मदीने वाले को मेरा सलाम कहना

Bareilly Updated Sun, 23 Sep 2012 12:00 PM IST
बरेली। हज पर जाने वाले यात्रियों के पहले जत्थे को लोगों ने फूल बरसा कर नम आंखों से विदाई दी। आजमीनों को सभी ने हज मुबारक कहा और मदीने वाले आका को उनका भी सलाम पेश करने की इल्तिजा की। उन्हें एक खत भी दिया गया। कहा कि, इसे आका के हवाले कर देना। खत में हिंदुस्तान और खासकर बरेली में अमन और तरक्की के लिए दुआ की गई है। यात्रियों को विदाई देने के लिए यूपी हज कमेटी के सदस्य सरफराज वली खां, बरेली हज कमेटी के डॉ. एचसी हुदा, पम्मी खान वारसी, नासिर कुरैशी के अलावा विशाल मेहरोत्रा, अजय गावा, नदीम शम्सी, ताहिर हुसैन, यासीन कुरैशी, इकबाल यूसुफ आदि मौजूद रहे।

माफी मांगना है गुनाहों के लिए
हर मुसलमान की तमन्ना होती है कि वह सला व सल्लाम का दीदार करे। इस साल मैं हज को जा रहा हूं। मुझे तमाम गुनाहों के लिए माफी मांगना है। इल्तिजा करना है कि अब कोई गलती न हो। पहला घर खुदा का है, शबाब करना है। यह अब भी सिर्फ परंपरा ही नहीं, बल्कि सच है कि कफन साथ ले जा रहे हैं। रास्ता अब भी काफी जटिल, पता नहीं क्या हो जाए।
-कदीर मियां, जखीरा।

कोशिश है कि पक्का हाजी बनकर आऊं
बचपन से हज पर जाने की तमन्ना थी। मै प्रापर्टी डीलिंग का काम करता हूं, जो कुछ बचाया था उससे 2007 में वालिदा को हज पर भेजा। इस बार मैं पत्नी के साथ जा रहा हूं। हमने तो पहली बार ही आवेदन किया था, अल्लाह ने सुन ली। यह भी कोशिश करूंगा कि पक्का हाजी बनकर आऊं, ताकि ईमानदारी और सच्चाई से आगे की जिंदगी चले।
-अब्दुल वसीम खां, बिहारीपुर करोलान।

हज का टिकट करने के लिए शुक्रिया
हज का टिकट कटने के लिए अल्लाह की ही रहमत है। पहली बार में ही मेरा और पत्नी का नंबर आ गया। वहां जाते समय हम लोग बहुत खुश हूं। हज से लौटने तक परिवार की चिंता तो रहेगी। हमारे तीन बेटे और दो बेटियां के अलावा बहुत सारे रिश्तेदार व मोहल्ले के लोग भी विदाई देने आए हैं। इन सबके लिए हम दुआ करेंगे।
-नियामतुल्ला कुरैशी, जखीरा।

ये हुए रवाना
1. अब्दुल वसीम खां और उनकी पत्नी शबाना, बिहारीपुर करोलान।
2. हनीफ कुरैशी और पत्नी जैबुल निशा, आजमनगर।
3. नियामतुल्ला और पत्नी जुबैदा, जखीरा।
4. अब्दुल कबीर, जखीरा।
5. फिरोज कुरैशी, आजमनगर।
6. अशफाक हुसैन, मलूकपुर लाल मस्जिद।
7. मुन्ना हुसैन, बिहारीपुर करोलान।
8. तायरा बी, ख्वाजा कुतुब।
9. जमील खां, किला।
10 कदीर मियां, जखीरा।

तमन्ना रह गई अधूरी
बरेली। सीबीगंज के तिलियापुर में रहने वाले बाबू दीन की हज जाने की तमन्ना अधूरी रह गई। उन्हें लखनऊ से फ्लाइट से रवाना होना था, मगर बीते बृहस्पतिवार को वह दोहना के पास सड़क हादसे में घायल हो गए। उन्हें अस्पताल से छुट्टी तो मिल गई, मगर वह अभी चलने-फिरने लायक नहीं हो सके, सो मजबूरी में यात्रा निरस्त करनी पड़ी।

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