सब्सिडी तो कम हो ही गई, अब गैस सिलेंडर के लिए भी एजेंसियों के चक्कर

Bareilly Updated Sat, 29 Sep 2012 12:00 PM IST
बरेली। सब्सिडी के गैस सिलेंडरों की सीमा क्या तय हुई, लोगों की तमाम मुसीबतें एक साथ बढ़ गईं। नया गैस कनेक्शन लेना मुश्किल हो गया। कंपनी से कोई आदेश जारी होने के इंतजार में गैस एजेंसियों ने नए कनेक्शन देने ही बंद कर दिए हैं। सिर्फ यही नहीं जिसे नया कनेक्शन चाहिए, पहले उसका पूरा सत्यापन होगा और बाद में कनेक्शन भी तब दिया जाएगा जब कंपनी का आदेश होगा। कनेक्शन चाहे आईओसी का हो या बीपीसी और एचपी का, ग्राहकों की जांच के लिए उनसे एजेंसियों पर केवाईसी (अपने ग्राहक को जानिए ) नाम का फार्म भरवाया जा रहा है। इसके बाद कंपनी डाटा मैच कराएगी और तब नया कनेक्शन मिलेगा। शहर की 21 और देहात की सभी 12 एजेंसियों पर यह काम शुरू कर दिया गया है। इन दिनों एजेंसियों पर नए कनेक्शन के लिए जो लोग आवेदन लेकर आ रहे हैं, उन्हें टका सा जवाब देकर लौटा दिया जा रहा है। कनेक्शन का सत्यापन न कराने पर बुकिंग और डिलीवरी भी मुश्किल हो गई है। लोग अपनी पासबुक और रसीदें लेकर गैस एजेंसियों का चक्कर लगा रहे हैं।
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केस- 1: ईसाईयों की पुलिया के पास एक टेंपो रुका। ड्राइवर ने एक बुजुर्ग का हाथ पकड़कर बड़ी एहतियात से नीचे उतारा। बुजुर्गवार काफी बीमार थे, लेकिन किसी डॉक्टर के पास जाने के बजाय गैस एजेंसी में दाखिल हो रहे थे। पता चला कि वह जगतपुर के पूरन लाल हैं। बुखार आने के साथ उन्हें जोड़ो में दर्द की भी तकलीफ थी। लेकिन उनके गैस कनेक्शन का सत्यापन होना था, इसलिए बिस्तर से उठकर आना पड़ा। साथ में उनका नाती ओमप्रकाश था जो अपने टेंपो में उन्हें लेकर आया था। गैस एजेंसी से पीले रंग की कूपन बुक मिलने के बाद वे लौट गए।

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केस- 2: शाहजहांपुर रोड पर रोडवेज वर्कशॉप के पास स्थित एजेंसी के बाहर धूप में कई उपभोक्ता खड़े थे। इनमें एक पुराने शहर में रहने वाले विकास कुमार थे और उनके साथ काजी टोला के आरिफ हुसैन और कांकर टोला के मो. सलीम। चेहरों पर परेशानी झलक रही थी। पूछने पर पता चला कि उनके गैस कनेक्शनों पर बुकिंग कराने के कई दिन बाद भी सिलेंडर नहीं पहुंचा है। डिलीवरी देने से पहले पहचान पत्र या फिर दूसरी आईडी मांगी जा रही है। उन्होंने बताया कि कई दिनों से वे परेशान हैं। एजेंसी के चक्कर काटने के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है।

डिलीवरी स्लो होने से हो रही परेशानी
रसोई गैस सिलेंडरों की डिलीवरी की रफ्तार कम हो गई है। जो सेल्समैन दिन में 50 से 60 सिलेंडर लोगों के घरों तक पहुंचाते थे, अब वे 30 से ज्यादा सिलेंडरों की डिलीवरी नहीं कर पा रहे है। वजह यह है कि अब पासबुक, आईडी और कूपन देखने के बाद ही सिलेंडर दिया जा रहा है। बुकिंग होने के बावजूद डिलीवरी के दिन गैस न आने पर लोग गैस एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं। इसी तरह की भीड़ शहर के सुभाषनगर, ईसाईयों की पुलिया, किला, सिटी स्टेशन, पीलीभीत बाईपास स्थित एजेंसियों पर कभी भी देखी जा सकती है।

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वेंडर को उपभोक्ता अपनी पासबुक और कूपन दिखाकर सिलेंडर ले सकते हैं। इसके अलावा अपनी पासबुक का नंबर भी वे याद रखें। किसी कारण से कनेक्शन ट्रांसफर हुआ है तो उसे एजेंसी पर दर्ज जरूर करा दें। कुछ वेंडर सिलेंडर डिलीवरी का चार्ज बढ़ाने को लेकर काम रोके हुए हैं। एजेंसी मालिक इसका समाधान निकालने की कोशिश में लगे है।
रंजना सोलंकी, अध्यक्ष बरेली एलपीजी एसोसिएशन

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