बर्थ डे या शादी की सालगिरह पर जरूर करते हैं रक्तदान

Bareilly Updated Tue, 02 Oct 2012 12:00 PM IST
बरेली। देश में स्वैच्छिक रक्तदान करने से लोग भले ही कतराते हों लेकिन स्वैच्छिक रक्तदान के लिए बरेली में 30 से 35 वर्ष की आयु वर्ग वाले मित्रों की एक मंडली मिसाल बनकर उभरी है। इनमें से हरेक के परिवार का एक सदस्य साल में एक बार जरूर रक्तदान करता है। इस दान का संकल्प ना टूटे, इसके लिए ये अपने बर्थ डे या मैरिज एनीवर्सरी को ही रक्तदान करने एक नायाब तरीका अपनाया हैं। इन मित्रों ने अपनी मंडली को किटी क्लब का स्वरूप दिया है। क्लब में पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी से लेकर जज, चिकित्सक, रंगकर्मी और शिक्षाविद तक शामिल हैं।
खास बात यह कि ये गुपचुप तरीके से ही रक्तदान करते हैं और इसकी जानकारी सिर्फ क्लब के सदस्यों के बीच में ही रहती है। ये अपने इस दान को महादान मानते हुए इसके प्रचार-प्रसार से एकदम दूरी बनाए रखते हैं। दूसरों को जिंदगी देने के लिए साल में एक यूनिट रक्तदान देने वाले इन युवाओं के बीच की दोस्ती भी अटूट है। क्लब के कई सदस्यों का अब दूसरे शहरों या प्रदेशों में तबादला हो चुका है। लेकिन ये आपस में संपर्क में बने रहते हैं। कम से कम साल में उस दिन क्लब के साथियों से जरूर संपर्क साधते हैैं, जिस दिन यह लोग या इनके परिवार का कोई सदस्य बरेली से बाहर रहते हुए भी रक्तदान के संकल्प का पालन करता है। पांच वर्ष पहले बने इस क्लब में सदस्यों की संख्या औसतन 25 ही रहती आई है। कुछ का तबादला शहर से बाहर होने पर कई बार सदस्यों की संख्यों घटकर 20 तक भी पहुंच गई लेकिन एक दो महीने के भीतर ही इस क्लब में नए सदस्य जुड़ जाते हैं।

बरेली के प्रमुख ब्लड बैंकों का ब्योरा एक नजर में
ब्लड बैंक क्षमता प्रतिदिन स्टॉक प्रतिमाह औसतन खपत
जिला अस्पताल 100 यूनिट कोई तय नहीं 50 से 60 यूनिट
आईएमए 2500 यूनिट 500 से 1000 यूनिट 2800 से 3400 यूनिट
गंगशील 700 यूनिट 100 से 250 यूनिट 800 से 1000 यूनिट
मिशन अस्पताल 600 यूनिट 200 से 250 यूनिट 500 यूनिट से अधिक
एसआरएमएस 1500 यूनिट 600 से 700 यूनिट करीब 2000 यूनिट
नोट : इन सभी ब्लड बैंकों में कंपोनेंट सेपेरेटर उपकरण लगे हैं। इससे एक ही यूनिट खून में श्वेत रक्त कणिकाएं, लाल रक्त कणिकाएं और प्लाज्मा को एक ही बार में अलग-अलग करने की सुविधा है।

जरूरतमंद थैलेसेमिया पीड़ितों को अपनाएगा मिशन अस्पताल
बरेली। मिशन अस्पताल के ब्लड बैंक ने एक खास परियोजना बनाई है। इसके तहत आर्थिक तौर पर विपन्न परिवार के थैलेसेमिया पीड़ित बच्चों को अपनाने का प्रस्ताव है। उन्हें नियमित मुफ्त खून चढ़ाने के साथ ही उनके नियमित केयर की सुविधा होगी। ब्लड बैंक प्रभारी डा. संगीता गुप्ता के अनुसार, यहां ऐसे पीड़ित बच्चों के खून से आयरन को भी मुफ्त निकाला जाएगा ताकि उसके लीवर, किडनी आदि प्रभावित न हो। सही मायनों में विश्वसनीय संस्था या चिकित्सकों की ओर से संस्तुत किए जाने वाले ऐसे केस ही यहां स्वीकृत होंगे। बता दें कि आईएमए के ब्लड बैंक में इस समय 71 थैलेसेमिया पीड़ित बच्चे पंजीकृत हैं। उन्हें आईएमए की ओर से नियमित मुफ्त मेें खून चढ़ाया जाता है।



58वीं बार किया रक्तदान
बरेली। भारतीय पत्रकारिता संस्थान के निदेशक वर्षीय सुरेंद्र बीनू सिन्हा (52) ने सोमवार को अपने जीवन में 58वीं बार रक्तदान किया। सोमवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) बरेली के ब्लड बैंक में राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के उपल्क्षय में आयोजित शिविर में उन्होंने रक्तदान किया। पहली बार वर्ष 1978 में उन्होंने 18 वर्ष की उम्र में दिल्ली में रक्तदान किया था। तब वहां एक जरूरतमंद घायल को रक्तदान किया था। राज्य रक्त संचरण परिषद ने भी इन्हें सम्मानित किया। आईएमए में लगे शिविर में इनके अलावा 39 लोगों ने रक्तदान किया। इस दौरान ब्लड बैंक की निदेशक डा. अंजू गोपाल के साथ रक्तदाता देवेंद्र सिंह, देवेंद्र सक्सेना, सुरेंद्र बीनू सिन्हा, राजा खान आदि मौजूद थे।

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