिया था। अब लग रहा है कि बिना स्टोव खरीदे काम चलने वाला नहीं है, क्योंकि गैस का इस्तेमाल तो बजट ही बिगाड़ देगा। पहले लगा स्टोव आउटडेटेड हो गया है लेकिन अब उसका जमाना लौटता दिख रहा है। -जीनत, गृहणी

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