एक्स-रे में धब्बा आना ही टीबी नहीं

Bareilly Updated Mon, 24 Sep 2012 12:00 PM IST
बरेली। सैफई मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि एक्स-रे में दिखने वाला हर धब्बा टीबी का कारण नहीं होता। एक्स-रे की पड़ताल में जरा सी भी चूक रोगी को भारी पड़ सकती है। फेफड़ों के कैसर, टीबी, अस्थमा और ब्रॉन्काइटिस आदि बीमारियों के एक्स-रे लगभग एक जैसे ही होते हैं। लिहाजा डॉक्टरों को एक्स-रे देखने के साथ ही पेशेंट की फैमिली हिस्ट्री भी जरूर पता करनी चाहिए। डॉ. प्रसाद ने ये विचार रविवार को आईएमए भवन में आयोजित कॉन्फ्रेंस रेस्पीकॉन-2012 में रखे। उन्होंने पल्मोनरी फाइब्रोसिस (इंटरस्टीशियल लंग डिजीज) के निदान और इलाज की नई तकनीक के बारे में भी बताया। कॉन्फ्रेंस में प्रदेश के कई नामचीन डॉक्टरों ने विचार व्यक्त किए।
कॉन्फ्रेंस की शुरुआत विशिष्ट अतिथि मेयर डॉ. आईएस तोमर और नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार ने की। डॉ. प्रसाद ने बताया कि डॉक्टरों को इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि फिजूल की जांचों के बजाय रोगी को सस्ता इलाज मिल सके। ज्यादातर रोगों की जानकारी तो फैमिली हिस्ट्री से ही हो सकती है, लेकिन डॉक्टर बिना मरीज को समय दिए ही जांच कराकर रोग जानने का प्रयास करते हैं। जल्दबाजी में फेफड़े के कैंसर को टीबी समझ लिया जाता है और इलाज शुरू कर दिया जाता है। इससे कैंसर लास्ट स्टेज पर पहुंच जाता है।
चेस्ट विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी ने अस्थमा-टीबी के इलाज और जांच के नए तरीके बताए। कहा, अस्थमा छुईमुई के पेड़ की तरह है। धूल, परागकण आदि के संपर्क में आने पर सांस नली सिकुड़ जाती है। ऐसे मरीज अगर इन्हेलर का इस्तेमाल करें तो वे भी सामान्य जीवन जी सकते हैं। डॉ. राज तिलक ने पीड्रियाटिक अस्थमा के बारे में बताया। केजीएमयू कानपुर के डॉ. एके सिंह, डॉ. बीपी सिंह, डॉ. दीपक तिवारी, डॉ. राजीव गर्ग ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर आईएमए के अध्यक्ष डॉ. अंशु अग्रवाल, एसोसिएशन ऑफ चेस्ट फिजीशियन के अध्यक्ष डॉ. वीके अस्थाना, कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन डॉ. राजेश अग्रवाल, सचिव रजत अग्रवाल आदि मौजूद रहे।


अस्थमा में ऐसे रखें अपना ख्याल
0 डॉक्टर की सलाह से ही दवा और इन्हेलर का इस्तेमाल करें।
0 धूल, धुआं और फास्ट फूड से बचें।
0 घर में टेडीबियर, मैट आदि का कम इस्तेमाल करें।
0 कूलर के बजाय एसी का प्रयोग करें।
0 सेमल की रुई की रजाई न ओढ़ें।
0 रोज बेडशीट साफ करें।
0 मोटापा न बढ़ने दें। इससे भी अस्थमा हो सकता है।
0 नॉन-वेजेटेरियन को इसका ज्यादा खतरा रहता है।
0 जल्दी-जल्दी सर्दी-जुकाम होने पर अस्थमा का खतरा बढ़ जाता है।
0 सिजेरियन ऑपरेशन से होने वाले बच्चों को इसका ज्यादा खतरा रहता है।


इन महिलाओं को हो सकती है टीबी
0 कुपोषण से पीड़ित महिलाएं।
0 एनीमिया ग्रस्त महिलाएं।
0 कम उम्र में विवाह होने।
0 जल्दी गर्भधारण करने पर।
0 बार-बार गर्भधारण होने पर।
0 धूम्रपान, अल्कोहल, नशा करने।
0 अवसादग्रस्त और तनाव में रहने।
0 बहुत ज्यादा डायटिंग करने।

यह एहतियात जरूरी
0 दो हफ्ते से ज्यादा खांसी रहने पर जांच कराएं।
0 मरीज को एसी में न रखें।
0 घर खुला और हवादार हो।
0 बलगम को खुले मैदान में धूप में ही फेंके।
0 डॉक्टर की सलाह से नियमित दवाई लें।






डॉक्टरों से बातचीत...............

सौरभ गांगुली, पीटी ऊषा, अमिताभ भी अस्थमा रोगी
केडीएमयू के चेस्ट विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी ने बताया कि सौरभ गांगुली, पीटी उषा, शोएब अख्तर और अमिताभ बच्चन को भी अस्थमा है, लेकिन से सभी इन्हेलर का इस्तेमाल करते हैं। पहले देश में एक फीसदी रोगी ही इन्हेलर का इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब 20 फीसदी लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। देश में 1999 में अस्थमा रोगियों की संख्या एक करोड़ थी, जो अब घटकर 30 हजार रह गई है। दो हफ्ते से ज्यादा खांसी रहे तो बलगम की जांच जरूर कराएं। इसमें भी पॉलीमरेज जीन एक्सपर्ट टेस्ट में 48 घंटे के अंदर रिपोर्ट पता चल जाती है। सामान्य जांच में छह से नौ सप्ताह का समय लगता है।

रोग कुछ, इलाज कुछ करते हैं डॉक्टर
सैफई मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने एक महिला रोगी का किस्सा सुनाया। बोले, एक बार एक लंबे वालों वाली महिला उनके पास आई। उसके फेफड़े के एक्स-रे में ऊपर की तरफ धब्बा दिख रहा था। डॉक्टर ने एक्स-रे में धब्बा देखकर टीबी बता दी थी। मैंने दोबारा एक्स-रे कराया तो उसमें कुछ नहीं दिखा। बाद में पता चला कि पहले एक्स-रे में चोटी सामने आने की वजह से धब्बा आ गया था। कहने का आशय यह है कि पूरी तरह कन्फर्म होने पर ही डॉक्टर टीवी का इलाज करें।

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