बिजली बिलों में भी खेल

Bareilly Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST

मोहसिन पाशा
बरेली। बिजली के बिल का भुगतान करने से पहले अच्छी तरह से पड़ताल कर लें कि यह बिल तय दरों के हिसाब से भेजा गया है कि नहीं। दरअसल तमाम उपभोक्ताओं को पहले निर्धारित दर से ज्यादा का बिल भेज दिया जाता है और बाद में इसे ठीक करने के नाम पर अवैध वसूली की जाती है। बिजली उपकेंद्रों पर हर महीने सैकड़ों की तादाद में इस तरह की शिकायतें लेकर उपभोक्ता पहुंचते हैं, लेकिन इस समस्या का स्थायी समाधान उन्हें नहीं मिल पा रहा है। यहां तक कि मुख्य अभियंता ने भी बिलों में गड़बड़ की जाने की बात स्वीकार की। उनका कहना है कि बिलिंग कंपनी के अफसरों से उन्होंने इस पर सख्त एतराज भी जताया है।
नगर निगम क्षेत्र में बिजली विभाग के कुल एक लाख 66 हजार 690 उपभोक्ता हैं। इनमें से 1.22 लाख घरेलू कनेक्शनधारक हैं। नियम है कि हर कनेक्शन धारक के यहां जाकर कर्मचारी बिल देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। महीनों बिल नहीं आता है और जब लोग बिजली दफ्तर में बिल लेने जाते हैं, तो इसमें भी खेल कर दिया जाता है। मसलन, दो सौ यूनिट प्रति माह तक बिजली खपत होने पर 3.45 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिल दिया जाना चाहिए, मगर उन्हें 3.80 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिल भेज दिया जाता है। जबकि यह दर तभी लागू होती है, जब खपत दो सौ यूनिट से ज्यादा हो। बिलों की गड़बड़ी यहीं तक ही सीमित नहीं है। सुभाषनगर के ओमकार सिंह के यहां पांच महीने में 800 यूनिट बिजली की खपत हुई। उन्हें जब बिल मिला तो इसके रेट 3.80 रुपये प्रति यूनिट लगाए गए थे। उन्होंने बिजली दफ्तर में जाकर उपभोक्ता फोरम में बिल जमा करने की चेतावनी दी तभी उनका बिल ठीक किया गया। होता यह है कि बिल गड़बड़ होने पर उपभोक्ता परेशान होकर बिजली दफ्तरों के चक्कर लगाते हैं। फिर उन्हें इतना परेशान कर दिया जाता है कि वे सुविधा शुल्क देकर भी बिल को ठीक कराने के लिए तैयार हो जाते हैं। गड़बड़ बिल भेजने के पीछे यही खेल चल रहा है।



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टैरिफ :-
खपत (यूनिट में) बिल प्रति यूनिट
0-100 1.90 रुपये
101-150 2.50 रुपये
151-200 3.45 रुपये
इससे ऊपर 3.80 रुपये

एक किलोवाट पर फिक्स चार्ज : 50 रुपये प्रति माह
इसके ऊपर प्रति किलोवाट फिक्स चार्ज : 65 रुपये प्रति माह
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सभी के फोटो
केस -1
-छह महीने से बिल घर नहीं पहुंचा, पिछले महीने बिजली दफ्तर जाने पर ही बिल मिला। घर जाकर हिसाब किताब लगाया तो इसमें गड़बड़ मिली। जिस महीने में 198 यूनिट की खपत हुई, उसकी दर भी 3.80 रुपये लगाई गई थी। शिकायत करने पर दो हजार रुपये कम हो गए।-सुनील जोशी, डिफेंस कालोनी

केस-2
- बिजली विभाग कभी बिल समय पर नहीं देता। खुद ही बिल देर से देते हैं और जमा करने जाओ तो सरचार्ज (लेट पेमेंट पर लगने वाला ब्याज) भी वसूलता हैं। पिछले महीने के बिल में गलत रेट लगाए गए थे। सही कराने में देर हुई तो 300 रुपये की पेनाल्टी देनी पड़ी। -सतेंद्र कुमार मिश्रा, दुकानदार, हार्टमैन स्कूल के पास

केस-3
- हर महीने बिल निकलवाने के लिए मुख्य अभियंता के दफ्तर में आना पड़ता है। आखिरी बार मार्च में बिल उनके घर पहुंचा था, वो भी 40 हजार रुपये का। अफसरों के सामने दमदारी से अपनी बात रखी तो यह 15 हजार रुपये हो गया। उपभोक्ताओं से अवैध वसूली के लिए यह गड़बड़ की जाती है।-पूजा, अलोक नगर

हर महीने आती थीं सात सौ शिकायतें
-चीफ इंजीनियर के दफ्तर में जुलाई और अगस्त में चले कंट्रोल रूम में बिजली बिलों में गड़बड़ से संबंधित हर महीने करीब 700 शिकायतें आईं। शहर में उपद्रव के बाद स्थिति सामान्य होने पर कंट्रोल रूम बंद कर दिया गया। अब तो अलग-अलग उपकेंद्रों पर ही शिकायतें आती हैं। विभाग के पास ऐसा कोई डाटा नहीं रहता, जिससे पता चल सके कि अब जिले या मंडल में हर महीने कितनी शिकायतें आ रही हैं।

चीफ इंजीनियर ने स्वीकारी गड़बड़
-बिलों में गड़बड़ी के लिए उपभोक्ता भी जिम्मेदार हैं। उपभोक्ता रीडिंग करने वालों को लालच देकर कम यूनिट लिखवा देते हैं। अगले महीने जब दूसरा कर्मचारी यूनिट लेने जाता है तो बिल ज्यादा आ जाता है। इससे शिकायतें बढ़ रहीं हैं। कुछ बिल गड़बड़ भी हो रहे हैं। इसके लिए मैंने बिलिंग कर रही कंपनी स्टर्लिंग के अफसरों को कसा है- वीके शर्मा, चीफ इंजीनियर

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