बड़े बाईपास को जमीन देने वाले किसानों ने कहा- अपनी मर्जी से दी है जमीन

Bareilly Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
बरेली। बड़े बाईपास के निर्माण में मुट्ठी भर किसान ही रोड़ा अटका रहे हैं। उनका विरोध भी अब कमजोर पड़ता जा रहा है। मंगलवार को मुआवजा लेने एसएलएओ दफ्तर पहुंचे किसानों ने कहा कि उन्होंने प्रोजेक्ट के लिए अपनी मर्जी से जमीन दी है। बोले, शहर के विकास को बड़ा बाईपास बनना बेहद जरूरी है। इससे शहर को जाम से छुटकारा मिल जाएगा। हालांकि एसएलएओ के लखनऊ जाने की वजह से उन्हें मुआवजा नहीं मिल सका।
बड़ा बाईपास शहर का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसके लिए जमीन के अधिग्रहण का मामला काफी दिनों से खींचतान में फंसा हुआ है। जिला प्रशासन और एनएचएआई के अधिकारी जमीन के करार को किसानों से बातचीत कर रहे हैं। इसमें काफी हद तक सफलता भी मिली है। अब 33 गांवों में से कुछ ही गांवों के किसान जमीन देने में आनाकानी कर रहे हैं। मंगलवार को कई गांवों के किसान मुआवजा लेने एसएलएओ दफ्तर पहुंचे। कहा, उनकी सहमति से ही जमीन का अधिग्रहण हुआ है। बालीपुर के मदनलाल, मुरारीलाल, रुक्मिणी, सावित्री देवी और कुसुम कुमारी ने कहा कि हम भी चाहते हैं शहर का विकास हो। जमीन देने में कोई परेशानी नहीं है। जो विरोध कर रहे हैं, वह विकास के विरोधी हैं।

किसानों ने कहा... (फोटो )
- बिथरी चैनपुर के मुन्नालाल ने कहा कि जमीन हमारी सहमति से ली गई है। हमें जानकारों ने बताया है कि बड़ा बाईपास बनने से पूरे इलाके का विकास होगा।
- उड़ला जागीर के मूल प्रकाश ने कहा कि शहर का विकास होना ही चाहिए। प्रशासन हमें जमीन का उचित मुआवजा दे रहा है। इसमें हमें कोई परेशानी नहीं है।
- बिथरी के बालकराम ने कहा कि पहले जमीन का मुआवजा कम दिया जा रहा था। बाद में एक हेक्टेयर का 25 लाख मुआवजा तय किया गया। यह सही है।

मुआवजे के चेक तैयार
कई गांवों के 43 किसानों को बुधवार को एलएलएओ लक्ष्मीशंकर सिंह मुआवजा बांटेंगे। 62 लाख के चेक तैयार हो चुके हैं। इनमें बिथरी चैनपुर, कलारी, रूपापुर बड़ेपुरा, पुरनापुर, अहलादपुर, बालीपुर, फरीदापुर इनायत खां, शहताजपुर, इटौआ आदि गांवों के किसान शामिल हैं।

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