अल्पसंख्यक विद्यार्थियों का वजीफा खतरे में

Bareilly Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
केस-1
चक महमूद में रहने वाली कहकशा कक्षा छह की छात्रा हैं। वह पहले अपने पिता के साथ बैंक ऑफ बड़ौदा में अपना खाता खुलवाने गईं, लेकिन वहां कहा गया कि वह किसी और बैंक में अपना खाता खुलवाएं। इसके बाद वह दूसरे बैंक में गईं, लेकिन वहां भी उन्हें यही जवाब मिला।

केस-2
आठवीं में पढ़ने वाले चक महमूद के ही मोहम्मद उबैस कैनरा बैंक में खाता खुलवाने पहुंचे तो पहले उन्हें एक से दूसरे काउंटर पर भेजकर परेशान किया गया। मैनेजर से मिले तो उन्होंने यह कहते हुए खाता खोलने से इनकार कर दिया कि वजीफे के खाते सिर्फ बैंक ऑफ बड़ौदा में खुलते हैं।

केस-3
आठवीं में ही पढ़ने वाले मोहम्मद शुऐब खाता खुलवाने विजया बैंक में गए थे, वहां उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि उनका खाता उसी बैंक में खुलेगा जहां उनके स्कूल के मैनेजमेंट का खाता है। शुऐब इसके बाद दूसरी बैंक में गए तो वहां खाता न खुलने की कुछ और ही वजह बताई गई।

बरेली। अल्पसंख्यक विद्यार्थियों का वजीफा राज्य सरकार के एक आदेश की वजह से इस बार खतरे में हैं। आदेश यह है कि वजीफा इस बार राष्ट्रीयकृत बैंकों में उनके खातों में ही भेजा जाएगा। बैंकों को इसके लिए जीरो बैलेंस पर खाते खोलने को कहा गया है, लेकिन बैंक आनाकानी कर रहे हैं। हालत यह है कि खाता खोलने की आखिरी तारीख 30 सितंबर है, लेकिन अभी तक दस फीसदी विद्यार्थियों के भी खाते नहीं खुल पाए हैं।
जिले में छठी, सातवीं और आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले अल्पसंख्यक वर्ग के 2.35 लाख विद्यार्थी हैं, जिन्हें वजीफा दिया जाना है। वजीफा उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा, लेकिन बैंकों में खाते खुलने की रफ्तार इतनी धीमी है कि 30 सितंबर तक यह काम पूरा हो पाना मुमकिन नहीं लग रहा। दो बार पहले भी खाते खुलवाने की आखिरी तारीख बढ़ाई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अभी तक करीब 22 हजार विद्यार्थियों के ही खाते खुल पाए हैं। जीरो बैलेंस पर खाता खुलवाने वाले विद्यार्थियों की इतनी बड़ी तादाद होने की वजह से ज्यादातर बैंक आनाकानी कर रहे हैं, लिहाजा विद्यार्थी और उनके अभिभावक बैंकों के चक्कर लगा-लगाकर परेशान हो रहे हैं। हालांकि कुछ बैंकों ने झंझट से बचने को खाते खोलने वाले फार्म स्कूलों को ही भेज दिए हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा ने एफआर इस्लामिया कॉलेज में फार्म भेजे हैं। स्कूल प्रबंधन को ही फार्म भरवाकर बैंक में जमा करना होगा।

अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के खाते राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही खुलने हैं। बैंकों में खाते खोले भी जा रहे हैं। अगर कहीं कोई दिक्कत है तो उसे हम उसे दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। ये सभी खाते जीरे बैलेंस पर खुलने हैं।-मधुर मोहन श्रीवास्तव, लीड बैंक मैनेजर
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इन्सेट
ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी ठप
जिले के एक भी स्कूल का वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन नहीं

बरेली। छठी से आठवीं तक के अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को तो वजीफे के लिए बैंक में खाता खुलवाना है, लेकिन दसवीं से आगे की कक्षाओं के अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को वजीफे के लिए ऑनलाइन आवेदन करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन जिले के किसी स्कूल का अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन ही नहीं है, लिहाजा वजीफे के लिए ऑनलाइन आवेदन भी नहीं हो पा रहे हैं।
वजीफे के लिए ऑनलाइन आवेदन की भी आखिरी तारीख 30 सितंबर है। लेकिन विद्यार्थियों का कहना है कि आवेदन करते वक्त वेबसाइट पर बरेली के किसी स्कूल का नाम ही नहीं आ रहा है। जेएलए-2 में 11वीं के विद्यार्थी इमरान खान के अभिभावक अहमद सईद खान के मुताबिक उन्होंने वजीफे के लिए जब ऑनलाइन फार्म खोला तो पता चला कि जेएलए-2 का नाम ही नहीं है। दूसरे स्कूल चेक किए तो वेबसाइट पर जिले के किसी भी स्कूल का नाम नहीं आया। जाहिर है कि ऐसे में आवेदन करना मुमकिन ही नहीं है। उन्होंने इसकी शिकायत जेएलए-2 में जाकर की तो प्रिंसिपल ने जल्द रजिस्ट्रेशन कराने का भरोसा दिलाया। अहमद सईद खान कहते हैं कि अल्पसंख्यकों के वजीफे के बारे में स्कूलों को जानकारी ही नहीं है। इसीलिए उन्होंने रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया है।

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